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मानक नेपाली शब्दकोश की आवश्यकता और चर्चा

काठमांडू में आयोजित एक कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने नेपाली भाषा में एकरूपता लाने के लिए सर्वमान्य शब्दकोश की आवश्यकता पर जोर दिया। लेखक विक्टर प्रधान ने नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान के शब्दकोश के दसवें संस्करण में भी पहले संस्करण की गलतियों की पुनरावृत्ति होने की बात कही। कार्यक्रम में भीम नारायण रेग्मी ने प्रज्ञा प्रतिष्ठान के शब्दकोश को मानक बनाने के लिए गंभीर संपादन की जरूरत को रेखांकित किया।

२४ जेठ, काठमांडू। नेपाली भाषा के प्रयोग में एकरूपता लाने के लिए सर्वमान्य शब्दकोश की आवश्यकता विशेषज्ञों ने उजागर की है। काठमांडू में सम्पन्न ‘मानक नेपाली शब्दकोश क्यों और कैसा’ शीर्षक वाले कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान समेत अन्य संस्थाओं द्वारा प्रकाशित शब्दकोशों को मानक बनने में असफल बताया। हिमाल एसोसिएशन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में कार्यपत्र प्रस्तुत करते हुए लेखक विक्टर प्रधान ने कहा कि प्रज्ञा प्रतिष्ठान द्वारा प्रकाशित शब्दकोश के दसवें संस्करण में भी पहली संस्करण की गलतियाँ दोहराई गई हैं।

‘‘कोई भी शब्दकोश स्वयं में पूर्णतः अच्छा नहीं होता। इसमें क्रमिक सुधार जरुरी होता है,’’ प्रधान ने कहा, ‘‘हर पाँच साल में नेतृत्व परिवर्तन होने के कारण शब्दकोश के संपादक बदल गए जिससे क्रमिक सुधार संभव नहीं हो सका।’’ एक अन्य कार्यपत्र प्रस्तोता भीम नारायण रेग्मी ने प्रज्ञा नेपाली शब्दकोश के आकार बढ़ने को सकारात्मक बताया लेकिन इसके लिए उपलब्ध शब्दों को बिना चयन के जोड़ने की निंदा की। ‘‘प्रज्ञा प्रतिष्ठान के शब्दकोश को मानक शब्दकोश का दर्जा प्राप्त करने के लिए गंभीर संपादन अवश्य आवश्यक है,’’ रेग्मी ने कहा।

हिमाल एसोसिएशन के अध्यक्ष बसंत थापा ने बताया कि नेपाली भाषा संवर्धन के लिए इस प्रकार का कार्यक्रम आयोजित किया गया है। थापा ने कहा, ‘‘एक चर्चा से सभी समस्याओं का समाधान संभव नहीं होगा, लेकिन हम समाधान की दिशा में इस तरह के प्रयासों की उम्मीद करते हैं।’’

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