सदाचार नीति: नियंत्रण की कोशिश या सुशासन स्थापित करने का प्रयास?
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सरकार द्वारा नागरिकों के साथ सरकारी, निजी और सार्वजनिक क्षेत्रों को ‘अनुशासन में बांधने और सुशासन के लिए जिम्मेदार बनाने’ हेतु लाई गई राष्ट्रीय सदाचार नीति के कार्यान्वयन के आधार पर विशेषज्ञों ने सवाल उठाए हैं।
पिछले सप्ताह मंत्रिपरिषद ने नैतिकता, व्यावसायिक निष्ठा और ईमानदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राष्ट्रभक्ति, निष्ठा और नागरिक सहभागिता सहित आठ मूलभूत सिद्धांतों पर आधारित सदाचार नीति को स्वीकृति दी थी।
इस नीति में गैरसरकारी क्षेत्र, अंतर्राष्ट्रीय संघ/संस्थाएं तथा कूटनीतिक क्षेत्र के निकायों के लिए कड़ाई करने वाले कुछ प्रावधान भी रखे गए हैं।
एक पूर्व कानून मंत्री के अनुसार, नीति के अधिकांश प्रावधान वर्तमान कानूनों में ही मौजूद हैं, अत: नई नीति लाने के बजाय मौजूदा कानूनों के प्रभावी कार्यान्वयन पर जोर देना उचित होगा।
सरकार सदाचार नीति के क्रियान्वयन के लिए अलग से कानून और नियमावली बनाने तथा विभिन्न निकायों के लिए सदाचार संहिता जारी करने की योजना बना रही है।
नयी नीति पर विशेषज्ञों की क्या राय है?
नेपाल कानून आयोग के अध्यक्ष भी रह चुके पूर्व कानून मंत्री माधव पौडेल ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सदाचार नीतियां लाने का अनुभव है, इसलिए सरकार द्वारा हाल ही में जारी की गई नीति में कोई खास नई बात नहीं है।
उन्होंने कहा, “मेरी राय है कि इसे लाना बुरा नहीं है, पर जो बातें इसमें हैं वे पहले से ही क्षेत्रवार लागू हैं। यह सदाचार आचार संहिता और सदाचार कानून लाने की बात करता है। बिना कानून के यह नीति सिर्फ तालिका भर है, इसका क्रियान्वयन संभव नहीं।”
उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान नियम, कानून एवं आचार संहिता का पालन न होने के कारण सदाचार नीति लागू होगी ऐसा दिखता नहीं, “कोई नहीं है जो आचार संहिता व कानून से पालन सुनिश्चित कर सके।”
नेपाल ल क्याम्पस की सहायक क्याम्पस प्रमुख उपप्राध्यापक रोशनी पौडेल मानती हैं कि बदलती राजनीतिक परिस्थिति में सुशासन कायम करने और भ्रष्टाचार मुक्त समाज निर्माण के लिए वर्तमान सरकार ने सदाचार नीति लाई है।
उन्होंने कहा, “हमारे पास कानून बिखरे हुए हैं। यह नीति केवल सरकारी नहीं, अनेक क्षेत्रों को समेटने का प्रयास है और राज्य ने सुशासन के संदर्भ में समान व्यवहार का इरादा दिखाया है। शुरुआत में इसे संदेह से न देखकर अच्छे इरादे से स्वीकार करना चाहिए।”
वकील भी रह चुकी उन्होंने जोड़ा, “नीति न होने से सदाचार कायम नहीं होगा ऐसा नहीं है, अभी जो संरचनाएं और कानून हैं उनसे भी किया जा सकता है।”
नीति में किस प्रकार के प्रावधान हैं?
