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स्वास्थ्य बीमा नक्कली दाबी कम करने के लिए बोर्ड की नई योजना और वर्तमान स्थिति

स्वास्थ्य बीमा कार्यक्रम में हो रहे नक्कली दाबी कम करने के लिए स्वास्थ्य बीमा बोर्ड अपने बीमा कार्यक्रम को डिजिटल प्रणाली में अपग्रेड करने और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग की तैयारी कर रहा है। लंबे समय से अस्पतालों को भुगतान न हो पाने के कारण सेवा बाधित होने की स्थिति के बावजूद, बोर्ड के अनुसार सभी सम्बंधित स्वास्थ्य संस्थाएं सेवा प्रदान कर रही हैं। सरकार ने इसे उच्च प्राथमिकता देते हुए इस वर्ष स्वास्थ्य बीमा के लिए १५ अरब रुपये आवंटित किए हैं। इनमें से ११ अरब रुपये पिछले वर्ष के भुगतान में खर्च हो चुके हैं जबकि बाकी चार अरब रुपये से सावन तक लगभग चार से पांच महीने की सेवा प्रदान करने का अनुमान है।
हालांकि एक साइबर विशेषज्ञ ने इस तरह की डिजिटल प्रणाली लागू करने से पहले स्पष्ट कार्यप्रणाली तैयार करने पर जोर दिया है अन्यथा यह प्रणाली कई जोखिम पैदा कर सकती है। सरकार का उद्देश्य नागरिकों को सुलभ व गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान करना है, जिसके लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा कार्यक्रम स्वास्थ्य बीमा बोर्ड के माध्यम से संचालित है। इसके अंतर्गत १ से ५ सदस्यों वाले परिवार वार्षिक ३५०० रुपये का भुगतान कर एक लाख रुपये तक स्वास्थ्य सेवा प्राप्त कर सकते हैं। लेकिन दावों को प्रबंधित करने में समस्या दिखने पर सुधार की आवश्यकता जताई गई है।
बोर्ड ने बताया है कि वर्तमान में सक्रिय बीमितों की संख्या ७५ लाख है जबकि कुल आबद्ध सदस्य १ करोड़ ७ लाख तक पहुंच चुके हैं। सरकारी, सामुदायिक और निजी सहित ५०२ स्वास्थ्य संस्थाएं शामिल हैं। पिछले वर्ष भुगतान न होने से त्रिवेणी शिक्षण अस्पताल जैसे बड़े अस्पतालों को बीमा अंतर्गत सेवाएं बंद करनी पड़ी थीं। बोर्ड के सूचना अधिकारी विकेश मल्ल के अनुसार पिछले आर्थिक वर्ष के असार माह तक सभी स्वास्थ्य संस्थाओं के भुगतान पूरे हो चुके हैं और इस वर्ष के पहले माह के भुगतान प्रक्रिया के अन्तिम चरण में है।
बोर्ड के अनुसार १५ अरब रुपये में से ११ अरब भुगतान में खर्च हो चुका है और चार अरब रुपये शेष हैं। बीमा से होने वाली आय लगभग ३ से ४ अरब रुपये आने का अनुमान है। स्वास्थ्य बीमा में उत्पन्न समस्या का समाधान कैसे हो रहा है? सुधारों में मुख्य रूप से डिजिटल प्रणाली अपनाना बताया गया है। बीमितों की पहचान के लिए १६ वर्ष से ऊपर सभी को राष्ट्रीय परिचय पत्र अनिवार्य करने की तैयारी हो रही है, जो पुस १ से लागू होगा। बोर्ड के अध्यक्ष डा. सुवास प्याकुरेल के अनुसार इससे अनावश्यक दबाव कम होगा। प्रारंभ में स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ समझौते के तहत नर्सिंग स्टाफ के कार्य समय बढ़ाकर और आईपीडी-ओपीडी सेवाओं को वर्गीकृत कर ७५ हजार तथा २५ हजार तक की सेवा देकर आर्थिक बोझ कम किया गया है।
बोर्ड अध्यक्ष प्याकुरेल ने कहा, “बीमित, बीमा कंपनी और स्वास्थ्य संस्थाओं को जोड़ने तथा दाबी प्रक्रिया प्रबंधन के लिए एक मजबूत डिजिटल फ्रेमवर्क होना आवश्यक है। तभी प्रक्रिया सुगम होगी और अत्यधिक दाबी की समस्या कम होगी। इसलिए डिजिटल प्रणाली को प्राथमिकता दी जा रही है।” “जहां डिजिटल प्रणाली का अधिक उपयोग होता है, वहां प्रक्रिया सहज होती है, इस अध्ययन के आधार पर हमने एआई के उपयोग का निर्णय लिया है।” उन्होंने बताया कि परीक्षण चल रहा है और नक्कली दाबी जांच के लिए एआई का उपयोग होगा।
पहले के डिजिटल सिस्टम को सुधारते हुए विशेष रूप से नक्कली दाबी कम करने की योजना बनाई जा रही है। “नक्कली दाबी जांच के लिए नेपाली सूचना प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ द्वारा निर्मित एआई का व्यापक उपयोग किया जाएगा,” अध्यक्ष प्याकुरेल ने कहा। “तीन से छ महीने के भीतर हम अस्पताल से सीधे जुड़कर सभी डेटा सार्वजनिक कर सकेंगे और यदि मरीज द्वारा न कराया गया सीटी स्कैन पाया गया तो उसे चिन्हित करेंगे।” इसके लिए सर्वर अपडेट किए जा रहे हैं और साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करने पर खास ध्यान दिया जा रहा है।
डिजिटल प्रणाली अपनाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? कोई भी डिजिटल प्रणाली लागू करते समय साइबर सुरक्षा, डिजिटल विश्वास, पारदर्शिता और जवाबदेही को ध्यान में रखना आवश्यक है और इसके लिए शासन व्यवस्था (गवर्नेंस फ्रेमवर्क) जरूरी है, ऐसा साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ कुमार पुडासैनी ने बताया। वे ग्लोबल साइबर सुरक्षा समुदाय फोरम के संस्थापक अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने कहा, “गवर्नेंस फ्रेमवर्क बनाए बिना डिजिटल प्रणाली लागू करने में जोखिम होता है।” उन्होंने आगे कहा, “अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार सुरक्षा बाई डिजाइन की अवधारणा है, यानी काम शुरू करते समय सुरक्षा का ध्यान रखना होता है, जैसे घर बनाते समय भूकंप सुरक्षा का ध्यान रखा जाता है, उसी तरह सॉफ्टवेयर प्रणाली बनानी चाहिए।”
स्वास्थ्य बीमा कार्यक्रम में कई हितधारक जुड़े होने के कारण सप्लाई चेन में चुनौतियां आई हैं। “यह एक बड़ा सप्लाई चेन है, जिसे जोखिम कम करने के लिए पहले प्रणाली का परीक्षण जरूरी है और सुरक्षा बाई डिजाइन के सिद्धांतों का पालन करना होगा,” उन्होंने कहा।