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मध्य पूर्व में फिर युद्ध : ‘रेमिटेंस पर निर्भर परिवारों की रोटी जलने की स्थिति’

त्रिभुवन विमानस्थल पर नेपाली यात्री

अमेरिका और ईरान के बीच मध्य पूर्व में फिर युद्ध छिड़ने से रेमिटेंस के प्रमुख गंतव्य देशों में विदेशी रोजगार के मुद्दे को लेकर नेपाल में भी चिंता शुरू हो गई है।

विदेशी रोजगार विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष वैशाख और जेठ में ईरानी युद्ध से सबसे प्रभावित देशों में से कुवैत में रोजगार पाने के लिए जाने वाले नए नेपाली कामगारों की संख्या पिछले साल की समान अवधि की तुलना में दो तिहाई घट गई है।

पिछले साल वैशाख में 3,453 लोगों ने कुवैत जाने के लिए श्रम स्वीकृति प्राप्त की थी। लेकिन इस वर्ष वैशाख में केवल 1,041 लोगों ने नई श्रम स्वीकृति ली है। पिछले साल जेठ में तीन हजार से अधिक कामगारों ने कुवैत के लिए श्रम स्वीकृति ली थी जबकि इस साल केवल 1,100 ने स्वीकृति प्राप्त की है।

कुवैत के लिए श्रम स्वीकृति लेने वालों की संख्या पिछले साल माघ तक 3,853 थी। लेकिन माघ 16 से ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से नए श्रम स्वीकृति लेने वालों की संख्या 2,000 से कम हो गई है।

यह कमी केवल कुवैत तक सीमित नहीं है, बल्कि ईरान के द्वारा मिसाइल और ड्रोन हमले की वजह से यूएई, कतार, सऊदी अरब और बहरीन जैसे श्रम गंतव्यों पर जाने वाले नेपाली कामगारों की संख्या भी फागुन से घट रही है।