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बुबाओं के नक्शे कदम पर विश्वकप में इतिहास रच रहे नॉर्वे के तीन खिलाड़ी

साल 1994 का फीफा विश्वकप, अमेरिका। नॉर्वे की टीम में तीन खिलाड़ी थे – गोलकीपर एरिक थोर्स्टवेड्ट, मिडफील्डर अल्फ-इने हालांड और फॉरवर्ड गोरान सोर्लोथ। 32 साल बाद अमेरिका फिर से विश्वकप की मेजबानी कर रहा है और इतिहास ने एक खास चक्र पूरा किया है। इस बार नॉर्वे की जर्सी में मैदान पर उतरे हैं ये तीनों खिलाड़ियों के बेटे – क्रिस्टियन थोर्स्टवेड्ट, एर्लिंग हालांड और अलेक्जेंडर सोर्लोथ। इराक के खिलाफ ग्रुप स्टेज के मैच में ये तीनों एक साथ मैदान पर उतरे और नॉर्वे फीफा विश्वकप के इतिहास में ऐसा करने वाला पहला देश बन गया जिसने एक ही मैच में पूर्व विश्वकप खिलाड़ी के तीन बेटों को खेलवाया।

यह कहानी अमेरिका से शुरू हो कर फिर अमेरिका में दोहराई गई। 1994 का विश्वकप नॉर्वे के लिए बेहद खास था। 1938 के बाद पहली बार विश्वकप खेलने वाली उस टीम में अल्फ-इने हालांड, गोरान सोर्लोथ और एरिक थोर्स्टवेड्ट एक साथ मौजूद थे। उन्होंने क्वालीफायर्स में नीदरलैंड्स को पछाड़ते हुए इंग्लैंड को बाहर किया था। विश्वकप में नॉर्वे ने मेक्सिको को 1-0 से हराया, इटली से 1-0 से हार गया और आयरलैंड के साथ बिना गोल के ड्रॉ खेला। चारों टीमों के समान चार अंक होने के बावजूद, गोल अंतर के कारण नॉर्वे का सफर ग्रुप स्टेज पर खत्म हो गया। अब उस टीम के तीन बेटों ने फिर से अमेरिकी मैदानों पर विश्वकप खेल रहे हैं।

एर्लिंग हालांड ने कहा, “विश्वकप में डेब्यू करना और 28 साल बाद नॉर्वे को जीत दिलाना मेरे लिए गर्व की बात है।” सोर्लोथ परिवार के गोरान सोर्लोथ ने नॉर्वे के लिए 55 मैच खेले और 15 गोल किए। उनके बेटे अलेक्जेंडर सोर्लोथ यूरोप में 14 सीज़न में 13 क्लबों में खेल चुके हैं। एरिक थोर्स्टवेड्ट 1994 में नॉर्वे के पहले विकल्प के गोलकीपर थे। उनके बेटे क्रिस्टियन थोर्स्टवेड्ट मिडफील्डर के तौर पर खेल रहे हैं।

नॉर्वे ने इस बार शानदार शुरुआत की है। इराक को 4-1 और सेनेगल को 3-2 से हराकर नॉर्वे ने नॉकआउट चरण के लिए क्वालिफाई कर लिया है। इस टीम को नॉर्वे की ‘गोल्डन जेनरेशन’ माना जाता है। उनके बाप-पिता ने 1994 में अमेरिकी मैदानों पर विश्वकप खेला था। 32 साल बाद उनके बेटे उसी मैदान पर इतिहास बना रहे हैं। फुटबॉल में विरासत की बातें अक्सर सुनाई देती हैं, लेकिन नॉर्वे की यह कहानी विरासत से परे है – यह तीन परिवार और दो पीढ़ियों ने मिलकर विश्वकप का एक अद्भुत अध्याय लिखा है।

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