Skip to main content

नर्वे को कभी नहीं हरा पाई ब्राजील, विश्व कप में 36 वर्षों का सबसे खराब प्रदर्शन

रोचक तथ्य यह है कि ब्राजील ने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में अब तक 88 टीमों के खिलाफ खेलते हुए सिर्फ नर्वे को कभी नहीं हरा पाया है। 22 जून, काठमांडू। हमेशा फिफा विश्व कप की विजेता दावेदार मानी जाने वाली ब्राजील, उत्तरी अमेरिका में जारी 23वें संस्करण के विश्व कप में अंतिम 16 में ही बाहर हो गई है। यूरोपीय राष्ट्र नर्वे से 2-1 से हार के बावजूद ब्राजील की यात्रा यहीं खत्म हो गई। अमेरिका के न्यूयॉर्क न्यू जर्सी स्टेडियम में खेले गए मैच में एर्लिंग हालैंड के दो शानदार गोलों ने नर्वे को ब्राजील पर 2-1 की जीत दिलाई और विश्व कप में पहली बार क्वार्टर फाइनल में जगह दिलाई। 28 साल बाद विश्व कप में वापसी कर रही नर्वे ने हर मैच में इतिहास रचा है, जबकि विश्व कप फुटबॉल का पर्याय माने जाने वाले ब्राजील को अंतिम 16 में ही घर लौटना पड़ा।

ब्राजील ही नहीं, बल्कि विश्व भर के फुटबॉल प्रेमियों के लिए यह अप्रत्याशित जीत है। 24 साल बाद विश्व कप शील्ड जीतकर अपना छठा तारा बढ़ाने का लक्ष्य रखने वाली ब्राजील की यह चाहत इस बार अधूरी रही। ब्राजील ने इस विश्व कप से पहले नर्वे से 4 मैच खेले थे, लेकिन एक भी मैच जीत पाने में असफल रही। इस बार अंतिम 16 में हार के साथ ब्राजील नर्वे के खिलाफ 5 मैचों तक जीत हासिल नहीं कर सकी। ब्राजील को नर्वे को हराने के लिए और इंतजार करना होगा। रोचक बात यह है कि ब्राजील अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में अब तक 88 टीमों के मुकाबले नर्वे को ही हरा नहीं पाया है। वहीं, ब्राजील 50 देशों के खिलाफ अपराजित है। ब्राजील ने 2002 में जापान और दक्षिण कोरिया में संयुक्त रूप से हुए विश्व कप में खिताब जीता था। उससे पहले 24 वर्षों के अंतराल में ब्राजील ने उपाधि जीती थी और इस बार भी ऐसी ही उपलब्धि की उम्मीद थी।

1970 में तीसरी बार विश्व कप जीतने के बाद ब्राजील ने 24 साल बाद अर्थात् 1994 में अमेरिका में हुए विश्व कप में उपाधि जीती। लेकिन 2002 के विश्व कप जीतने के बाद से ब्राजील को विश्व कप में चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। तब से ब्राजील फाइनल तक नहीं पहुंच पाया। 2014 में जब ब्राजील मेजबान था, तब सेमीफाइनल में पहुंचा, लेकिन घरेलू मैदान पर जर्मनी से 7-1 से हारने के कारण फाइनल में जगह नहीं बना पाया। इस बार अंतिम 16 में हार के साथ ब्राजील ने एक और गिरावट का रिकॉर्ड बनाया है। ब्राजील 36 वर्षों बाद विश्व कप क्वार्टर फाइनल में पहुंचने में असफल रहा। सबसे आखिरी बार 1990 में ब्राजील अंतिम 16 से बाहर हुआ था। इटली में हुए उस विश्व कप में क्लाउडियो कानिजिया के एकमात्र गोल के कारण अर्जेंटीना ने ब्राजील को 1-0 से हराया था। इस विश्व कप में ब्राजील का प्रदर्शन अब तक का सबसे कमजोर रहा। फिफा विश्व कप में ब्राजील कुल तीन बार अंतिम 16 में ही बाहर हो चुका है।

1930 में पहला विश्व कप समूह चरण में बाहर हुआ ब्राजील, 1934 के दूसरे विश्व कप में सीधे नॉकआउट स्टेज तक पहुंचा लेकिन अपने पहले मैच में अंतिम 16 में ही बाहर हो गया। फिर 1990 में भी अंतिम 16 में बाहर हुआ था और अब 36 साल बाद ब्राजील को वही नियति भुगतनी पड़ी। इस विश्व कप में ब्राजील समूह सी में था, जहां उसने पहले मैच में मोरक्को से 1-1 की बराबरी खेली थी। उस मैच में भी ब्राजील ने शुरूआत में गोल खाया, लेकिन बाद में मैच बराबरी पर ले आया। इसके बाद हैती और स्कॉटलैंड को हराकर समूह विजेता के रूप में ब्राजील नकआउट चरण में पहुंचा। राउंड ऑफ 32 में जापान को 2-1 से मात दी, जहां ब्राजील पहले हाफ में गोल से पीछे था लेकिन दूसरे हाफ में दो गोल किए। नर्वे की खिलाफत किए गए अंतिम 16 के मैच में ब्राजील शुरुआत में बढ़त हासिल करने में नाकाम रहा और इसका महंगा भुगतान करना पड़ा। ब्राजील को शुरू में पेनल्टी मिली थी, लेकिन ब्रुनो गुमारेज ने 14वें मिनट में पेनल्टी मारी जबकि नर्वे के गोलकीपर नाएलैंड ने इसे बचा लिया और ब्राजील बढ़त नहीं ले सका। विश्व फुटबॉल के सबसे घातक स्ट्राइकर एर्लिंग हालैंड को ब्राजील के डिफेंडरों ने इस मैच की शुरुआत में ही रोकने की कोशिश की, लेकिन अंत में हालैंड ही नायक बने। उन्होंने 79वें मिनट में पहला गोल किया और नर्वे को बढ़त दिलाई। इसके बाद ब्राजील बराबरी के प्रयास में लगा था, लेकिन हालैंड ने 90वें मिनट में अपना दूसरा व्यक्तिगत गोल कर नर्वे को दो गोल की बढ़त दिलाई। अनुबंध समय में ब्राजील को पेनल्टी मिली जिसे नेमार ने गोल में बदला, लेकिन हार रुक नहीं सकी। इस हार के बाद ब्राजील के सर्वाधिक 80 अंतरराष्ट्रीय गोल करने वाले नेमार ने फुटबॉल से सन्यास की घोषणा कर दी है।