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सब्ज़ियों की कीमतों ने बढ़ाई उपभोक्ताओं की मुश्किलें, 5 गुना तक हुई महंगी

समाचार सारांश

  • मौसम के कारण एक महीने में सब्ज़ियों के थोक दामों में 400 प्रतिशत तक वृद्धि हुई, जिससे आम उपभोक्ता प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हैं।
  • कालीमाटी सब्ज़ी एवं फल बाजार विकास समिति के अनुसार खेतों में उत्पादन घटने की वजह से सब्ज़ियों के दाम असामान्य रूप से बढ़े हैं।
  • बाजार में नई पैदावार आने तक दाम घटने की संभावना नहीं है, और मौसम प्रतिकूल रहने पर मूल्य और बढ़ने की चेतावनी दी गई है।

20 साउन, काठमाडौं । मध्य-वर्षा के मौसम में उपभोक्ताओं की रसोई महंगी हो गई है। मजदूरी और आय स्थिर रहने के बावजूद दैनिक उपभोग की सब्ज़ियों के एक महीने में दाम 400 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं, जिससे आम जनता पर भारी प्रभाव पड़ा है।

कालीमाटी सब्ज़ी एवं फल बाजार विकास समिति के आंकड़ों के अनुसार असार महीने के मुकाबले साउन में सब्ज़ियों के दाम असामान्य रूप से बढ़े हैं। 20 असार और 20 साउन के औसत दामों की तुलना से पता चलता है कि अधिकांश हरी सब्ज़ियां, साग और मिर्च के दामों ने आम जनजीवन पर भारी दबाव डाला है।

बाजार के व्यापारी बारिश और बाढ़ के बहाने बनाते हैं। सब्ज़ियों जैसी ज़रूरी वस्तुओं पर इस तरह के बहाने से उपभोक्ता ठगे जा रहे हैं लेकिन सरकार मौन है, इसी कारण उपभोक्ताओं की शिकायतें बढ़ रही हैं।

औद्योगिक, वाणिज्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग दैनिक बाजार निगरानी करता है, लेकिन व्यापारी बताते हैं कि वास्तविक समस्या को हल करने के बजाय केवल औपचारिकताएँ पूरी की जा रही हैं।

मौसमी सब्ज़ियों में से, एक महीने पहले 20 असार को प्रति किलो औसतन 11 रुपये में मिलने वाली हरी फरसी (डल्लो) का मूल्य 20 साउन को 55 रुपये पहुंच गया है, जो लगभग 5 गुना वृद्धि है। खुदरा में यह कीमत 90 से 120 रुपये तक पहुंच गई है।

इसी तरह हरी मिर्च भी खरीदना मुश्किल हो गया है। प्रति किलो 22.50 रुपये की हरी मिर्च (बुलेट) 5 गुना बढ़कर 96 रुपये पहुंच गई है। एक महीने में यह कीमत लगभग 74 रुपये बढ़ी है।

लंबी हरी मिर्च का दाम 30 रुपये से बढ़कर 96 रुपये हो गया है जबकि माछे मिर्च 2 गुना बढ़कर 75 रुपये पहुंचे हैं। ये सभी मिर्चें उपभोक्ता 150 से 170 रुपये तक देकर खरीद रहे हैं।

साग-सब्ज़ियां खाने योग्य नहीं रह गईं

स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माने जाने वाली हरी साग-सब्जी अब गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों की पहुंच से बाहर हो गई है। आंकड़ों के अनुसार पालक की कीमत सबसे अधिक बढ़ी है। असार में 55 रुपये प्रति किलो था पालक, जो साउन में लगभग 4.5 गुना बढ़कर 233.33 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है।

इसी प्रकार, 35 रुपये प्रति किलो के राय साग के दाम 4 गुना बढ़कर 133.33 रुपये तक चले गए हैं, जबकि 45 रुपये प्रति किलो वाली तोरी साग लगभाग डेढ़ गुना बढ़कर 100 रुपये पहुंची है।

आलू का औसत मूल्य 35 से 49 रुपये प्रति किलो के बीच है, जबकि प्याज 55 रुपये तक पहुंच चुका है। असार में आलू 29 से 39 रुपये के बीच और प्याज 53 रुपये पर खरीदा गया था।

हरी सब्ज़ियों के दाम ने भी उपभोक्ताओं को निराश किया है। 20 असार को 30.83 रुपये में मिलने वाली मकैबोड़ी अब लगभग 3.5 गुना बढ़कर 95 रुपये हो गई है। लाम्चो भन्टा भी 14.25 रुपये से 3 गुना बढ़कर 45 रुपये पहुंच गया है।

ब्रोकली के दाम भी 3 गुना बढ़े हैं। प्रति किलो 43 रुपये की ब्रोकली अब 125 रुपये तक पहुंच गई है। स्थानीय फूलगोभी 38 से 86, टाटे सिमी 45 से 95, तथा तनेबोड़ी 27 से 55 रुपये तक पहुंच गई हैं। उपभोक्ताओं को ये सब्ज़ियां खरीदने के लिए 100 से 200 रुपये ज्यादा खर्च करने पड़ रहे हैं।

थोक और खुदरा दरों में बड़ा अंतर

थोक और खुदरा बाजार में सब्ज़ियों के दामों की तुलना करें तो अंतर स्पष्ट दिखाई देता है। थोक कीमत 20-25 रुपये तक होती है, जबकि खुदरा दुकानों में दाम प्रति किलो लगभग 100 रुपये तक पहुंच रहे हैं। थोक की कीमतें बढ़ने के बाद खुदरा व्यापारी मनमाने दाम लगाकर उपभोक्ताओं को ठगे जाने का सिलसिला नॉर्मल हो चुका है।

