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नेपाल की संसद में हुई धक्का-मुक्की घटना की जांच समिति की रिपोर्ट

गत जेठ १७ तारीख को सत्तारूढ़ और विपक्षी सांसदों के बीच हुई धक्का-मुक्की की घटना के संबंध में गठित जांच समिति ने प्रतिनिधि सभा नियमावली की व्यवस्था को सभापति द्वारा “कठोरता से” लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया है। समिति ने सुझाव दिया है कि सभापति को प्राप्त विशेषाधिकारों का तुरंत उपयोग करना चाहिए, ऐसा जानकारी उनके निजी सचिव नवराज पांडे ने दी है। जांच समिति के निष्कर्ष में उल्लेख है, “जब अमर्यादित” और “उत्तेजक” शब्दों का प्रयोग होता है, तो ऐसी अभिव्यक्तियों को प्रतिनिधि सभा के अभिलेख से हटाने और सभा से निष्कासन के प्रावधान नियमावली के अनुसार सख्ती से करना चाहिए। इसे सभापति को कठोरता से लागू करना आवश्यक प्रतीत होता है।

प्रतिनिधि सभा नियमावली में उल्लिखित आचार संहिता एवं नियमों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करने के लिए सांसदों, संघीय संसद सचिवालय और सभापति को इसे गंभीरता से लेना चाहिए, यह समिति का सुझाव है। समिति ने जेठ १७ की घटना में संसदीय मर्यादा का उल्लंघन, नियमावली के क्रियान्वयन में कमज़ोरी, संयम की कमी और प्रशासनिक चुनौतियों को देखा। इस घटना की जांच के लिए जेठ १८ को हुई प्रतिनिधि सभा की बैठक में सभापति ने जांच समिति गठन का निर्देश दिया था।

सत्तारूढ़ और विपक्षी सांसदों के बीच हुई धक्का-मुक्की के कारण जेठ १७ की प्रतिनिधि सभा की बैठक बार-बार स्थगित होती रही। बैठक शुरू होते ही प्रधानमंत्री ने समय की मांग की और हाथ उठाया, जिसके तुरंत बाद सभापति ने अनुमति देते हुए बैठक का आह्वान किया। इसपर नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के सांसद युवराज दुलाल और नेकपा एमाले के ऐनबहादुर महर ने प्रतिनिधि सभा नियमावली, २०८३ के नियम ५६ के उल्लंघन का विरोध जताया।

समिति की रिपोर्ट के अनुसार, बैठक शुरू होने के ५ घंटे ५३ मिनट के भीतर विपक्ष के सभी सांसद अपनी जगह से उठकर विरोध प्रदर्शन करने लगे। सभापति ने नेपाली कांग्रेस की सांसद बसना थापा को अपनी बात रखने का समय दिया था, लेकिन उनके बोलने के बाद भी विपक्षी सांसदों द्वारा विरोध जारी रखा गया। ६ घंटे बाद राष्ट्रीय प्रजातांत्रिक पार्टी के सांसद अलग-अलग स्थानों से उठ कर विरोध करने लगे जबकि अन्य विपक्षी सदस्य बेल घेराव करने लगे। इसके बाद नारेबाजी होने लगी और बेल घेराव लगातार जारी रहा।