
वो ६ चीजें जो ८० के दशक में पले-बढ़े बच्चों की यादें ताज़ा करती हैं
८० के दशक में पले-बढ़े मिलेनियल बच्चों ने गुच्चा, डन्डिबियो, टुकीबत्ती, श्यामश्वेत टीवी और एंटिना के साथ अपना बचपन बिताया था। क्या आपको वह पल याद है जब आपने फुटबॉल खेलते हुए केवल एक जोड़ी मोज़े पहने थे? या पुरानी चप्पल काटकर उसे चौकोर आकार में बना कर गाड़ी चलाई थी? सुरुवाल की काठी तक छलांग लगाकर खल्ती में गुच्चा भरा था? नाक में सिगान डालकर घुर्रा मिठाई चाटी थी? अगर इन सवालों के जवाब में आपने ‘हाँ’ या ‘ऐसा ही किया’ कहा, तो निश्चित तौर पर आप ८० के दशक में पले-बढ़े हैं।
उस समय आपने क्या-क्या देखा? क्या-क्या खेल खेले? श्यामश्वेत समय में आपने रंगीन बचपन बिताया। १४ इंच की टीवी देखने के लिए उत्सुक होकर एंटिना घुमाई, शिक्षक पढ़ाते समय खासखुस करते हुए दोस्तों के साथ गुच्चा की खरीद-फरोख्त की, पाइप से रिंग बनाकर तेज दौड़ लगाई। आज के सोशल नेटवर्क ८० के दशक को यादगार बनाते हुए रंगीन चर्चाओं से भरे हुए हैं। कई लोग अपने बचपन को याद कर रहे हैं क्योंकि ८० के दशक में पले-बढ़े मिलेनियल बच्चों का बचपन वास्तव में बहुत रंगीन था। वे आरामदायक सोफ़े पर बैठकर मोबाइल में उलझे नहीं थे।
वे वीडियो गेम या टिकटॉक में व्यस्त नहीं थे। बल्कि धूल भरे आंगन और खेतों में दौड़ता, कूदि-कूदता, गिरता-खेलता बड़े हुए। इस तरह के बचपन को याद कर वे आज भी उत्साहित होते हैं। इनके बचपन से जुड़ी कुछ खास चीजें हैं। गुच्चा – कांच के गोलाकार रंगीन गुच्चे जिन्हें देखकर खुशी होती थी। डन्डिबियो – अपने हाथों से डंडी बिझाकर खेला जाता था।
टुकीबत्ती खेल नहीं बल्कि एक वस्तु थी, जो आपको ८० के दशक में वापस ले जाती है। उस समय केवल शहरों में बिजली थी और टुकीबत्ती जलाना पड़ता था। श्यामश्वेत टीवी और एंटिना – आज जब १४ इंच का श्यामश्वेत टीवी और उसकी एंटिना देखीं, तो बचपन की यादें ताजा हो जाती हैं। घुर्रा मिठाई – धागे से बंधा हुआ घुर्रा जो चॉकलेट जैसा स्वाद देता था और खेलने में भी मज़ा आता था। एक छोटे कीमत में मिलने वाली इस मिठाई ने ८० के दशक के बच्चों को बहुत खुशी दी। संतरे वाला चॉकलेट – इस पीढ़ी को जंक फूड की आदत नहीं लगी क्योंकि उस वक्त मार्केट में खाने-पीने की चीजें सीमित थीं।