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सरकार के साथ राहत, बचाव और पुनर्वास में समन्वय करने पर सहमति

रास्वपाका आह्वान पर सिंहदरबार में आयोजित सर्वदलीय बैठक ने राहत, बचाव और पुनर्वास में सरकार के साथ समन्वय कर आगे बढ़ने का निर्णय लिया है। बैठक ने केन्द्र में गठित राजनीतिक नेटवर्क को सभी स्तरों पर विस्तारित करने और बागमती प्रदेश से लेकर बाढ़ प्रभावित जिलों तथा पालिकाओं में संयंत्र बनाने पर सहमति जताई है। एमाले, नेकपा और कांग्रेस के नेताओं ने सुरंग में फंसे या बंद व्यक्तियों के उद्धार के लिए सरकार को अंतरराष्ट्रीय, तकनीकी और विशेषज्ञ सहयोग लेने का सुझाव दिया है। १६ भदौ, काठमाण्डौ।

सर्वदलीय बैठक ने राहत, बचाव और पुनर्वास में सरकार के साथ समन्वय के माध्यम से काम करने पर सहमति व्यक्त की है। रास्वपा के आह्वान पर मंगलवार को सिंहदरबार में हुई इस बैठक ने विपदा के समय एकजुट होकर सरकार के साथ मिलकर राहत, बचाव और पुनर्वास कार्यों को आगे बढ़ाने का फैसला किया है। बैठक के बाद रास्वपा प्रवक्ता जगदीश खरेल ने खोज, उद्धार और राहत संबंधी विभिन्न राजनीतिक दलों से प्राप्त सुझाव और प्रतिक्रियाओं को गंभीरता से लिया गया जानकारी दी। उन्होंने केन्द्र में गठित राजनीतिक नेटवर्क को सभी स्तरों पर विस्तार करने की सहमति का उल्लेख किया।

इसके अतिरिक्त, इस प्रकार की सर्वदलीय बैठकें और संयंत्र बागमती प्रदेश सहित बाढ़ प्रभावित सभी जिलों और स्थानीय तहों में भी गठित किए जाएंगे, उन्होंने बताया। इन संयंत्रों का मुख्य उद्देश्य इन स्तरों पर सरकार द्वारा संचालित विपदा प्रबंधन कार्यों में सहयोग और समन्वय करना है। सभी बस्तियों के पुनर्वास के लिए तीनों स्तरों की सरकार, नागरिक, प्रभावित समुदाय और राजनीतिक दलों के बीच राष्ट्रीय सहमति आवश्यक होने के कारण उच्चस्तरीय राजनीतिक संयंत्रों को निरंतरता देते हुए आगे बढ़ने की सहमति भी प्रवक्ता खरेल ने स्पष्ट की।

बैठक के बाद एमाले नेता प्रदीप ज्ञवाली ने प्रभावित क्षेत्रों के पीड़ित नागरिकों को राहत वितरण में सरकार की गंभीर भूमिका की आवश्यकता जताई और सुरंग में फंसे लोगों के उद्धार के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग लेने की सलाह दी। नेकपा नेता वर्षमान पुन ने सुरंग में बंद मजदूरों के उद्धार में विशेषज्ञों को लगाया जाना चाहिए तथा निजी क्षेत्र और विदेशी कंपनियों को उद्धार कार्य में खुला सहयोग देने का आग्रह किया। कांग्रेस के प्रवक्ता देवराज चालिसे ने सुरंग में बंद व्यक्तियों के खोज और उद्धार में सरकार को अन्य देशों से तकनीकी सहयोग लेना चाहिए, इस बात पर ज़ोर दिया।