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जी-७ सम्मेलन में ट्रम्प की अभिव्यक्तियों ने इटली और जापान के साथ कूटनीतिक तनाव बढ़ाया

समाचार सारांश: जी-७ सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलेनी के प्रति की गई टिप्पणी ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव को बढ़ा दिया है। व्हाइट हाउस में खनिज समझौते पर हस्ताक्षर के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प और यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की के बीच विवाद के कारण यह समझौता रद्द हो गया। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने जापानी प्रधानमंत्री साना टैकैची के साथ हुई मुलाकात में पर्ल हार्बर हमले के संदर्भ में अनौपचारिक और कूटनीतिक मर्यादा के विपरीत अभिव्यक्तियां दी हैं।

८ असार, काठमाडौं। १५ से १७ जून तक आयोजित जी-७ सम्मेलन में अमेरिका और अन्य सदस्यों के बीच मनमुटाव कम होने की उम्मीद थी। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की अन्य जी-७ सदस्य देशों के नेताओं के बारे में की गई टिप्पणियों ने फिर से तनाव को जन्म दिया है।

फ्रांस में जी-७ सम्मेलन के दौरान रिकॉर्ड किए गए एक वीडियो में मेलेनी और ट्रम्प एक छोटे सोफे पर बैठकर गंभीर बातचीत करते नजर आते हैं। फ्रांस के मीडिया ने राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ किए गए संक्षिप्त साक्षात्कार में बताया कि ट्रम्प ने मेलेनी की इच्छा पूरी करने का संकेत दिया। ‘मैंने उनसे बात की, शायद इसलिए वे खुश हैं। मेरी उन्हें बात करने की आवश्यकता नहीं थी,’ ‘ला7’ चैनल ने ट्रम्प के हवाले से लिखा। ट्रम्प ने खुद पत्रकारों से इटली की प्रधानमंत्री के बारे में सवाल पूछा था। ला7 के अनुसार ट्रम्प ने कहा, ‘वे मुझसे तस्वीर खिंचवाने के लिए भीख मांगने आई थीं। वे तस्वीर खिंचवाने के लिए बहुत उत्सुक थीं। मैंने तस्वीर नहीं खींची, लेकिन मुझे उनके लिए दया आई।’

रॉयटर्स के कूटनीतिक स्रोतों के मुताबिक, मेलेनी जी-७ के सबसे सशक्त आवाज उठाने वाले नेताओं में से एक थीं। उन्होंने ट्रम्प को कई मुद्दों पर खुले तौर पर चुनौती दी। स्रोतों के अनुसार उन्होंने यूरोप के दृष्टिकोण की दृढ़ता से रक्षा की और ट्रम्प से कहा कि पश्चिमी सहयोगियों द्वारा अपने अलग थलग होने का दावा न करें। उन्होंने सहयोगियों के निरंतर समर्थन पर जोर दिया। ट्रम्प की टिप्पणियों के बाद मेलेनी ने शुक्रवार को जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वे स्तब्ध हैं और ट्रम्प की बातें भ्रामक हैं। उन्होंने अमेरिका के पुराने और मान्यता प्राप्त सहयोगियों की तुलना में पश्चिमी देशों के दुश्मनों के प्रति अधिक सम्मान दिखाए जाने पर ट्रम्प की आलोचना की। ‘डोनाल्ड ट्रम्प की बातें पूरी तरह से मनगढ़ंत हैं। मैं सच में हैरान हूं। अमेरिकी राष्ट्रपति अपने सहयोगियों के साथ ऐसा व्यवहार क्यों करते हैं, मैं नहीं जानती। यह पहली बार भी नहीं है,’ उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए वीडियो में कहा।

उन्होंने आगे कहा, ‘उन्होंने पश्चिमी देशों और अमेरिका के दुश्मनों के प्रति कठोर रुख अपनाने के बजाय इन विरोधी देशों के नेताओं को अधिक सुविधा दी है। मैं कहना चाहती हूं कि न तो मैं न ही इटली कभी भी भीख मांगने वाले हैं।’

