Skip to main content

सांसद परियार ने कहा: सरकार शैक्षिक परामर्श क्षेत्र में नियमन करना चाहती है

रास्वपाका सचेतक प्रकाशचंद्र परियार ने कहा है कि सरकार शैक्षिक परामर्श क्षेत्र को नियंत्रण में नहीं, बल्कि मर्यादित बनाने के लिए नियमन करना चाहती है। उन्होंने शैक्षिक परामर्श व्यवसायियों को मानव तस्करी के एजेंट के रूप में देखने को गलत बताया और स्पष्ट किया कि नई नियमावली उनके कर्तव्यों को और अधिक जिम्मेदार बनाएगी। परियार ने कहा कि विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों के माध्यम से भले ही पैसा देश से बाहर जा रहा हो, लेकिन इसके साथ-साथ ज्ञान, कौशल और रेमिटेंस देश के भीतर आ रहे हैं। उन्होंने व्यवसायियों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्धता जताई। १८ साउन, काठमाडौं।

राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) के सचेतक प्रकाशचंद्र परियार ने शैक्षिक परामर्श क्षेत्र को सरकार द्वारा नियंत्रित करने की बजाय नियमन करने की स्पष्ट बात करते हुए सोमवार को काठमाडौं में आयोजित ’शैक्षिक परामर्श, भाषा शिक्षण तथा तयारी कक्षा (सञ्चालन र व्यवस्थापन) नियमावली, २०७३’ के कार्यान्वयन, चुनौतियों और सहयोग की संभावनाओं पर हुई चर्चा में यह बात कही। सचेतक परियार ने परामर्श व्यवसायियों को मानव तस्करी के एजेंट के रूप में दिखाना गलत बताया और कहा कि नई व्यवस्था व्यवसायियों को अधिक जिम्मेदार बनाएगी और उनके राज्य के प्रति योगदान को स्थापित करेगी।

विदेश अध्ययन के लिए जाने वाले छात्रों के माध्यम से बड़ी रकम के देश से बाहर निकलने की बात पर प्रतिक्रिया देते हुए परियार ने कहा कि इसके सकारात्मक पक्षों को भी ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘सरकार व्यवसायियों को नियंत्रित करने या दुश्मन के रूप में देखने की कोशिश नहीं कर रही है। यह क्षेत्र को नियमन करके मर्यादित बनाने और राज्य की जिम्मेदारी में लाने का प्रयास है। १ खरब ४० अरब रुपये बाहर गए यह केवल एक पक्ष है, लेकिन इसके आधार पर खरबों की रेमिटेंस, ज्ञान, कौशल और उच्च शिक्षा की डिग्री भी देश के भीतर आई है।’ कर वृद्धि के कारण छात्रों के लिए पढ़ाई महंगी हो सकती है इस बहस के बावजूद, उन्हें लगता है कि इससे व्यवसायी और अधिक जिम्मेवार बनेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि व्यवसायियों को जो समस्याएं और शिकायतें हैं, उन्हें सरकार संबोधित करने के लिए प्रतिबद्ध है। आवश्यकतानुसार संविधान संशोधन की बहस चल रही है और कानूनी गलत व्याख्याओं को सुधारते हुए आगे बढ़ना चाहिए।