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ट्रम्प की चेतावनी: इरान के पास 1000 मिसाइलें तैनात, आवश्यक होने पर कड़ा जवाब देने का आदेश

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी है कि यदि इरान हमला करता है तो संयुक्त राष्ट्र अमेरिका अभूतपूर्व जवाब देगा। इजरायल में तैनात 12 एफ-22 फाइटर जेट अमेरिकी सरकार ने वापस बुलाना शुरू कर दिया है। उपग्रह तस्वीरों में स्पष्ट हुआ है कि इरान पारचिन और पिकएक्स माउंटेन में क्षतिग्रस्त परमाणु केंद्रों की मरम्मत और पुनर्निर्माण कार्य शुरू कर चुका है। 27 असार, काठमाडौं। ट्रम्प ने कहा, “अगर इरान ने मुझ पर हमला किया तो मैं उसे पूरी तरह नष्ट कर दूंगा।” उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि इरान के पास 1000 मिसाइलें तैयार हैं और जरूरत पड़ने पर हजारों और मिसाइलें दागी जाएंगी। ट्रम्प ने पहले ही उत्तरात्मक कदम उठाने के आदेश दे दिए हैं और अमेरिकी सेना कम से कम एक वर्ष तक ऐसी कार्रवाई के लिए तैयार है, उन्होंने दावा किया।

सन् 2020 में अमेरिकी ड्रोन ने इरानी कमांडर कासिम सुलेमानी की हत्या के बाद से इरान निरंतर बदले की चेतावनी दे रहा है। हाल ही में, इरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनी की अंतिम संस्कार के दौरान कुछ समूहों ने ट्रम्प की हत्या का नारा लिखे बैनर लेकर विरोध प्रदर्शित किया, जिसके बाद ट्रम्प ने कड़ी चेतावनी जारी की है। इसी दौरान, इजरायली मीडिया ‘कान न्यूज’ की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने इजरायल से अपने 12 एफ-22 स्टेल्थ फाइटर जेट वापस बुलाना शुरू कर दिया है। ये लड़ाकू विमान इस साल फरवरी से इजरायल के ओवदा एयरबेस पर तैनात थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये विमान इरान के खिलाफ सैन्य ऑपरेशन के लिए भेजे गए थे और हाल के कुछ हमलों में भाग ले चुके हैं।

इरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने घोषणा की है कि यदि इजरायल फिर से अपने महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमला करता है तो वह कड़ी प्रतिक्रिया देगा। इससे पहले, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी इरान पर अतिरिक्त हमले की चेतावनी दी थी। कतर ने अमेरिका और इरान दोनों से समझौते का पालन करते हुए वार्ता जारी रखने का आग्रह किया है। साथ ही, होर्मुज जलसंधि में जहाजों के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के आपात बैठक में रूस ने ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी पर आरोप लगाया कि वे इरान के नागरिक बुनियादी ढांचे पर अमेरिकी और इजरायली हमलों का समर्थन कर रहे हैं। वहीं, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने चेतावनी दी है कि अमेरिका-इरान तनाव बढ़ने से वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और ऊर्जा संकट बढ़ सकता है।