गत शुक्रवार ‘‘एनबीसी न्यूज’’ के साक्षात्कार में ट्रम्प ने मेलेनी की आलोचना जारी रखी। नेटवर्क ने ट्रम्प के हवाले से लिखा, ‘वह मेरी बड़ी प्रशंसक थीं। लेकिन मैं उन्हें अपनी प्रशंसक के रूप में नहीं चाहता क्योंकि वे होर्मुज घाटी के मामले में नाटो के साथ नहीं थीं।’ इरान के खिलाफ युद्ध में शामिल होने और होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा करने से मना करने पर इटली समेत नाटो सहयोगी ट्रम्प से नाराज़ थे।

ट्रम्प का बर्ताव केवल इटली की प्रधानमंत्री तक सीमित नहीं था। बुधवार को एक पत्रकार वार्ता में जापानी पत्रकार के प्रश्न पर उन्होंने जापानी प्रधानमंत्री साना टैकैची को अपना ‘सबसे बड़ा प्रशंसक’ बताया। उस अवसर पर ट्रम्प ने कहा, ‘जापान बहुत अच्छा काम कर रहा है। मैं आपको बताना चाहता हूं कि उन्हें (टाकाइची) अच्छा महसूस होता है। आप उन्हें फोन करके भी पूछ सकते हैं। वे स्वयं भी उल्लेखनीय कार्य कर रही हैं।’

होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा के लिए ब्रिटेन, जर्मनी, जापान सहित अन्य जी-७ सदस्यों से सैन्य समर्थन मांगे जाने के विषय में पूछे जाने पर ट्रम्प ने यह टिप्पणी की। अन्य जी-७ नेताओं की तुलना में जापानी प्रधानमंत्री टैकैची ने ट्रम्प की आलोचना से दूरी बनाकर रखी है। मार्च में व्हाइट हाउस में हुई मुलाकात में टैकैची ने ट्रम्प को ‘दुनिया में शांति और समृद्धि लेकर आने वाले एकमात्र व्यक्ति’ बताया था।

पत्रकार सम्मेलन में ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका को इरान मुद्दे पर अन्य देशों के व्यापक समर्थन की आवश्यकता नहीं है, लेकिन जब आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो उन्होंने निराशा जताई। जापान ने ट्रम्प की बातों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन इटली में इसका तत्काल असर देखने को मिला है। ट्रम्प ने कहा, ‘वास्तव में जापान इस मामले में शामिल होने का प्रस्ताव दे रहा है, लेकिन मैं ईमानदारी से कहता हूं कि युद्ध के दौरान जापान शामिल होना नहीं चाहता था।’ उन्होंने आगे कहा, ‘मैंने उनसे पूछा, ‘‘क्या आप थोड़े जुड़ना चाहते हैं?’’ मैंने ज़ोर नहीं दिया, लेकिन उन्होंने कहा, ‘‘नहीं, हम शामिल होना नहीं चाहते।’’ कोई भी नहीं चाहता था। हमने इज़राइल और अरब देशों के साथ मिलकर यह काम स्वयं किया।’

जापान ने ट्रम्प की टिप्पणियों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन इसका प्रभाव इटली में पड़ा है। ट्रम्प की टिप्पणी के बाद इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने अपनी अमेरिका यात्रा रद्द कर दी है, जो अगले सप्ताह होने वाली थी। इससे मियामी में सोमवार को निर्धारित अमेरिका-इटली व्यापार सम्मेलन भी स्थगित हो गया है। इटली के दूतावास ने इस बारे में जानकारी दी है। ताजानी की यात्रा रद्दीकरण पर अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

मेलेनी के निकट राजनीतिक सहयोगियों में से एक ने भी तीखी आलोचना की है। सामान्यतः मीडिया से दूर रहने वाले उन्होंने ट्रम्प पर कड़े शब्दों में हमला किया। ‘ट्रम्प ने जानबूझकर या अपनी अक्षमता के कारण अमेरिकी और यूरोप के ऐतिहासिक संबंधों को नुकसान पहुचाया है,’ प्रधानमंत्री कार्यालय के उपसचिव जोवानबटिस्टा फाजो ने बयान में कहा। उन्होंने कहा, ‘अपनी अनुचित क्रोध के कारण उन्होंने अमेरिका को यूरोप में अस्वीकृत बना दिया है, जिसका सबसे बड़ा नुकसान अमेरिका को ही हुआ है।’

