
राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी: सत्ताधारी दल द्वारा प्रस्तुत ‘राइट टू रिकॉल’ अवधारणा क्या है?
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सरकार का नेतृत्व कर रही राष्ट्रिय स्वतंत्र पार्टी ने निर्वाचित प्रतिनिधियों को वापस बुलाने की व्यवस्था से संबंधित अवधारणा पत्र तैयार करने का निर्णय लिया है।
शुक्रवार को हुई पार्टी केंद्रीय समिति की बैठक में ‘राइट टू रिकॉल’ अर्थात प्रत्याह्वान से जुड़ी अवधारणा बनाने का काम महासचिव विपिन आचार्य को दिया गया, यह जानकारी केंद्रीय सदस्य मिलन लिम्बू ने दी।
आचार्य संयोजकत्व में गठित 11 सदस्यों वाली समिति को यह अवधारणा बनाकर पार्टी को प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
पहले से ही रास्वपा निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को वापस बुलाने वाली कानूनी व्यवस्था का समर्थन करती आई है।
महासचिव आचार्य ने बताया कि वे इसके संबंध में अवधारणा पत्र शीघ्र तैयार करके पार्टी को सौंपेंगे।
“पार्टी के स्थापना काल से ही राइट टू रिकॉल को अपने मूल सिद्धांतों में से एक के रूप में स्वीकार किया गया है। शुरुआत में हमने इस अवधारणा को ढाकाकुमार श्रेष्ठ के सन्दर्भ में भी उपयोग किया था,” आचार्य कहते हैं।
रास्वपा ने पहली बार हिस्सा लिया २०७९ साल के प्रतिनिधिसभा चुनाव से सांसद बने श्रेष्ठ को विवाद के बाद पार्टी ने पद से वापस बुलाया था हालांकि उस समय किसी जनमत संग्रह का आयोजन नहीं किया गया था।
“अब इस बिंदु पर पुनः पहुंचकर इसे दस्तावेजीकृत कर पार्टी के अंदर ‘राइट टू रिकॉल’ को कैसे मजबूत किया जाए और जनप्रतिनिधियों को वापस बुलाने का अभ्यास कैसे किया जाए, इस पर एक अवधारणा बनाई जाए,” आचार्य ने कहा।
कानून का मसौदा तैयार किया जाएगा
रास्वपा ने दूसरी बार हिस्सा लिया गत फागुन में हुए चुनाव में स्पष्ट बहुमत लाने के बाद श्रम मंत्री बने दीपककुमार साह को प्रत्याह्वान अवधारणा के अनुसार वापस बुलाने का दावा किया था। लेकिन आलोचकों ने कहा था कि इसमें मतदाता और पार्टी कार्यकर्ताओं की राय नहीं ली गई।
“यह कभी भी किसी व्यक्ति के खिलाफ राजनीतिक हथियार नहीं बनना चाहिए। हमें डराने वाले हथौड़े की बजाय एक सच्चा सिद्धांत बनने वाली अवधारणा के साथ दस्तावेज तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है,” आचार्य ने कहा।
रास्वपा महासचिव आचार्य ने बताया कि वे पार्टी एवं देश के विरुद्ध जाने वाले निर्वाचित प्रतिनिधि को पार्टी जिम्मेदारी या अन्य राजनीतिक पद से वापस लेने के लिए कानूनी मसौदा तैयार कर प्रस्तुत करेंगे।
सांसद या अन्य निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को वापस बुलाने का अधिकार मौजूदा कानून मतदाता या दलों को नहीं देता।
प्रतिनिधिसभा में दो तिहाई के करीब मत प्राप्त करने वाली रास्वपा ने पार्टी द्वारा बनाई गई अवधारणा को विधेयक के रूप में संसद में कानून बनाने का दावा किया है।
“यह विधेयक सरकार द्वारा या पार्टी से निजी विधेयक के रूप में पेश किया जाए, यह अलग बात है। लेकिन हमारा प्रयास होगा कि यह केवल हमारे लिए ही नहीं बल्कि समग्र रूप से भी पारित हो,” आचार्य ने कहा।
विवादित विषयों के बारे में बताते हुए आचार्य ने कहा, “यह समिति विज्ञानसंगत विधि बनाने के दिशा में काम करेगी।”
पदाधिकारी में मनोनयन
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चितवन में महाधिवेशन संपन्न हुए करीब दो महीने बाद रास्वपा ने पार्टी पदाधिकारियों के रिक्त 11 पदों में से 6 पदों पर मनोनयन किया है।
शुक्रवार ‘घण्टीघर’ में हुई बैठक में जनरल जेनरेशन अभियान के कार्यकर्ता पुरुषोत्तम यादव को सहमहासचिव, डॉ मनोहर प्रधान को कोषाध्यक्ष एवं वसुमाया तामांग को सहकोषाध्यक्ष मनोनीत किया गया।
रास्वपा ने चुनावी सरकार के सूचना मंत्री जगदीश खरेल को प्रवक्ता, नमिता यादव और सुरेंद्र चौधरी को सहप्रवक्ता नियुक्त किया है।
नेताओं ने बताया कि महाधिवेशन के बाद होने वाली पहली केंद्रीय समिति की बैठक में शेष केंद्रीय सदस्य और पदाधिकारी मनोनीत किए जाएंगे, हालांकि पिछली बैठक में प्रधानमंत्री वालेंद्र शाह ‘बालेन’ को पार्टी का वरिष्ठ नेता मात्र मनोनीत किया गया था।
रास्वपा के विधान के अनुसार पार्टी पदाधिकारी बनने के लिए पूर्व केंद्रीय सदस्य होना आवश्यक है।
शुक्रवार को हुई बैठक ने गृह मंत्री सुधन गुरुङ, भौतिक पूर्वाधार मंत्री सुनील लम्साल और भूमिसुधार, सहकारी एवं संघीय मामिला मंत्री प्रतिभा रावल सहित नौ लोगों को केंद्रीय समिति में मनोनीत किया।
केंद्रीय समिति में अब भी 42 सदस्यों के मनोनीत होने बाकी हैं। गत फागुन के चुनाव से पहले समायोजन से रास्वपा में आए समूह को शामिल करने के उद्देश्य से एक वरिष्ठ नेता और 11 पदाधिकारियों को सभापति द्वारा मनोनीत करने की व्यवस्था की गई थी।
बैठक ने संगठन विभाग प्रमुख में पूर्व पत्रकार प्रमोद न्यौपाने, अंतरराष्ट्रीय संबंध विभाग प्रमुख में परराष्ट्र मंत्री शिशिर खनाल, सार्वजनिक सेवा एवम् जन शिकायत प्रबंधन विभाग प्रमुख में विजय जैरू, जनस्वास्थ्य विभाग प्रमुख में तोसीमा कार्की, पूर्वाधार विभाग प्रमुख में निशा डाँगी, अर्थ विभाग प्रमुख में पूर्व कोषाध्यक्ष लिमा अधिकारी आचार्य और प्रशिक्षण विभाग प्रमुख में कमल सुवेदी को मनोनीत किया।
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