शंखमुल की सरस्वती पौडेल के अनुसार, ‘खुदरा दुकानदारों से दाम बढ़ने का कारण पूछना मुश्किल है क्योंकि वे कहते हैं कि थोक की कीमतें ही बढ़ गई हैं, तो हम कैसे सस्ता बेचें? एक हफ्ते पहले 25-30 रुपये वाला भिंडी अब 130 से 150 रुपये तक पहुंच गया है, ऐसे दामों पर खाना संभव नहीं।’

सब्ज़ी औसत मूल्य 20 असार (रुपये) औसत मूल्य 20 साउन (रुपये) वृद्धि (रुपये)
हरी फरसी (डल्लो) 11 55 44
हरी मिर्च बुलेट 22 96 74
लाम्बा भन्टा 14 45 31
मकैबोड़ी 30 95 65
ब्रोकली 43 125 82
तनेबोड़ी 27 55 28
भिंडी 25 47 22
करेला 26 45 19
घिरौंला 24 35 11
लौकी 27 45 18

खुदरा व्यापारी अपने तर्क देते हैं। शंखमुल के एक सब्ज़ी व्यापारी का कहना है कि उपभोक्ता उनके कष्टों को समझे बिना दोषारोपण करते हैं। वे कहते हैं, ‘हम कालीमाटी, कोटेश्वर जैसे बाजारों के दामों के अनुसार ही बेचते हैं। मैंने खरीद मूल्य में थोड़ा लाभ रखते हुए बेचा है। ज्यादा महंगा होगा तो उपभोक्ता नहीं खरीदेंगे, जिससे सब्ज़ियां खराब होकर नष्ट हो जाएंगी। सब्ज़ी बेचना घाटे का सौदा है।’

उन्होंने यह भी कहा कि दाम बढ़ने के कारण उचित दाम पर अधिक मात्रा में खरीदकर बेचना मुश्किल हो गया है।

सब्ज़ियों के दाम ज़्यादा बढ़े नहीं

थोक व्यापारी दावा करते हैं कि उनमें से कई सब्ज़ियों के दाम ज़्यादा नहीं बढ़े हैं। नेपाल फलफूल और सब्ज़ी व्यवसायी महासंघ के अध्यक्ष भरतप्रसाद खतिवड़ा ने कहा है कि बाजार में सब्ज़ी की आपूर्ति सामान्य है और दाम स्थिर हैं।

अध्यक्ष खतिवड़ा कहते हैं, ‘सब्ज़िया निरंतर आती हैं, कमी नहीं है, बाजार ठीकठाक है, ज्यादा महँगी नहीं हुई हैं। वर्तमान स्थिति सामान्य है, ऐसा नहीं है कि सब्ज़ियों की कमी हो।’

उन्होंने बारिश और पहाड़ी कटाव के चलते आपूर्ति में बाधा के दावों को भी खारिज किया और कहा, ‘पानी से रास्ते बंद होने की कोई सूचना नहीं मिली है, बाजार अच्छा है।’

ढुलाई और मुनाफे के बहाने खुदरा व्यापारी मनमाने दाम सेट करके उपभोक्ताओं की पीड़ा बढ़ा रहे हैं, ऐसी संभावना उन्होंने जताई।

नई पैदावार नहीं आने तक दाम नहीं घटेंगे

कालीमाटी फलफूल एवं सब्ज़ी बाजार विकास समिति ने बताया कि खेतों में सब्ज़ी की पैदावार कम होने के कारण बाजार में आपूर्ति कम हुई है, जिससे दाम बढ़े हैं।

समिति के सूचना अधिकारी विनय श्रेष्ठ ने कहा, ‘बाजार में रोजाना 600 से 700 टन तक सब्ज़ियां आ रही हैं। लेकिन वर्षा के मौसम में दाम बढ़ने की प्रवृत्ति होती है। फिलहाल खेतों में पैदावार कम है।’

कालीमाटी सब्ज़ी बाजार

श्रेष्ठ कहते हैं, ‘सभी सब्ज़ियों के दाम नहीं बढ़े हैं। कुछ हरी सब्ज़ियों के दाम जरूर बढ़े हैं, लेकिन कुछ सब्ज़ियां अभी भी सस्ती हैं। थोक में टमाटर और मूली जैसे सब्ज़ियों के दाम कम हैं, जबकि आलू और प्याज के दाम स्थिर हैं। सिमी, बोड़ी, लौकी, घिरौंला जैसे सब्ज़ियों के दाम थोड़े ऊपर गए हैं।’

मूल्य अभी और बढ़ सकता है

समिति ने बताया कि बाजार में नई पैदावार न आने तक दाम घटने की संभावना नहीं है, और मौसम परिस्थिति प्रतिकूल बनी रहने पर दाम और बढ़ सकते हैं। सूचना अधिकारी श्रेष्ठ ने कहा, ‘नई पैदावार नहीं आएगी तो दाम नहीं घटेंगे, और मौसम प्रतिकूल रहा तो बढ़ भी सकते हैं।’

सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि सब्ज़ियों के दाम असामान्य रूप से बढ़े हैं, जबकि थोक व्यापारी दावा करते हैं कि ‘मूल्य सामान्य है’, इसलिए वे आवश्यक से अलग बातें कर रहे हैं। इस बढ़त का सीधा असर दैनिक मजदूरी करने वाले मध्यम वर्ग और सीमित आय वाले आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है।

संबंधित निकायों द्वारा प्रभावी बाजार निगरानी न किए जाने से बिचौलिए और खुदरा व्यापारी किसानों को उचित मूल्य नहीं देने तथा उपभोक्ताओं की रसोई महंगी होने का खतरा बना हुआ है।