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पूर्वमंत्री राजकुमार गुप्त को जमानत पर रिहा करने का सर्वोच्च अदालत का आदेश

समाचार सारांश

सम्पादकीय समीक्षा के बाद प्रस्तुत।

  • सर्वोच्च अदालत ने पोखरा लिचिबारी भ्रष्टाचार मामले में बंद पूर्वमंत्री राजकुमार गुप्त को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है।
  • विशेष अदालत ने १६ पुष को राजकुमार गुप्त को कारावास के लिए भेजने का आदेश दिया था।
  • राजकुमार गुप्ता और रंजिता श्रेष्ठ पर मालपोत अधिकारी से ५३ लाख रुपये रिश्वत लेने का आरोप है।

५ जेठ, काठमांडू। पोखरा लिचिबारी भ्रष्टाचार मामले में बंद पूर्वमंत्री राजकुमार गुप्त को सर्वोच्च अदालत ने जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है।

इससे पहले विशेष अदालत ने उन्हें न्यायिक जांच के लिए कारावास में भेजने का आदेश दिया था।

मंगलवार को न्यायाधीश शारंगा सुवेदी और सुनिलकुमार पोखरेल की पीठ ने उक्त आदेश को रद्द करते हुए जमानत पर रिहा करने का आदेश जारी किया है।

सर्वोच्च प्रशासन ने आदेश रद्द होने और जमानत पर रिहा करने के निर्देश को वेबसाइट के माध्यम से सार्वजनिक किया है, जबकि लिखित आदेश अभी प्राप्त नहीं हुआ है।

विशेष अदालत ने राजकुमार गुप्त की दलीलों के मुकाबले विवादित प्रमाणों को अधिक विश्वसनीय मानते हुए १६ पुष को तुरंत न्यायिक जांच के लिए कारावास भेजने का आदेश दिया था।

पूर्वमंत्री राजकुमार गुप्ता और रंजिता श्रेष्ठ पर कास्की के मुख्य मालपोत अधिकारी रामचंद्र अधिकारी से कास्की में ५३ लाख रुपये रिश्वत लेने का आरोप है।

भूमि आयोग कास्की के अध्यक्ष खम बहादुर पुन के नियुक्ति के लिए अतिरिक्त २५ लाख रुपये लेनदेन में शामिल होने के आरोप में अख्तियार ने कुल ७८ लाख रुपये का जुर्माना लगाने का आग्रह किया है।

रिश्वत देने के आरोप में सुजन लामाम के विरुद्ध भी उसी जुर्माने सहित भ्रष्टाचार मामले में मुकदमा दायर किया गया है।

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