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सरकार ने समस्याग्रस्त सहकारी के सदस्यों की बचत वापस करने के लिए चक्रीय कोष में अतिरिक्त २५ करोड़ रुपये देने का निर्णय किया

सरकार ने समस्याग्रस्त सहकारी संस्थाओं के सदस्यों की बचत वापस करने के लिए चक्रीय कोष में अतिरिक्त २५ करोड़ रुपये उपलब्ध कराने की तैयारी की है। चालू वित्तीय वर्ष में सरकार द्वारा पहले से विनियोजित २५ करोड़ रुपये में यह राशि जुड़ने के बाद कुल ५० करोड़ रुपये का योगदान होगा। सहकारी की संपत्ति बिक्री से प्राप्त राशि को चक्रीय कोष में जमा कर बचतकर्ताओं की राशि वापसी का काम सोमवार से शुरू हो चुका है।

५ जेठ, काठमांडू। सरकार ने समस्याग्रस्त सहकारी संस्थाओं के सदस्यों की बचत वापस करने हेतु कानून के अनुसार चक्रीय कोष में अतिरिक्त २५ करोड़ रुपये देने का निर्णय लिया है। चालू वित्तीय वर्ष के बजट के अनुसार पहले से २५ करोड़ रुपये विनियोजित किये गए इस कोष में अब अतिरिक्त २५ करोड़ रुपये जुड़ने से सरकार द्वारा कुल ५० करोड़ रुपये का योगदान होगा।

सरकार ने समस्याग्रस्त सहकारी संस्थाओं के सदस्यों की बचत वापस करने के लिए चक्रीय कोष स्थापना एवं संचालन संबंधी कार्यविधि, २०७८ (०८३) लागू की है। इस कोष में सरकार द्वारा दी गई राशि के साथ-साथ समस्याग्रस्त सहकारी से ऋण लेकर संपत्ति की बिक्री से प्राप्त राशि भी जमा की जाएगी। इन राशि से पीड़ित बचतकर्ताओं की रकम वापस की जाएगी। बचत वापसी का कार्य सोमवार से प्रारंभ हो चुका है।

वित्तीय वर्ष ०८३ के विनियोजन विधेयक में सहकारी क्षेत्र की समस्या समाधान को ३६ नंबर सिद्धांत एवं प्राथमिकता के अंतर्गत सम्मिलित किया गया है। मंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने मंगलवार को राष्ट्रीय सभा में इस प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि इसे दीर्घकालिक समाधान के रूप में लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘सोमवार से समस्याग्रस्त सहकारी के छोटे बचतकर्ताओं के पैसे वापस करने का कार्य भी शुरू हो चुका है। सरकार ने इस वर्ष चक्रीय कोष में २५ करोड़ रुपये विनियोजित किए हैं और अतिरिक्त २५ करोड़ रुपये विनियोजित करने की तैयारी है।’’

भूमि एवं सहकारी मंत्रालय बचत वापसी के कार्य को आगे बढ़ा रहा है, यह जानकारी मंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने दी। उन्होंने कहा, ‘‘कोष में रखी गई राशि राज्य कोष से नहीं दी जाएगी और ऐसी वितरण व्यवस्था पर हमारा विश्वास नहीं है। सहकारी की संपत्ति की बिक्री से प्राप्त राशि चक्रीय कोष में जमा कर उसी से बचतकर्ताओं को राशि वापस की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। वर्तमान में सरकार ने केवल अस्थायी सहजीकरण की भूमिका निभाई है।’’

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