
सर्वोच्च अदालत ने मेयर को गायों की निर्मम पिटाई न करने का निर्देश दिया
१९ जेठ, काठमाडौं। सर्वोच्च अदालत के फैसला कार्यान्वयन निर्देशनालय ने बुटवल उपमहानगरपालिका को सड़क पर मौजूद गाय-गोरुओं को गैरकानूनी और निर्ममतापूर्ण तरीके से पिटने से रोकने का निर्देश दिया है। निर्देशनालय ने २०८३ असार १८ गते उपमहानगरपालिका को पत्र भेजकर यह निर्देश दिया। पत्र में नगर प्रमुख के निर्देशन में नगर कर्मचारी और नगर पुलिस द्वारा सड़क पर गाय-गोरुओं की पिटाई किए जाने को सर्वोच्च अदालत के २०७६ वैशाख ८ गते के परमादेश के विपरीत बताया गया है। स्नेहा केयर की अध्यक्ष स्नेहा श्रेष्ठ ने कुछ दिन पूर्व बुटवल में हुई इस घटना की शिकायत करते हुए निर्देशनालय को निवेदन किया था। निवेदन में नगर प्रमुख की सक्रिय भूमिका में जानबूझकर गाय-गोरुओं पर पिटाई किए जाने का आरोप लगाया गया था।
सर्वोच्च अदालत ने २०७६ वैशाख ८ गते दिये गए अपने परमादेश में गाय को राष्ट्रीय पशु के रूप में संरक्षण देने, बेवारिस गाय-गोरुओं के उचित प्रबंधन की व्यवस्था करने तथा पिटाई या हत्या जैसे कार्यों में संलिप्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का प्रावधान किया है। अदालत के फैसले में उल्लेख है कि गाय-गोरुओं की हत्या, अकाल मृत्यु या संरक्षण की जिम्मेदारी निभाने वालों की नियत, लापरवाही या उपेक्षा के कारण होने वाले क्षति पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। कार्यान्वयन के लिए निर्देशनालय ने बुटवल उपमहानगरपालिका को ऐसी गतिविधियों को तत्काल बंद करने और अदालत के आदेश का पूर्ण पालन करने का निर्देश दिया है। पत्र की प्रति नगर पुलिस को भी भेजी गई है। नेपाल के संविधान ने गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा प्रदान किया है। सर्वोच्च अदालत ने स्थानीय प्रशासन को पशु प्रबंधन, संरक्षण केंद्र स्थापना, पशु बीमा और वैज्ञानिक चरागाह प्रबंधन के उपाय अपनाने का भी निर्देश दिया था।