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सरकार ने 100 दिनों में घर-घर पासपोर्ट और लाइसेंस पहुँचाने में उल्लेखनीय प्रगति की

नई सरकार के सत्ता संभालने के बाद 5,700 से अधिक पासपोर्ट और 1,000 से ज्यादा सवारी चालक अनुमति पत्र नागरिकों के घर-घर तक पहुंचा दिए जाने की बात बताते हुए, सरकारी कुरियर सेवा के रूप में हुलाक सेवा को और सुदृढ़ बनाने के लिए प्रत्येक वार्ड में हल्कारा की आवश्यकता बताई गई है, हुलाक सेवा विभाग की महानिदेशक ने जानकारी दी। वर्तमान में हुलाक सेवा विभाग में 4,619 पद हैं। इसके अलावा स्थानीय सरकार के समन्वय से प्रतिदिन लगभग 5,000 अतिरिक्त हुलाक कर्मचारी दो घंटे पालिका हुलाक का कार्य कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री वालेन्द्र शाह ‘बालेन’ द्वारा सत्ता संभालते ही जारी किए गए शासकीय सुधार सम्बंधित 100 कार्यसूची के 27वें बिंदु में पासपोर्ट, नागरिकता प्रतिलिपि और लाइसेंस सहित सरकारी दस्तावेजों को हुलाक सेवा के माध्यम से घर-घर तक पहुंचाने की व्यवस्था 100 दिनों के भीतर लागू करने का लक्ष्य रखा गया था। 100 दिनों की अवधि के अंदर पासपोर्ट को घर तक पहुंचाने की व्यवस्था 75 जिलों में की गई है और सात जिलों में परीक्षण स्वरूप सवारी चालक अनुमति पत्र वितरण शुरू किया गया है, सूचना तथा संचार मंत्रालय ने यह जानकारी दी है।

हुलाक सेवा विभाग ने पासपोर्ट विभाग के साथ समझौते के अनुसार पिछले कुछ वर्षों से जिले के प्रशासन कार्यालय तक पासपोर्ट पहुंचाते आए थे। लेकिन प्रधानमंत्री वालेन्द्र शाह के नेतृत्व में जारी 100 बिंदु कार्यसूची के अनुसार, हुम्ला और भोजपुर को छोड़कर 75 जिलों में व्यक्ति के घर-घर तक पासपोर्ट पहुंचाने का कार्य शुरू किया गया है, अधिकारियों ने बताया। सूचना एवं संचार मंत्रालय ने इस अवधि में जिला हुलाक कार्यालयों में प्राप्त 2,60,000 से अधिक पासपोर्टों में से 5,728 पासपोर्ट संबंधित व्यक्ति के घर-घर भेजे जाने की जानकारी दी है।

महानिदेशक मनमाया भट्टराई पंगेनी ने कहा, “पहले पासपोर्ट जिला प्रशासन कार्यालय तक पहुंचता था। वहाँ पहुंचने के बाद हमने घर-घर पहुंचाना शुरू किया है। हम पासपोर्ट विभाग के साथ पूरक समझौता करने जा रहे हैं, जिससे सेवाएँ सीधे यहाँ से सेवाग्राही तक पहुंचाई जा सकेंगी।” उन्होंने यह भी कहा कि जिलों में प्रशासन कार्यालय और हुलाक कार्यालय के बीच समझौते पर हस्ताक्षर हो चुके हैं।

सवारी चालक अनुमति पत्र घर-घर पहुंचाने के विषय में पंगेनी ने कहा कि अब तक लाइसेंस घर तक पहुंचाने हेतु औपचारिक समझौता नहीं हुआ है, लेकिन अपनी पहल से सात जिलों में सवारी चालक अनुमति पत्र घर-घर पहुंचाने की शुरुआत की गई है। कास्की, मोरङ, बाँके, सुनसरी, बझाङ, कालिकोट और पर्सा में 1,000 से अधिक लोगों को सवारी चालक अनुमति पत्र घर तक पहुंचाया जा चुका है।

महानिदेशक पंगेनी ने कहा, “हमारे सभी हुलाक कर्मचारियों ने अपने-अपने प्रदेश के निर्देशनालय के माध्यम से प्रदेश सरकार के साथ समन्वय किया है। हमें उम्मीद है कि आने वाले वर्ष में लाइसेंस भी घर तक पहुंचाने में सफल होंगे।”

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