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सम्पत्ति छानबिन आयोग: २५,००० से अधिक अधिकारियों द्वारा सम्पत्ति विवरण प्रस्तुत किए जाने का अनुमान, शिकायतें प्राप्त

सम्पत्ति छानबिन आयोग के एक अधिकारी ने कहा है कि कम से कम २५,००० से अधिक नियुक्त एवं सेवानिवृत्त अधिकारी तथा राजनीतिक पदाधिकारी सम्पत्ति विवरण प्रस्तुत करेंगे और इसके लिए विभिन्न विभागों से आंकड़े मांगने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रधानमंत्री वालेंद्र शाह ‘बालेन’ की मंत्रिपरिषद ने वैशाख की शुरुआत में सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश राजेन्द्रकुमार भंडारी की अध्यक्षता में संचालित आयोग को ३० दिनों के भीतर सम्पत्ति विवरण प्रस्तुत करने का आदेश दिया था।

आयोग को आर्थिक वर्ष २०६२/६३ से २०८२/८३ के चैत माह के अंतिम दिन तक सेवा में रहे सभी राजनीतिक पदाधिकारी, कर्मचारी और उनके परिवार के नाम पर देश-विदेश में मौजूद सम्पत्ति का विवरण संकलित कर जांच करके रिपोर्ट प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आयोग ने पिछले सप्ताह ही अपनी क्षेत्राधिकार में आने वाले या न आने वाले सार्वजनिक दायित्व वाले राजनीतिक पदाधिकारी या कर्मचारियों से ‘अस्वाभाविक आर्जित सम्पत्ति’ से संबंधित शिकायतें देने का आव्हान किया था, जिस पर कुछ शिकायतें प्राप्त हुई हैं, आयोग के प्रवक्ता ने बताया।

पहले चरण में केंद्र एवं प्रदेश के लगभग १३,३०० से अधिक सक्रिय कर्मचारियों की जांच होने का अनुमान है, राष्ट्रीय पुस्ताकालय के महानिदेशक ने बताया। एक विवरण के अनुसार वर्तमान में पेंशन प्राप्त कर रहे निज़ामती सेवा, पुलिस और न्यायपालिका के कम से कम ३,००० अधिकारी भी हजारों में सम्पत्ति विवरण फॉर्म भरेंगे। आयोग द्वारा तैयार किए गए फॉर्म में पैतृक सम्पत्ति और अपनी अवधि में अर्जित सम्पत्ति तथा स्रोत प्रक्रिया का स्पष्ट विवरण देना होगा।

आयोग को एक वर्ष का समय दिया गया है और पहले चरण में आर्थिक वर्ष २०६२/६३ से २०८२/८३ के चैत तक पद पर रहे अधिकारियों का सम्पत्ति विवरण जमा, सत्यापित और जांच करने का कार्य निर्धारित किया गया है, जबकि दूसरे चरण में २०४८ से आर्थिक वर्ष २०६१/६२ तक के वरिष्ठ अधिकारियों के सम्पत्ति की जांच करने का दायित्व दिया गया है। आयोग के प्रवक्ता गणेश केसी ने कहा, “हमने प्रारंभिक रूप से अनुमान लगाया है कि फॉर्म भरने वाले अधिकारी २५,००० से अधिक हो सकते हैं। शिकायतें भी आने लगी हैं।”

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