
प्रकृति से प्रत्यक्ष संपर्क रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है
२५ भदौ, काठमाडौं । प्रकृति में घूमते या समय बिताते समय आंखों और कानों को मिलने वाले आनंद के बारे में अधिकांश लोगों को जानकारी है। लेकिन, पेड़, मिट्टी और पौधों को सीधे छूने की क्रियाएं मानव स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव डालती हैं, इस विषय में हाल ही के शोधों ने महत्वपूर्ण तथ्य उजागर किए हैं। फिनलैंड में किए गए वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार मिट्टी और प्राकृतिक वनस्पति के प्रत्यक्ष संपर्क से त्वचा पर रहने वाले सूक्ष्मजीवों (माइक्रोब्स) की विविधता बढ़ती है और रोगप्रतिरोधक प्रणाली मजबूत होती है। फिनिस एनवायरनमेंट इंस्टीट्यूट की पारिस्थितिकीविद् और प्रकृति-स्वास्थ्य शोधकर्ता मीरा ग्रोनरुस द्वारा किए गए प्रयोग में प्रतिभागियों को २० सेकंड तक मिट्टी और पिटर मॉस हाथ में लगाने को कहा गया। पानी से हाथ धोने के बाद भी त्वचा पर लाभकारी जीवाणुओं की संख्या और विविधता में उल्लेखनीय वृद्धि पाई गई।
वैज्ञानिकों के अनुसार त्वचा पर जीवाणुओं का संतुलित मिश्रण हानिकारक रोगजनक (पैथोजेन्स) के प्रसार को रोकता है। इसी प्रकार, पर्यावरण विज्ञ मार्जा रोजलुंड के नेतृत्व में फिनलैंड के बच्चों पर दो वर्ष तक किए गए अध्ययन में भी समान परिणाम सामने आए। पक्की या सीमेंटेड जगहों पर खेलने वाले बच्चों की तुलना में प्राकृतिक वातावरण या मिट्टी और झाड़ियों वाले आंगन में नियमित खेलने वाले बच्चों की त्वचा में सूक्ष्मजीवों की विविधता एक वर्ष बाद भी अधिक पाई गई। जांच से पता चला कि विशेष रूप से ‘गामाप्रोटियोबैक्टेरिया’ जीवाणु की विविधता में वृद्धि से शरीर में सेतो रक्त कोशिकाओं (रेगुलेटरी टी सेल्स) की संख्या बढ़ती है, जो रोगप्रतिरोधक प्रणाली को प्रभावी ढंग से समायोजित कर ऑटोइम्यून रोगों के जोखिम को कम करता है।
यह प्राकृतिक संपर्क का लाभ केवल बच्चों में ही नहीं बल्कि वयस्कों में भी देखा गया है, जैसा कि अन्य अध्ययनों ने पुष्टि की है। एक अध्ययन में सर्दियों के मौसम में घर में जैविक मिट्टी रखकर सब्जियां उगाने वाले वयस्कों की त्वचा पर जीवाणु विविधता बढ़ी और रक्त में सूजन कम करने वाले ‘एंटी-इन्फ्लेमेटरी साइटोकाइन्स’ की मात्रा बढ़ गई। इसी तरह, कार्यालयों में जीवित पौधों की ‘हरी दीवारों’ (ग्रीन वाल्स) के रखे जाने से कर्मचारियों की त्वचा स्वास्थ्य में सुधार हुआ और रक्त में सूजनजन्य तत्वों में कमी आई।
अध्ययनकर्ताओं के अनुसार ये तथ्य ‘जैवविविधता परिकल्पना’ को मजबूत करते हैं, जिसके अनुसार पर्यावरणीय जैवविविधता की कमी ने हाल के वर्षों में प्रतिरक्षा प्रणाली संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ावा दिया है। नौकरी में पेड़ की लताएं छूने, घास पर बैठने और मिट्टी से सीधे संपर्क में आने जैसी छोटी-छोटी आदतें दीर्घकालीन स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं।