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सांस्कृतिक पर्यटन को प्रवर्द्धन हेतु नेपाल पर्यटन बोर्ड और सांस्कृतिक संस्थान के बीच समझौता

नेपाल पर्यटन बोर्ड की दिगो पर्यटन परियोजना और सांस्कृतिक संस्थान के बीच अपि–साइपाल तथा कञ्चनजंघा पदमार्गों में सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु एक समझौता हुआ है। इस समझौते के अनुसार २०८३ साउन से पुस १४ तक हिमाली गंतव्यों में सांस्कृतिक उत्पादन का विकास करते हुए स्थानीय समुदायों को आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम चलाए जाएंगे। परियोजना के राष्ट्रीय निर्देशक हिक्मतसिंह ऐर ने कहा कि नेपाल के हिमालयी पदमार्ग केवल प्राकृतिक सौंदर्य ही नहीं बल्कि जीवंत संस्कृति और मौलिक पहचान के केंद्र भी हैं। १३ साउन, काठमांडू।

नेपाल पर्यटन बोर्ड और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के सहयोग से संचालित दिगो पर्यटन परियोजना (एसटीपी) तथा सांस्कृतिक संस्थान (राष्ट्रीय नाचघर) के बीच अपि–साइपाल और कञ्चनजंघा पदमार्गों को केंद्रित करते हुए सांस्कृतिक प्रदर्शन पैकेज विकास और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने संबंधी समझौता हुआ है। पर्यटन बोर्ड में बुधवार को बोर्ड के निमित्त कार्यकारी प्रमुख एवं एसटीपी राष्ट्रीय कार्यक्रम निर्देशक हिक्मतसिंह ऐर और सांस्कृतिक संस्थान की ओर से महाप्रबंधक किरणबाबु पुन ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।

इस समझौते के अनुसार दोनों संस्थाएं सांस्कृतिक धरोहरों को पर्यटन उत्पाद के रूप में विकसित करते हुए दूरदराज के हिमालयी गंतव्यों में पर्यटक के ठहराव की अवधि बढ़ाने और स्थानीय समुदायों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम शुरू करेंगी। समझौते की समय सीमा २०८३ साउन से २०८३ पुस १४ निर्धारित की गई है। परियोजना के अंतर्गत ‘अपि–साइपाल एवं कञ्चनजंघा पदमार्ग के लिए सांस्कृतिक प्रदर्शन पैकेज विकास’ कार्यक्रम सांस्कृतिक संस्थान साझेदार के रूप में चलाएगा।

समझौते के तहत अपि–साइपाल और कञ्चनजंघा क्षेत्रों में सांस्कृतिक पैकेज विकास के लिए प्रशिक्षण, सांस्कृतिक कलाकारों एवं स्रोत व्यक्तियों का परिचालन, वाद्य सामग्री व साउंड सिस्टम का प्रबंध, नमूना सांस्कृतिक प्रस्तुति, सांस्कृतिक पैकेज प्रदर्शनी और स्थानीय सांस्कृतिक प्रस्तुति का विकास किया जाएगा। इसके अतिरिक्त जनकपुर, मनास्लु और लुम्बिनी में भी सांस्कृतिक प्रदर्शन पैकेज विकास कार्यक्रम संचालित किया जाएगा। परियोजना में विभिन्न क्षमताओं वाले व्यक्तियों के लिए गायन प्रशिक्षण, प्रतिभा प्रस्तुति और रिकॉर्डिंग कार्यक्रम भी शामिल हैं।

साथ ही अपि, मनास्लु और कञ्चनजंघा क्षेत्रों के सांस्कृतिक समूहों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम चलाकर स्थानीय कला, संस्कृति और परंपराओं को पर्यटन से जोड़ने की योजना बनाई गई है। समझौते के बाद दिगो पर्यटन परियोजना के राष्ट्रीय परियोजना निर्देशक हिक्मतसिंह ऐर ने कहा कि नेपाल के हिमालयी पदमार्ग केवल प्राकृतिक सौंदर्य स्थल नहीं, बल्कि जीवंत संस्कृति और मौलिक पहचान के प्रमुख केंद्र हैं। उनके अनुसार परियोजना सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के साथ स्थानीय समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए पर्यटन उत्पादों के विविधीकरण के माध्यम से नेपाल के नए गंतव्यों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने में सहायक होगी।