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पोखरा बसपार्क की जमीन खरीद-बिक्री जांच के लिए पूर्व न्यायाधीश बराल के नेतृत्व में समिति का गठन

पोखरा उपत्यका नगर विकास समिति ने बसपार्क की जमीन विवाद की जांच के लिए पूर्व न्यायाधीश शंकरराज बराल की संयोजकता में तीन सदस्यीय समिति गठित की है। वि.सं. २०३० में बसपार्क के लिए अधिग्रहित १९६ रोपनी जमीन के मुआवजे और सट्टापट्टा में अनियमितताओं की शिकायतों के बाद यह समिति बनाई गई है। नवनिर्मित समिति को पिछले ५१ वर्षों में हुए निर्णयों और दस्तावेजों का अध्ययन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए १५ कार्यदिवसों का समय दिया गया है। १२ जेठ, पोखरा।

पोखरा बसपार्क निर्माण के लिए पांच दशक पूर्व अधिग्रहित जमीन के सट्टापट्टा, बिक्री–वितरण तथा क्षतिपूर्ति वितरण प्रक्रियाओं को लेकर उठे विवाद और शिकायतों की सच्चाई जांचने के लिए पोखरा उपत्यका नगर विकास समिति ने तीन सदस्यीय न्यायिक अध्ययन समिति बनाई है। समिति के अध्यक्ष पूर्व न्यायाधीश शंकरराज बराल हैं। सदस्य के रूप में पूर्व जिला न्यायाधिवक्ता गोविन्द गिरी तथा सदस्य सचिव के पद पर पोखरा उपत्यका नगर विकास समिति के प्रशासनिक अधिकारी प्रकाश सुवेदी शामिल हैं।

मंगलवार को हुई कार्यपालिका बैठक ने जमीन की पहचान और जांच के लिए समिति गठित की है। पोखरा महानगरपालिका-९ में बसपार्क निर्माण हेतु वि.सं. २०३० में अधिग्रहित १९६ रोपनी जमीन में से राजमार्ग विस्तार के दौरान लगभग ९ रोपनी जमीन उपयोग में आने के बाद शेष १८७ रोपनी जमीन के प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर कई सवाल उठ रहे हैं। विशेष रूप से कुछ व्यक्तियों ने अनधिकृत क्षतिपूर्ति प्राप्त की, वितरण प्रक्रिया में असमानता हुई और सट्टापट्टा व बिक्री में अनियमितताएं हुईं जैसी शिकायतों के सार्वजनिक होते ही जांच समिति बनाई गई है।

समिति को पिछले ५१ वर्षों में विभिन्न स्तरों पर लिए गए निर्णय, जमीन सट्टापट्टा, क्षतिपूर्ति वितरण और संबंधित दस्तावेजों का अध्ययन, विश्लेषण और तथ्यात्मक परीक्षण कर न्यायिक दृष्टिकोण से रिपोर्ट तैयार करने का दायित्व दिया गया है। समिति को रिपोर्ट जमा करने के लिए १५ कार्यदिवस का समय दिया गया है। इसके साथ ही लंबे समय से विवाद और चर्चा का विषय बने बसपार्क को अब व्यवस्थित, आधुनिक और सुविधासंपन्न पूर्वाधार के रूप में विकसित करने के लिए सभी पक्षों का सहयोग आवश्यक बताया गया है। समिति से निष्पक्ष और तथ्य आधारित रिपोर्ट पेश कर आधा शताब्दी से विवादित बसपार्क जमीन मामले में न्यायिक समाधान की आशा की गई है।

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