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३० वर्षों पुराना पशु वधशाला एवं मासु जांच कानून लागू करने का नया निर्णय, क्या है इसमें?

खसी घास चर रही है, पृष्ठभूमि में बस्ती नजर आ रही है

तस्बीर स्रोत, Getty Images

तस्बीर की कैप्शन, मासु उपयोग को लेकर नेपाली जनता की अपनी विशिष्ट आदतें हैं

प्रधानमंत्री वरेन्द्र शाह ‘बालेन’, जो स्वयं पूर्व में काठमांडू महानगरपालिका के प्रमुख रह चुके हैं, के कारण तीन दशक पुराने पशु वधशाला और मासु जांच कानून को लागू करते समय स्थानीय निकायों द्वारा अनुभव की जा रही समस्याओं को समझना आवश्यक बताया गया है।

उनकी अध्यक्षता में बुधवार को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में “पशु वधशाला और मासु जांच कानून, २०५५ को चरणबद्ध तरीके से नेपाल भर में लागू करने” का निर्णय लिया गया है।

हालांकि, इस कानून का पालन कराए जाने के लिए पर्याप्त पूर्वाधार के निर्माण के साथ-साथ आम नेपाली उपभोक्ताओं के मनोवृत्ति में भी बदलाव आवश्यक बताया गया है।

उपभोक्ताओं के लिए ‘खुशी की खबर’

बुटवल उपमहानगरपालिका की वधशाला

तस्बीर स्रोत, Krishna Prasad Poudel

निर्धारित वधशालाओं में ही पशुओं को स्वास्थ्य जांच के बाद ही वध करने और उस मासु की बिक्री वितरण की अनुमति इस कानून में दी गई है।

स्वस्थ मासु की खपत के लिए इस कानून का पूर्ण पालन आवश्यक बताया गया है उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ताओं द्वारा।