
ट्रम्प और पुतिन के बीच मोदी का दिल जीतने की होड़
समाचार सारांश समीक्षा के बाद तैयार किया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा, ‘हमें एक समझौते पर पहुंचना है क्योंकि मैं प्रधानमंत्री मोदी को बहुत पसंद करता हूं’। रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने अमेरिकी दबाव से भारत को प्रभावित न होने और दोनों देशों के बीच साझेदारी को मजबूत बनाए रखने का दावा किया। सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में रूसी राष्ट्रपति पुतिन के भारत आने पक्के हैं। २२ जेठ, काठमांडू। दुनिया की दो बड़ी शक्तियां अमेरिका और रूस ने भारत को अपनी ओर आकर्षित करने की होड़ शुरू कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने खुलेआम भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए अपने स्वार्थ और साझेदारी को मजबूत बनाने के संकेत दिए हैं।
अमेरिकी रुचि: मोदी से दोस्ती और व्यापार समझौता अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि जल्द ही अमेरिका और भारत के बीच बड़ा व्यापार समझौता हो सकता है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को अपना ‘बहुत अच्छा दोस्त’ बताया और दोनों देशों के बीच मजबूत संबंधों पर जोर दिया। ट्रम्प ने कहा कि पिछले समय में भारत ने अमेरिका के साथ व्यापार में ऊंचे टैरिफ के चलते फायदा उठाया जबकि अमेरिका को इसके समय ज्यादा लाभ नहीं मिला। हालांकि, वर्तमान स्थिति में परिवर्तन हुआ है और अमेरिका भारत के साथ व्यापार से अच्छा आमदनी कमा रहा है, उनका दावा है। ट्रम्प ने आगे कहा, ‘हमें एक समझौते पर जरूर पहुंचना होगा क्योंकि मैं प्रधानमंत्री मोदी को बहुत पसंद करता हूं।’
ट्रम्प की प्रशंसा के बीच ही अमेरिका ने भारत सहित ५४ देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा भी की है। यह कदम जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात को रोकने के लिए उठाया गया है। रूसी दावा: अमेरिकी दबाव का भारत पर प्रभाव नहीं पड़ेगा रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने ४ जून को सेंट पीटर्सबर्ग में विभिन्न अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों से बात करते हुए भारत तथा प्रधानमंत्री मोदी की खुलेआम प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत पर दबाव डालने की कोशिश करेगा, लेकिन इसका रूस-भारत संबंधों पर कोई असर नहीं पड़ेगा और भारत इसका विरोध करेगा। पुतिन ने भारत को ‘महान देश और लोकतंत्र’ बताया और रूस ने भारत को अपना विश्वसनीय साझेदार माना है।
वे कहते हैं कि भारत अपनी राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देता है इसलिए अमेरिकी संबंधों में बढ़ोतरी से भारत-रूस संबंध कमजोर नहीं होंगे। पश्चिमी देशों द्वारा रूस से संबंध कम करने के दबाव के चलते भारत पर दबाव देना अंतरराष्ट्रीय रिश्तों के लिए हानिकारक होगा, पुतिन ने उल्लेख किया। पुतिन ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और नीति कार्यान्वयन में लगातार मेहनत के कारण भारत को विश्व के सबसे बड़े और तेज़ विकास दर वाले देशों में सफल बताया। भविष्य में भारत-रूस व्यापार १०० अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद व्यक्त की।
आगामी दौरा और भारत-रूस समझौते भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। १२ और १३ सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पुतिन भाग लेने के लिए भारत आने वाले हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस वर्ष रूस का दौरा करने की योजना बनाई है। इससे पहले ४ दिसंबर २०१५ को २३वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए पुतिन भारत आए थे। यह उनका युक्रेन युद्ध के बाद पहला दौरा था और २०२१ के बाद दूसरा। दिल्ली पहुंचने पर पुतिन और मोदी एक साथ टोयोटा एसयूवी में प्रधान मंत्री निवास गृह की ओर गए थे। दिसंबर २०१५ में दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौते हुए थे। जिनमें रूस ने भारत को निरंतर और बिना बाधा ईंधन आपूर्ति करने का वचन दिया था। भारतीय कंपनियों ने रूस की एक कंपनी के साथ मिलकर रूस में यूरिया संयंत्र स्थापित करने का समझौता किया था।
इसके अलावा भारत के एफएसएसएआई और रूस की उपभोक्ता संरक्षण एजेंसी के बीच औपचारिक समझौता हुआ था ताकि खाद्य सुरक्षा मानकों को मजबूत किया जा सके। चिकित्सा अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवा में सहयोग बढ़ाने के लिए कई समझौता पत्रों पर हस्ताक्षर किए गए थे। बंदरगाह और शिपिंग संचालन में सहयोग की दिशा में भी सहमति बनी थी। दोनों देशों ने लोगों की आवाजाही को सुविधाजनक बनाने और आव्रजन प्रक्रियाओं को सरल करने के लिए आंतरिक समझौते किए थे।