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सरकार और एन्फा के बीच संवाद की कमी बनी हुई

एन्फा महासचिव का कहना है: व्यक्तिगत रूप से कौन हारता है या जीतता है, उससे ज्यादा महत्वपूर्ण है कि देश और देश के फुटबॉल को हार न हो, यही हमारी सोच है। जब फिफा ने तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप का हवाला देते हुए 24 जून को एन्फा को अनिश्चितकाल के लिए निलंबित कर दिया था, तब से नेपाली फुटबॉल 83 दिनों से ठप पड़ा है। सरकार ने फिफा के साथ सकारात्मक संवाद होने का दावा किया है, फिर भी अब तक एन्फा के साथ कोई वार्ता नहीं हुई है और दोनों पक्षों के बीच संवादहीनता बनी हुई है। यदि निलंबन सितंबर के अंत तक नहीं हटाया गया तो नेपाल साफ चैंपियनशिप गंवा सकता है, जबकि राखेप सदस्य सचिव रामचरित्र मेहता ने कहा है कि एन्फा पदाधिकारियों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, इसलिए वार्ता का कोई औचित्य नहीं बचा है।

30 भदौ, काठमांडू। अखिल नेपाल फुटबॉल संघ (एन्फा) को फुटबॉल का सर्वोच्च निकाय अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल महासंघ (फिफा) द्वारा निलंबित हुए 83 दिन हो चुके हैं। फिफा ने तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप के आरोप में 24 जून को एन्फा पर अनिश्चितकालीन निलंबन लगाई थी। इससे नेपाली फुटबॉल लगभग पूरी तरह ठप्प हो गया है। खिलाड़ी खेल नहीं पाए, प्रशिक्षक प्रशिक्षण नहीं दे पा रहे हैं, और रेफरी भी मैच संचालित नहीं कर पा रहे हैं।

सरकार लगातार दावा कर रही है कि वह फिफा के साथ संवाद स्थापित कर निलंबन हटवाने का प्रयास कर रही है। शिक्षा तथा खेलकूद मंत्री सस्मित पोखरेल ने कहा कि फिफा के साथ संवाद सकारात्मक है और जल्द ही निलंबन हट जाएगा। लेकिन निलंबन लगने के 83 दिन बीत जाने के बावजूद यह फुकुवा नहीं हो पाया है। सरकार के दावे के बावजूद अब तक एन्फा के साथ कोई वार्ता नहीं हुई है। 83 दिनों के दौरान सरकार और एन्फा के बीच कोई संवाद नहीं हुआ।

नेपाली फुटबॉल संचालन करने वाले संघ के प्रति सरकार की उपेक्षा का अनुभव एन्फा के पदाधिकारी कर रहे हैं। बार-बार वार्ता का अनुरोध करने के बावजूद सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया है, ऐसा एन्फा नेतृत्व का कहना है। एन्फा महासचिव किरण राई बताते हैं, ‘हमने विभिन्न अवसरों पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कई बार फोन किए, लेकिन हमेशा जवाब में यह मिला कि अभी समय समाप्त हो गया है।’

एन्फा ने निलंबन हटाने के लिए मंगलवार को राष्ट्रीय खेलकूद परिषद् (राखेप) में ज्ञापन पत्र जमा करते हुए धरना देने का कार्यक्रम तय किया था। लेकिन अभी तक सरकार ने वार्ता करने या पहल करने को लेकर एन्फा के साथ कोई संवाद नहीं किया है। 83 दिनों के बावजूद सरकार और एन्फा के बीच कोई संपर्क नहीं हो पाया है। हालांकि सरकार ने अगर वार्ता का अनुरोध किया तो धरना समेत कार्यक्रम स्थगित कर दिया जाएगा, यह जानकारी महासचिव राई ने दी। लेकिन मंगलवार को भी कोई वार्ता नहीं हो सकी। ‘सरकार की तरफ से चर्चा का प्रस्ताव आया था और समय मिलाकर बुलाने को कहा गया था, लेकिन अब तक कोई कॉल नहीं आया,’ उन्होंने कहा।

अर्ली इलेक्शन के कारण नेपाल सरकार और एन्फा के बीच मतभेद हुआ था, जिसके कारण नेपाली फुटबॉल को फिफा से निलंबित किया गया। वर्तमान नेतृत्व के कार्यकाल समाप्त होने से पहले चुनाव कराने की कोशिश की गई, जबकि राखेप ने नियमित महाधिवेशन करवाने की मांग की। अर्ली इलेक्शन संभव नहीं हो गया, लेकिन फिफा निलंबन से बचा नहीं पाया। 12 चैत्र से 1 जेठ तक राखेप के अधीन एन्फा निलंबित था और समाधान न होने के कारण 11 असार को फिर फिफा ने निलंबन लगा दिया।

निलंबन के कारण नेपाली महिला टीम ने फिफा सीरीज खो दी। अब पुरुष टीम साफ चैंपियनशिप गंवाने की स्थिति में है। यदि सितंबर के अंत तक निलंबन नहीं हटता है तो नेपाल साफ में हिस्सा नहीं ले पाएगा। सरकार और फिफा के बीच बातचीत हो रही होने के कारण एन्फा मौन था, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकलने पर उन्होंने अपनी स्थिति सार्वजनिक की है, यह जानकारी महासचिव राई ने दी।

‘सरकार और फिफा के बीच संवाद हो रहा है, लेकिन हमने अपनी राय सार्वजनिक करते समय इस बात का ख्याल रखा कि वहां हो रही बातचीत पर इसका असर न पड़े। इसलिए हमने संयम और धैर्य दिखाया। अब और देरी हानिकारक होती जा रही है। अगर हम न बोलें या सरकार अपनी स्थिति स्पष्ट न करे तो विलंब स्वाभाविक है,’ उन्होंने कहा।

पुरुष टीम साफ चैंपियनशिप गंवाने की स्थिति में है। सितंबर के अंत तक निलंबन हटाया नहीं गया तो नेपाल साफ में नहीं खेल पाएगा। विवाद की बजाय आंतरिक संवाद के जरिए समस्या का हल निकालने की दिशा में विचार किया जा रहा है, महासचिव राई ने बताया।

‘हम कुछ नहीं करके या अनिश्चितता में रखकर खिलाड़ियों के भविष्य के बारे में सोच नहीं सकते। इतनी अनिश्चितता में समस्या का समाधान नहीं होगा। देरी होने से देश का फुटबॉल डूब सकता है। व्यक्तिगत जीत या हार से ज्यादा महत्वपूर्ण है कि देश और देश के फुटबॉल को हार न हो, यह हमारी प्रमुख सोच है,’ उन्होंने कहा।

राष्ट्रीय खेलकूद परिषद के सदस्य सचिव रामचरित्र मेहता ने कहा कि एन्फा नेतृत्व का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, इसलिए वार्ता का कोई औचित्य नहीं बचा है। ‘एन्फा एक खेल संघ है, लेकिन पदाधिकारियों का कार्यकाल समाप्त है, तो किससे वार्ता करेंगे?’ उन्होंने सवाल उठाया।