
सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच त्रिपक्षीय रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर
सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने मक्का शहर में एक महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के अनुसार, यदि किसी एक सदस्य देश पर सशस्त्र हमला होता है तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। यह समझौता तीनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत बनाकर सामूहिक सुरक्षा क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य रखता है। २२ साउन, काठमांडू।
सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के नेताओं ने शुक्रवार को मक्का में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की विज्ञप्ति के अनुसार, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैय्यब एर्दोगान और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ इस समझौते के हस्ताक्षरकर्ता रहे। इस समझौते के तहत, किसी भी सदस्य देश पर सशस्त्र आक्रमण को तीनों देशों पर आक्रमण माना जाएगा।
पहले सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच रक्षा समझदारी थी, जिसके अनुसार दोनों देशों में से किसी एक पर हमला होने पर उसे अपने खिलाफ हमला माना जाता था। अब इस समझौते में तुर्की भी शामिल हो गया है। सऊदी अरब के पास वित्तीय शक्ति है, पाकिस्तान के पास परमाणु क्षमता, बैलिस्टिक मिसाइल और बलप्रदाय है। तुर्की ने भी अपने सैन्य अनुभव के साथ उन्नत रक्षा उद्योग स्थापित किया है।
समझौते के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा, “यह समझौता क्षेत्रीय और क्षेत्रीय सीमाओं के बाहर शांति, सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देगा।” यह तीनों देशों के बीच सामूहिक सुरक्षा को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दर्शाता है। समझौते का उद्देश्य किसी भी आक्रामक कार्रवाई के खिलाफ सामूहिक प्रतिरोध क्षमता को सशक्त बनाना है।