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‘खेत में होने के समय भारत की जेल में बंद रहा’

सरलाही बलरा के दो किसान, सुरेशप्रसाद सिंह और नागेन्द्रप्रसाद सिंह, 38 दिन भारत की जेल में बिताने के बाद शुक्रवार को रिहा हुए हैं। सीतामढ़ी जिले की व्यवहारिक अदालत ने उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया, जिसके बाद वे मुक्त हुए। किसानों ने बताया कि नेपाल में खाद की कमी के कारण उन्हें भारतीय बाजार जाना पड़ा और झूठे मामले में फंसाया गया।

घर लौटते ही सुरेशप्रसाद से संक्षिप्त बातचीत में उन्होंने कहा, “स्वास्थ्य स्थिति कैसी है? ठीक है।” उन्होंने बताया कि असार 17 की सुबह वे सीमा पार के बाजार गए थे खाद खरीदने। उन्होंने कहा, “हम खाद लेने गए थे, लेकिन एसएसबी के घुमैया ने गिरफ्तार किया।” उन्होंने 45 किलो का एक बोरा यूरिया लाया था और एसएसबी ने दो बोरे यूरिया और छह बोरे डीएपी खाद जब्त करने का दावा किया।

सुरेशप्रसाद ने कहा, “हम आधार कार्ड वाले भारत के नागरिकों के साथ मिलकर खाद खरीद रहे थे।” उन्होंने जेल में बुरा व्यवहार और भोजन की उचित व्यवस्था न होने की बात कही। उन्होंने कहा, “मैं खेती कर के रोपाई के लिए तैयार कर चुका था, उसी दौरान मुझे गिरफ्तार कर लिया गया।” उन्होंने साथ ही सरकार से खाद की समस्या का समाधान करने का आग्रह किया।