समाचार सारांश
- परराष्ट्रमंत्री शिशिर खनाल ने नेपाल की परराष्ट्र सेवा को समयानुसार संशोधित करते हुए आर्थिक कूटनीति पर केंद्रित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
- मंत्री खनाल ने विदेश मिशनों को केवल प्रशासनिक केंद्र नहीं, बल्कि निवेश और तकनीक केंद्र बनाना चाहिए, यह बात कही।
- उन्होंने विश्व भू-राजनीति में हो रहे बदलावों और जलवायु संकट जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए कूटनीतिक कौशल की आवश्यकता पर बल दिया।
10 जेठ, काठमांडू। परराष्ट्रमंत्री शिशिर खनाल ने नेपाल की परराष्ट्र सेवा को समयानुकूल संशोधन करते हुए इसे आर्थिक कूटनीति पर केंद्रित करने पर जोर दिया है।
आइतवार परराष्ट्र सेवा दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में उन्होंने मंत्रालय और विदेश मिशनों को परिणाममुखी बनाने की आवश्यकता बताई।
मंत्री खनाल ने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद राष्ट्रीय संप्रभुता और हितों के संरक्षण में पूर्व प्रशासकों और कूटनीतिज्ञों ने सराहनीय भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा, “परराष्ट्र नीति को आंतरिक प्राथमिकताओं का प्रतिबिंब होना चाहिए। विश्व भू-राजनीति में हो रहे तेजी से बदलाव, जलवायु संकट और प्रौद्योगिकी के विकास से उपजी चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए कूटनीतिक चातुर्य और रणनीतिक दूरदर्शिता आवश्यक है।”
मंत्री खनाल ने बताया कि नेपाल को विश्व परिवेश में हो रहे बदलावों का केवल प्रतिक्रिया नहीं करनी चाहिए, बल्कि उनका पूर्वानुमान कर राष्ट्रीय हितों के लिए उनका उपयोग करना चाहिए।
“हमारा रणनीतिक ध्यान अब आर्थिक कूटनीति पर केंद्रित होना चाहिए। विदेशी प्रत्यक्ष निवेश, पर्यटन को बढ़ावा, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और बाजार पहुंच के लिए पारंपरिक तरीकों को छोड़कर सक्रिय अंतरराष्ट्रीय साझेदारी बनानी होगी,” उन्होंने कहा, “विदेश मिशन अब केवल प्रशासनिक केंद्र नहीं बल्कि निवेश और तकनीकी केंद्र होने चाहिए। उनके पदस्थापन को अधिकारों के साथ-साथ प्रदर्शन आधारित जिम्मेदारियों के रूप में लिया जाएगा।”
मंत्री खनाल ने परराष्ट्र मंत्रालय को राष्ट्रीय सुरक्षा और समृद्धि की पहली पंक्ति के रूप में स्थापित करने का संकल्प व्यक्त किया और सेवा वितरण को तकनीक-मित्र और सरल बनाने की बात कही।

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