Skip to main content

‘सुरंग के अंदर लोगों की आवाजें सुनीं, पर आंखों से देखे बिना सार्वजनिक नहीं किया’

भोटेकोशी बाढ़ के बाद माथिल्लो त्रिशूली–३ ए जलविद्युत् परियोजना की भूमिगत संरचना में फंसे दो प्राविधिकों का जीवित उद्धार किया गया है। उद्धार के दौरान सुरंग की स्थिति, पानी और मिट्टी के दबाव, बड़े पत्थर और सीमित उपकरणों के कारण टीम को बार-बार अपनी योजना बदलनी पड़ी। जियोटेक्निकल इंजीनियर उदयराज न्यौपाने ने स्वयंसेवी रूप से फील्ड में सक्रिय होकर अपने और जुटाए गए उपकरणों के साथ उद्धार अभियान के तकनीकी पक्ष को संभाला।

उद्धार के दौरान सुरंग की स्थिति, पानी और मिट्टी का दबाव, बड़े पत्थर और संरचना द्वारा उत्पन्न बाधाओं तथा सीमित उपकरणों के कारण टीम को बार-बार अपनी योजना बदलनी पड़ी। न्यौपाने ने कहा, “आपदा के बाद मदद कैसे की जा सकती है, इसके बारे में सोच रहा था।” उन्होंने घटनास्थल तक पहुंचने के लिए अपने खुद के उपकरण लेकर जाने का निर्णय लिया।

उद्धार के दौरान सुरंग के अंदर किसी के जीवित होने की संभावना थी, लेकिन वास्तविक स्थिति का पता नहीं था। उन्होंने बताया, “सुरंग के ऊपर के भाग में पानी नहीं पहुंचा था और खाली जगह थी।” नेपाल विद्युत प्राधिकरण ने वहां 42 लोगों के मौजूद होने की जानकारी दी थी।

उद्धार के लिए केबल डक्ट को चुनने का कारण ड्राइंग में स्पष्ट था कि केबल टनल सुरंग के ऊपर के हिस्से तक पहुंचता है। उन्होंने कहा, “अगर लोग हैं तो वे ऊपर के हिस्से में ही होने की संभावना ज्यादा थी।” उद्धार अभियान के दौरान पानी के दबाव और बड़े पत्थरों से मुकाबला करना पड़ा। अंत में दो लोग जीवित मिले तो न्यौपाने ने कहा, “यह एक बड़ी राहत का पल था।”