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नीति में नागरिक, विधायिका, सार्वजनिक पदाधिकारी, राजनीतिक दल, वित्तीय एवं कूटनीतिक क्षेत्र समेत 12 निकायों के कर्तव्य और जिम्मेदारियां निर्धारित की गई हैं।
नागरिकों को अपने अधिकारों का उपयोग करते समय कानून का सम्मान करने, सार्वजनिक मामलों में सक्रिय भागीदारी करने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने की जिम्मेदारी दी गई है।
मतदान, स्वयंसेवा और अन्य सामुदायिक गतिविधियों में भागीदारी सहित नागरिक कर्तव्य पालन और सभ्यता संस्कृति के संरक्षण का भी उल्लेख है।
पूर्व कानून मंत्री पौडेल कहते हैं, “नागरिकों के समीप नियंत्रण से अधिक संवैधानिक और कानूनी पालन दोहराया गया है। कूटनीति क्षेत्र में कुछ सख्ती की गई है। विदेशी मुलाकातें विदेश मंत्रालय के समन्वय से ही हो सकेंगी।”
प्रधानमंत्री वालेन्द्र शाह के सत्ता संभालने के बाद कूटनीतिक मुलाकातों को विदेश मंत्रालय के संयोजन में रखने का प्रोटोकॉल सख्त किया गया है।
सदाचार नीति में परराष्ट्र मंत्री की मंजूरी से ही संवेदनशील द्विपक्षीय या बहुपक्षीय संबंधों पर विचार व्यक्त करने का प्रावधान है तथा गोपनीय सूचना विदेशी को नहीं देने का नियम है।
नेपाल और पड़ोसी तथा अन्य देशों के संबंधों में नकारात्मक प्रभाव डालने वाली किसी भी धारणा, गतिविधि या सहयोग पर रोक है।
जानकारी के अनुसार नीति में गैरसरकारी संस्थाओं और अंतरराष्ट्रीय गैरसरकारी संस्थाओं के कार्यों पर भी भविष्य में नियंत्रण करने का प्रावधान है।
नीति ने गैरसरकारी संस्थाओं को राजनीतिक तटस्थता बनाए रखने और कार्यों का रिकॉर्ड रखने का निर्देश दिया है।
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अंतरराष्ट्रीय गैरसरकारी संस्थाओं के लिए नेपाल के संविधान के अनुपालन, संस्थागत हितों के बजाय स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर सहायता प्रदान करने का प्रावधान है।
नीति में नेपाल के विरुद्ध अपमान, दुष्प्रचार या नफरत फैलाने की मनाही और जवाबदेह तरीके से काम करने का प्रावधान है। साथ ही संबंधित निकायों को रिपोर्ट भी प्रस्तुत करनी होगी।
नीति में सदाचार और सुशासन बनाए रखने के लिए निकायों की जिम्मेदारी निर्धारित की गई है, जबकि मूल्यांकन और सम्मान के लिए सदाचारिता को आधार बनाया गया है।
विधायकों को व्यक्तिगत स्वार्थों को अलग रखते हुए संसदीय समिति या बैठक में भाग लेने, पदाधिकारों का निजी लाभ के लिए उपयोग नहीं करने का निर्देश दिया गया है।
निजी हितों का पूर्व में और लिखित में खुलासा करना तथा ऐसे विषय से अलग रहना भी नीति में शामिल है।
राजनीतिक दलों से कहा गया है कि वे अपने कार्य और आय-व्यय सार्वजनिक करें, तथा पद और गोपनीय सूचनाओं का उपयोग केवल सार्वजनिक हित में ही करें।
संचार माध्यमों के लिए सूचना में हेरफेर न करने, व्यक्ति की गोपनीयता बनाए रखने, गलत सूचना, नफरत और अफवाहों की रोकथाम में सक्रिय भूमिका निभाने का प्रावधान किया गया है।
नैतिक शिक्षा को बढ़ावा और धार्मिक सहिष्णुता का विस्तार भी नीति का लक्ष्य है।
विदेशी नागरिकों को नेपाल के कानून, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों का सम्मान करना तथा संवेदनशील राजनीतिक विषयों में हस्तक्षेप रहित व्यवहार करना होगा।
नेपाल ल क्याम्पस की उपप्राध्यापक रोशनी पौडेल नीति में कुछ अच्छे प्रावधान बताती हैं और इसके सफल कार्यान्वयन में विश्वास रखती हैं।
प्रधानमंत्री कार्यालय की प्रतिक्रिया क्या है?
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प्रधानमंत्री तथा मंत्रिपरिषद कार्यालय के प्रवक्ता हेमराज अर्याल ने बताया कि लंबी तैयारी के बाद सदाचार नीति आई है, जिसका अवधारणा को क्रियान्वयन में लाया जाएगा।
उन्होंने कहा, “नीति कई क्षेत्रों को सम्मिलित करती है। इसे कानूनी रूप देकर लागू किया जाएगा। कुछ नियम कानून बिना बने भी लागू किए जा सकते हैं।”
नीति में प्राकृतिक तौर पर लोगों और संबंधितों को उनके कार्यों का समीक्षा और सतर्कता के लिए प्रोत्साहित करने का भी उद्देश्य है।
कुछ लोग इसे प्रारंभिक खाका मानते हैं, पर आगामी कानून-नियम इसे कानूनी दंड और सुविधाएं भी प्रदान करेंगे, ऐसा विश्वास है।
प्रवक्ता अर्याल ने कहा, “व्यक्ति, संस्था और समाज सब सदाचारी होंगे तो ही राष्ट्र सदाचारपूर्ण होगा। इसे नियंत्रण उपायों से नहीं बल्कि सुशासन स्थापित करने की कोशिश के रूप में देखना चाहिए।”
नीति के लिए सभी क्षेत्रों के लिए नैतिक मानदंडों वाली राष्ट्रीय सदाचार संहिता छह महीनों के अंदर तैयार करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई है।
साथ ही छह महीनों में राष्ट्रीय सदाचार विधेयक बनाकर एक वर्ष के भीतर कानून और नियमावली बनाकर लागू किया जाएगा।
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