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सरकार गठनको बाटो खुला, के छन् अबका प्रक्रिया ? – Online Khabar

सरकार गठन का मार्ग खुल गया, अब प्रक्रिया क्या होगी?


५ चैत, काठमाडौँ। २१ फागुन को प्रतिनिधि सभा सदस्य निर्वाचन के मत परिणाम सहित की रिपोर्ट राष्ट्रपति कार्यालय को समर्पित होने के साथ अब नई सरकार गठन का मार्ग खुल चुका है।

प्रतिनिधि सभा सदस्य निर्वाचन ऐन, २०७४ के धारा ६२ के अनुसार, निर्वाचन के नतीजे घोषित होने के एक सप्ताह के अंदर अंतिम परिणाम सहित की रिपोर्ट राष्ट्रपति के सामने प्रस्तुत करनी होती है।

इसमें कहा गया है, ‘आयोग को प्रत्यक्ष तथा समानुपातिक प्रणाली के निर्वाचन परिणाम सहित की रिपोर्ट नतीजा घोषित होने के सात दिनों के अंदर राष्ट्रपति के पास भेजनी होगी।’

इसी व्यवस्था के तहत गुरुवार को कार्यवाहक मुख्य निर्वाचन आयुक्त रामप्रसाद भण्डारी सहित आयुक्तों ने राष्ट्रपति के समक्ष रिपोर्ट भेंट की है। आयोग की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के साथ ही संसद का अधिवेशन बुलाने और नई सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू होने का रास्ता खुल चुका है।

राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल के समक्ष प्रतिनिधि सभा निर्वाचन रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए कार्यवाहक मुख्य निर्वाचन आयुक्त रामप्रसाद भण्डारी।

रिपोर्ट के अध्ययन के बाद राष्ट्रपति पौडेल आगे की प्रक्रिया शुरू करेंगे। सबसे पहले निर्वाचित सांसदों की शपथ ग्रहण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

चैत १२ गते सुबह ११:३० बजे वरिष्ठ सदस्य द्वारा शपथ दिलाई जाएगी।

निर्वाचन आयोग के अनुसार, निर्वाचित सदस्यों में अर्जुननरसिंह केसी सबसे वरिष्ठ सदस्य हैं और उनकी उम्र ७८ वर्ष है। राष्ट्रपति से शपथ ग्रहण के उपरांत उसी दिन वरिष्ठ सदस्य केसी अन्य सदस्यों को शपथ दिलाएंगे। इसके बाद नई सरकार गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

निर्वाचन आयोग द्वारा राष्ट्रपति को प्रस्तुत रिपोर्ट में किस दल ने कितनी सीटें हासिल की हैं, इसका विवरण शामिल है। यह विषय नई सरकार गठन से सीधे जुड़ा हुआ है।

निर्वाचन के द्वारा छह राजनीतिक दल राष्ट्रीय दल के रूप में उभरे हैं।

१८२ सीट के साथ रास्वपा सबसे बड़ा दल बन चुका है। कांग्रेस ३८ सीट के साथ दूसरा, २५ सीट के साथ एमाले तीसरा और १७ सीट के साथ नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी चौथा दल हैं।

इस बार के निर्वाचन में उदित श्रम संस्कृति पार्टी ७ सीट के साथ पांचवां दल बनी है, जबकि राप्रपा ५ सीट के साथ छठवां दल है। एक स्वतंत्र उम्मीदवार भी हैं।

संविधान के बहुचर्चित धारा ७६ में सरकार गठन का प्रावधान है। इसके अनुसार राष्ट्रपति यह निर्णय करेंगे कि सरकार एकल बहुमत में बन सकती है या नहीं। इस बार रास्वपा ने लगभग दो तिहाई बहुमत हासिल किया है, इसलिए उसके नेतृत्व में ही एकल बहुमत की सरकार बनेगी।

संविधान की धारा ७६ (१) में कहा गया है, ‘राष्ट्रपति प्रतिनिधि सभा में बहुमत प्राप्त संसदीय दल के नेता को प्रधानमंत्री नियुक्त करेंगे और उनके अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद बनेगी।’

इसके लिए राष्ट्रपति को यह जानना होगा कि रास्वपा का संसदीय दल का नेता कौन है। अर्थात्, रास्वपा को संसदीय दल के नेता का चयन करना होगा। रास्वपा ने चैत १२ के शपथ ग्रहण के बाद दल का नेता चयन करने की तैयारी की है।

सरकार गठन के साथ ही राष्ट्रपति संसद का अधिवेशन बुलाएंगे। संविधान की धारा ९३ के अनुसार, निर्वाचन के अंतिम नतीजे की घोषणा के एक महीने के अंदर राष्ट्रपति को संघीय संसद का अधिवेशन बुलाना होता है। इसमें उल्लेख है, ‘राष्ट्रपति प्रतिनिधि सभा के लिए हुए निर्वाचन के अंतिम नतीजे की घोषणा की तारीख से तीस दिन के भीतर संघीय संसद का अधिवेशन बुलाएंगे।’

राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा है कि चैत १६ को संघीय संसद का अधिवेशन बुलाने की तैयारी हो रही है। इसका संदेश अनौपचारिक रूप से राजनीतिक दलों और संघीय संसद सचिवालय को दे दिया गया है।

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