
लैंगिक उत्तरदायी बजट का प्रभाव लक्षित समूह तक नहीं पहुंच पाया: अध्ययन
समाचार सारांश
समीक्षा कर तैयार।
- सरकार द्वारा लागू किए गए लैंगिक उत्तरदायी बजट की खर्च और कार्यान्वयन प्रणाली प्रभावी नहीं रहे, ऐसा अध्ययन में पाया गया।
१३ जेठ, काठमांडू। महिलाओं और लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा लाए गए लैंगिक उत्तरदायी बजट का प्रभावी ढंग से लागू न हो पाने का अध्ययन में पता चला है। बजट का विनियोजन होने के बावजूद लक्षित समुदाय तक इसके सीधे लाभ नहीं पहुंचे हैं, साथ ही खर्च और कार्यान्वयन कमजोर और संघीय संरचना के अनुसार नीतियों में संशोधन नहीं हो पाया है, यह सभी मुद्दे संबंधित पक्षों ने उजागर किए हैं।
काठमांडू में सार्वजनिक की गई ‘नेपाल में लैंगिक समानता तथा महिला अधिकारों के प्रवर्धन के लिए लैंगिक उत्तरदायी बजट विनियोजन एवं खर्च का विश्लेषण’ शीर्षक अध्ययन प्रतिवेदन ने ये निष्कर्ष सामने रखे हैं। अध्ययन में लैंगिक उत्तरदायी बजट प्रणाली अभी तक प्रभावी बनने में असफल रही है।
महिला, बालबालिका, लैंगिक और यौनिक अल्पसंख्यक तथा सामाजिक सुरक्षा मंत्रालय की सचिव राधिका अर्याल ने बजट निर्माण और खर्च की प्रक्रियाओं में मुख्यधारा के बाहर रहने वाले समुदायों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि लक्षित वर्ग के लिए विनियोजित बजट का वास्तविक खर्च हुआ है या नहीं, इसका प्रभावी अनुगमन होना चाहिए। हाल के तीन आर्थिक वर्षों में बजट खर्च केवल ४४ से ५९ प्रतिशत के बीच ही रहा है, यह तथ्य अध्ययन में सामने आया है।
अध्ययन ने आर्थिक वर्ष २०७९/८० से २०८१/८२ तक के बजट विनियोजन, खर्च प्रवृत्ति और लैंगिक उत्तरदायी बजट के अभ्यास की स्थिति का विश्लेषण किया है। इसमें महिला, बालबालिका, लैंगिक और यौनिक अल्पसंख्यक तथा सामाजिक सुरक्षा मंत्रालय के साथ-साथ कुछ स्थानीय स्तरों को भी शामिल किया गया है।
कार्यक्रम में प्रतिनिधि सभा सदस्य और अर्थ समिति के सदस्य जगदीश खरेल ने बताया कि बजट निर्माण में स्पष्ट उद्देश्य और परिणाम-केंद्रित योजना की कमी है, जिसके कारण खर्च प्रभावी नहीं हो पाया।
उनका कहना था कि बजट विनियोजन होने के बावजूद इसका लाभ संबंधित समुदायों तक नहीं पहुंच पाया है। उन्होंने दलित और सीमान्तकृत समुदायों की प्रतिनिधित्व और पहुंच अभी भी कमजोर होने को भी उजागर किया।
अध्ययन में महिलाओं को लक्षित बजट, खर्च में प्रभावशीलता, सीमांतित समुदाय की पहुंच और नीति कार्यान्वयन की चुनौतियों पर भी विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान निर्देशिकाएं संघीय संरचना के अनुरूप संशोधित नहीं होने के कारण कार्यान्वयन में बाधाएं उत्पन्न हुई हैं।
अर्थशास्त्री भारती सिलवाल ने कहा कि महिलाओं से संबंधित कार्यक्रमों की जिम्मेदारी केवल संबंधित मंत्रालयों तक सीमित न रखी जाए, बल्कि अर्थ मंत्रालय को भी प्रभावी समन्वय करना चाहिए। वहीं अर्थशास्त्री डॉ. कल्पना खनाल ने कहा कि सार्वजनिक रिपोर्ट गुणात्मक है, परन्तु कुछ क्षेत्रों को अभी भी इसमें सम्मिलित नहीं किया गया है।
स्थानीय स्तर पर लैंगिक उत्तरदायी बजट को केवल ‘महिला लक्षित बजट’ के रूप में ही समझा जाने की प्रवृत्ति अभी भी बनी हुई है, अध्ययन ने यह भी पाया है। योजना की सात चरणों की प्रक्रिया, महिला भागीदारी और सीमांतित समुदायों की सार्थक भागीदारी अभी भी सीमित है, यह निष्कर्ष रिपोर्ट में शामिल है।
महिला आयोग की अध्यक्ष कमला पराजुली ने कहा कि आयोग की भूमिका केवल सरकार को सुझाव देने तक सीमित है और इस कारण कार्यान्वयन पक्ष कमजोर है। आयोग की उपसचिव रोशनी देवी कार्की ने बताया कि अधिकांश मंत्रालय २० प्रतिशत से अधिक लैंगिक उत्तरदायी बजट खर्च नहीं कर पाए हैं।
अध्ययन ने समावेशी विकास, सामाजिक न्याय, लैंगिक समानता और सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए लैंगिक उत्तरदायी बजट प्रणाली का प्रभावी कार्यान्वयन आवश्यक होने का निष्कर्ष प्रस्तुत किया है।