ट्रम्प की इस तरह की अभिव्यक्तियां पहले भी सामने आई हैं और अभी भी तीव्र रूप से जारी हैं। १९ मार्च को व्हाइट हाउस में डबल बैठक के दौरान ट्रम्प ने १९४१ के पर्ल हार्बर हमले का जिक्र किया था, जिसने अप्रत्याशित कूटनीतिक तीव्रता पैदा की। यह घटना ओवल ऑफिस में तस्वीर खींचने और प्रश्नोत्तर के दौरान हुई। एक जापानी पत्रकार ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प से पूछा कि फरवरी २८ को अमेरिका और इज़राइल द्वारा इरान पर संयुक्त हवाई हमले से पहले जापान सहित सहयोगी देशों को क्यों नहीं सूचित किया गया था। ट्रम्प ने इस पर कहा कि प्रशासन को गोपनीयता बनाए रखना और युद्ध मिशन की सफलता के लिए पूरी तरह गुप्त रहना आवश्यक था। ट्रम्प ने कहा, ‘हमने किसी को भी नहीं बताया क्योंकि हम दुश्मनों को आश्चर्यचकित करना चाहते थे। अचानक हमले के बारे में जापान से ज्यादा कौन जानता होगा? पहले क्यों नहीं बताया? ठीक है न?’ वहां उपस्थित पत्रकार और अधिकारी हल्की असहजता के साथ मुस्कुराए। जापानी प्रतिनिधिमंडल की ओर इशारा करते हुए ट्रम्प ने कहा, ‘मुझे लगता है कि आप लोग हमसे भी अचानक हमले पर ज्यादा विश्वास करते हैं।’

‘सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज’ की रिपोर्ट के अनुसार ट्रम्प के अप्रत्याशित व्यवहार का दार्शनिक तर्क है। विश्लेषण बताता है कि अमेरिकी अप्रत्याशित कदम अन्य देशों को अमेरिका के खिलाफ परीक्षा न करने और लाभ न उठाने के लिए बाध्य करते हैं। यदि व्यवहार आसानी से अनुमानित होता तो अन्य देश केवल अपने लाभ का ही फायदा उठाते। पर ट्रम्प की आशंका है कि उनका अप्रत्याशित व्यवहार सभी को दूर रख सकता है।

‘फॉरेन पॉलिसी’ के प्रधान संपादक रवि अग्रवाल के अनुसार ट्रम्प भू-राजनीतिक साझेदारियों को आक्रामक व्यावसायिक नजरिये से आंकते हैं, जिससे स्थापित कूटनीतिक मूल्यों और गठबंधनों पर प्रभाव पड़ता है। वे लिखते हैं, ‘ट्रम्प को सामान्यतः ‘लेन-देनवादी’ कहा जाता है, लेकिन सच में वे निर्लज्ज अवसरवादी हैं। हर सौदा शून्य-योग जैसा होता है जहाँ एक पक्ष विजेता और दूसरा पराजित होता है।’

अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ रॉबर्ट ब्लैकविल के अनुसार जापानी प्रधानमंत्री के सामने पर्ल हार्बर का जिक्र करना या यूक्रेन के प्रति सार्वजनिक रूप से धन्यवाद मांगना अमेरिकी रक्षा प्रतिबद्धता को कमजोर करता है। वे लिखते हैं, ‘ट्रम्पवाद अमेरिकी संधि प्रतिबद्धताओं पर सवाल उठाता है और ‘विस्तारित निरोध’ क्षमता पर गंभीर प्रभाव डालता है। इससे जापान और दक्षिण कोरिया में परमाणु हथियार विकास की बहस भी तेज हुई है।’

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