
ट्रम्प ने इरान पर लगे प्रतिबंधों के हटाने की खबरों को गलत बताया
१३ असोज, काठमाडौं । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने उन अमेरिकी अधिकारियों के दावे को गलत ठहराया है जिनका कहना था कि इरान के आणविक कार्यक्रमों में ठोस और लचीले कदम उठाए जाने पर उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को हटाया जाएगा और रोके गए इरानी कोषों को जारी किया जाएगा। यह खबर उस समय आई है जब कतार और पाकिस्तान के मध्यस्थ न्यूयॉर्क में दोनों देशों के बीच तनाव समाधान के लिए कूटनीतिक प्रयासों को तेज कर रहे हैं। हालांकि, दोनों पक्षों के बीच अभी भी कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर व्यापक मतभेद मौजूद हैं।
इरान वार्ता का केंद्र होर्मुज जलमार्ग में आवागमन और अमेरिका द्वारा लगाए गए नाकाबंदी को हटाने पर केंद्रित है, जबकि ट्रम्प प्रशासन ने इरान को पहले आणविक समझौते पर सहमति जताने की शर्त लगाई है। ट्रम्प ने इरान के हालिया युद्धविराम प्रस्ताव को अस्वीकार किया है, हालांकि अप्रत्यक्ष वार्ता से कूटनीतिक सफलता की उम्मीद बनी है। मध्यस्थकर्ता न्यूयॉर्क में इरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से ऐसे प्रस्तावों पर चर्चा कर रहे हैं जिन्हें कतार ने प्रस्तुत किया है।
कतारी मध्यस्थकर्ता उसी बैठक में अमेरिकी अधिकारियों से भी मिलने का कार्यक्रम बना रहे हैं। वार्ता में शामिल अमेरिकी अधिकारी ने इस अप्रत्यक्ष वार्ता को ‘सकारात्मक और रचनात्मक’ बताया है और कहा है कि इरान ने आणविक मुद्दे पर कुछ लचीलेपन के संकेत दिए हैं। फिर भी, अभी भी बड़े मतभेद कायम हैं और यदि इरान स्पष्ट कदम नहीं उठाता है तो किसी समझौते की संभावना कम है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार होर्मुज जलमार्ग पर जहाजों की आवाजाही बढ़ रही है, जबकि अमेरिकी नाकाबंदी और प्रतिबंधों से इरान की स्थिति कमजोर हो रही है।
साथ ही, व्हाइट हाउस ने इरान के आश्वासनों पर संदेह जताया है। जुलाई में होर्मुज जलमार्ग पर व्यापारिक जहाजों पर किए गए हमलों के लिए अमेरिका ने इरान पर पिछले समझौते (एमओयू) का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। इसलिए इस बार अमेरिका इस बात की पुष्टि चाहता है कि इरान सचमुच गंभीर है और सिर्फ अपनी जटिल स्थिति से बाहर निकलने का प्रयास कर रहा है। इस रिपोर्ट के सामने आने के तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर इसका खंडन किया। ट्रम्प ने मीडिया रिपोर्ट को झूठा बताते हुए कहा है कि उन्होंने इरान को प्रतिबंधों की रिहाई या रोके गए कोष वापस करने का कोई प्रस्ताव नहीं दिया है।