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प्रधानमंत्री बालेन शाह के संसद में अभिव्यक्तियों पर विवाद, इस्तीफा और सफाई की मांग

प्रधानमंत्री वलेन्द्र शाह बालेन द्वारा पहली बार प्रतिनिधि सभा में दिए गए बयान ने उन्हें और उनकी पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) को विवाद के केंद्र में ला दिया है। उन्होंने रविवार की बैठक में सांसदों के प्रश्नों का जवाब देते हुए नेपाल-भारत सीमा विवाद पर किए गए अपने बयानों से विवाद उत्पन्न कर दिया। उन्होंने सांसदों के सवालों के जवाब में कहा, “आप सबको आश्चर्य होगा, मुझे भी प्रधानमंत्री बनने के बाद ही पता चला कि केवल भारत ही नहीं, नेपाल ने भी भारत की जमीन कई स्थानों पर छीनी है। यह बात हाल ही में सामने आई है, इसलिए दोनों देश अध्ययन कर मिचे गए क्षेत्रों के समाधान पर विचार कर रहे हैं।” प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद विपक्ष ने संसद में उनकी अभिव्यक्ति पर आपत्ति जताई। यह बयान सामाजिक मीडिया और समाचार माध्यमों में भी व्यापक विवाद का विषय बन गया है।

प्रधानमंत्री के इस बयान से विवाद बढ़ने पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने “नेपाल-भारत सीमा संबंध में सम्माननीय प्रधानमंत्रीज्यू द्वारा संसद में व्यक्त किए गए विषय पर मीडिया से पूछे गए सवाल का जवाब” नाम से एक विज्ञप्ति जारी की। प्रवक्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री के कथन का मूल आधार “दशगजा क्षेत्र के अतिक्रमण और ‘क्रॉस बॉर्डर एक्यूपेशन’ यानी सीमा पार जमीन से संबंधित” है। उनके अनुसार, “नेपाल-भारत सीमा निर्धारण में नदी क्षेत्र की सीमा व्यवस्था में ‘फिक्स्ड बॉउन्ड्री प्रिंसिपल’ अपनाया गया है जिसके कारण एक देश के निवासी कभी-कभी दूसरे देश के भूभाग में कृषि या आवासीय गतिविधि करने लगते हैं।” प्रवक्ता ने आगे बताया, “प्रावधिक अध्ययन में कुछ क्षेत्रों में नेपाल द्वारा उपयोग की जा रही जमीन भारत के क्षेत्र में आ सकती है और भारत द्वारा उपयोग की गई जमीन नेपाल की तरफ हो सकती है। प्रधानमंत्री द्वारा संसद में कही गई बात कि ‘कुछ स्थानों पर भारत की जमीन नेपाल की ओर हो सकती है’ इसी तकनीकी तथ्य और ‘क्रॉस बॉर्डर एक्यूपेशन’ से जुड़ी है।

बालेन के इस प्रथम संसदीय भाषण की कथित गलती सामने आने के बाद उनके बयान के खिलाफ इस्तीफा मांगने, सफाई देने और भाषा चूक पर संदेह जताने वाले भी सामने आए हैं। पूर्व विदेश मंत्री और राप्रपा नेता कमल थापा ने बालेन के बयान को ‘पूरे देश को झकझोरने और आश्चर्यचकित करने वाला’ बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री के बयान को अतिशयोक्ति और गलत करार देते हुए तत्काल सुधार की मांग की। थापा ने कहा, “कुछ स्थानों पर सीमा विवाद हो सकता है, लेकिन नेपाल ने भारत की सीमा नहीं मारी है और न ही अतिक्रमण किया है। हमारा रुख स्पष्ट है कि नेपाल को पड़ोसी की सीमा नहीं मिचनी चाहिए। यदि प्रधानमंत्री को लगता है कि नेपाल ने भारत की सीमा मारी है तो उसे सबूत के साथ जल्दी सार्वजनिक करना चाहिए, और गलती सुधार कर भारत को क्षेत्र वापस करना चाहिए।”

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