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अखिरकार ‘अलोका’ नेपाल पहुंचा

भारत की सड़कों से बौद्ध भिक्षुओं के साथ विश्व शांति यात्रा पर निकला ‘अलोका द पीस डॉग’ नामक कुत्ता नेपाल पहुंच गया है। द पीस डॉग अर्थात् अलोका आज विश्वभर प्रसिद्ध है। कभी भारत की सड़कों पर बेसहारा अवस्था में रहा यह कुत्ता अब बौद्ध भिक्षुओं के साथ विश्व शांति पदयात्रा पर है। अमेरिका, श्रीलंका, भारत होते हुए अब अलोका नेपाल पहुंचा है। अलोका बुद्ध एयर के माध्यम से लुम्बिनी से काठमांडू आया है। बुद्ध एयर ने अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर अलोका का स्वागत करते हुए अत्यंत हर्ष व्यक्त किया है। फेसबुक के माध्यम से उन्होंने लिखा है– बौद्ध भिक्षु ‘थिच मिन्ह तुए’ के नेपाल में अर्थपूर्ण प्रवास और हजारों किलोमीटर लंबी उनकी शांति यात्रा की निरंतर सफलता के लिए हार्दिक शुभकामनाएं व्यक्त करते हैं। बुद्ध एयर की ओर से हम उन्हें, ‘अलोका द पीस डॉग’ और उनके साथियों को भैरहवा–काठमांडू उड़ान पर स्वागत करने से अत्यंत आनंदित हैं।

अमेरिका में 19 बौद्ध भिक्षुओं द्वारा शुरू की गई 2300 मील लंबी पदयात्रा में अलोका भी सहभागी था। इसी यात्रा से अलोकाएक विशेष ध्यान का केंद्र बन गया है। भारत की सड़क का कुत्ता, जो विश्व शांति का संदेशवाहक बन चुका है, अलोका एक साधारण कुत्ता था। कल तक वह सड़क पर था। भूख, पीड़ा, त्रासदी सहते हुए उसने अन्य सड़क के कुत्तों की तरह ठंडी रातें बिताईं। उपेक्षा और असुरक्षा उसे सताती रही। उसका हर पल अनिश्चित था। अलोका की कहानी भारत से शुरू होती है। उस समय अलोका लगभग 4 वर्ष का था। जब बौद्ध भिक्षु पैदल यात्रा कर रहे थे, तो यह कुत्ता स्वाभाविक रूप से उनके समूह में शामिल हो गया। अलोका को किसी ने प्रशिक्षण नहीं दिया था। न ही किसी ने उसे दोहराया। उसने स्वयं भिक्षुओं का संगति चुना था। भिक्षुओं के साथ चलते हुए उन्होंने इसे ‘अलोका’ नाम दिया। संस्कृत में इसका अर्थ ‘प्रकाश’ या ‘शांति’ होता है।

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