
लासीक्याप–सिसौल सड़क खंड निर्माण की जिम्मेदारी नेपाली सेना को दी जाएगी
३ चैत, डोल्पा । भेरी कोरिडोर के अंतर्गत डोल्पा के लासीक्याप से सिसौल तक की सड़क खंड निर्माण की जिम्मेदारी नेपाली सेना को दी जाने वाली है। चैत १ को हुई नेपाल सरकार की मंत्रिपरिषद् की बैठक में लासीक्याप–सिसौल सड़कखंड के ३३ किलोमीटर सड़क निर्माण की जिम्मेदारी सेना को देने का निर्णय लिया गया है।
सेना को जिम्मेदारी दी जाने वाली यह सड़क खंड अत्यंत खड़ी पहाड़ी और कठोर चट्टानी भूभाग में स्थित है, इसलिए निर्माण कार्य चुनौतीपूर्ण रहेगा। कठिन भूगोल के कारण पहले मापदंड के अनुसार ट्रैक खोलने में भी काफी कठिनाइयाँ आई थीं।
भेरी कोरिडोर बाँके के जमुनाह से शुरू होकर सुर्खेत, सल्यान, जाजरकोट और रुकुम पश्चिम होते हुए डोल्पा के दुनै, धो और तिन्जे होते हुए तिब्बत की सीमा तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है। इस सड़क को नेपाली भूमि से होते हुए भारत और चीन को जोड़ने वाली सबसे छोटी सड़क माना जाता है।
चीन, नेपाल और भारत को जोड़ने वाली त्रिदेशीय सड़क होने के कारण इस कोरिडोर को रणनीतिक और व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
सेना को जिम्मेदारी दी जाने वाली सड़क खंड अत्यंत खड़ी पहाड़ी और कठोर चट्टानी भूभाग में स्थित होने के कारण निर्माण चुनौतीपूर्ण होगा।
२०७५ मंसिर ४ को डोल्पा के त्रिपुराकोट तक ट्रैक खोलते हुए भेरी कोरिडोर का औपचारिक उद्घाटन हुआ था। लेकिन उद्घाटन के बाद कई साल बीत जाने के बावजूद निर्माण में पर्याप्त गति नहीं आ सकी है।
भेरी कोरिडोर आयोजना कार्यालय, जाजरकोट के अनुसार सुर्खेत के छिन्चु से डोल्पा के मोरिम्लास तक करीब ३१७ किलोमीटर सड़क है। इसमें से छिन्चु से जाजरकोट सदरमुकाम होते हुए तल्लुबगर तक सड़क कालोपत्रे हो चुकी है और कुछ जगहों पर पक्के पुल निर्माण के चरण में हैं।
कोरिडोर के तल्लुबगर से त्रिपुराकोट तक सड़क स्तरोन्नत कार्य शुरू हो चुका है और पक्के पुल भी बनाए जा रहे हैं।
कोरिडोर में आने वाले विभिन्न सड़क खंडों में सड़क संकरी होने के साथ-साथ भूस्खलन तथा पत्थर-मिट्टी गिरने की समस्या भी अधिक है।
यदि भेरी कोरिडोर पूरा हो जाता है तो डोल्पा के प्रसिद्ध पर्यटक स्थल फोक्सुन्डो ताल, जगदुल्ला ताल, सुलीगाड झरना, छार्का भोट बस्ती, त्रिपुरा सुंदरी मंदिर, धो उपत्यका सहित अन्य जगहों पर देशी और विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है।
सिर्फ पर्यटन के लिए ही नहीं, बल्कि डोल्पा में उत्पादित यार्सागुम्बा, जटामसी, सेब और अखरोट जैसे कीमती उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँचाने में भी यह सड़क कारगर होगी। इसके साथ ही धो इलाके में भविष्य में हिमालयी शहर विकसित करने की सरकारी योजनाओं में भी इस सड़क की महत्वपूर्ण भूमिका होगी, ऐसा स्थानीय लोग मानते हैं।
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