
बालेन सरकार को संविधान जनादेश और सुशासन की जिम्मेदारी निभाएगा
समाचार सारांश
समीक्षा के उपरांत प्रकाशित।
- रास्वपा वरिष्ठ नेता बालेन शाह आज सिंहदरबार में प्रवेश कर नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं।
- बालेन के पास दो-तिहाई के करीब बहुमत है और उन्होंने संविधान की भावना के अनुसार सुशासन व विकास की नींव मजबूत करने की जिम्मेदारी संभाली है।
- रास्वपा अध्यक्ष रवि लामिछाने ने बालेन को वरिष्ठ नेता और भावी प्रधानमंत्री के तौर पर उभारा था, दोनों के बीच सहयोग बनाए रखने की चुनौती है।
नेपाल के इतिहास में सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्रियों में से एक रास्वपा वरिष्ठ नेता बालेन शाह आज सिंहदरबार में प्रवेश कर रहे हैं। देश की प्रमुख कार्यकारी कुर्सी और उनकी व्यक्तिगत छवि इतनी नजदीक होने के कारण जनता की उनसे बड़ी उम्मीदें हैं।
21 फागुन के चुनाव से प्राप्त देश के ऐतिहासिक जनादेश और पुराने बड़े संघर्ष तथा आंदोलनों द्वारा सुनिश्चित संविधान के जनादेश को समन्वित करते हुए आगे बढ़ना नए प्रधानमंत्री बालेन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी।
उनके पास दो-तिहाई के करीब बहुमत है, जिसके कारण उन्हें संविधान की मूल भावना के अनुरूप सुशासन और विकास के बुनियादी स्तंभ स्थापित करने की जवाबदेही सजग होकर निभानी होगी। यह संविधान न केवल पिछले नेताओं के कठोर प्रभावों से मुक्त है जिन्हें चुनाव ने पराजित किया है, बल्कि उन लोगों की परछाई भी दिखाती है जो लंबे समय तक बहिष्कृत और वंचित रहे।
मजबूत जनादेश संघीय संविधान की समावेशी भावना को उजागर करता है। चुनाव का मतादेश सुशासन, रोजगार और आर्थिक अवसर सृजन की आवश्यकता को याद दिलाता है। रास्वपा के घोषणा पत्र की प्रतिज्ञाएँ आने वाले दिनों में किस तरह प्रभावी होती हैं, यह सभी की निगाहों में है। संविधान और चुनाव जनादेश दोनों का सम्मान बालेन सरकार द्वारा निरंतर आत्मसात करना आवश्यक है।
संघीय लोकतांत्रिक गणतंत्र नेपाल के संविधान की भरोसेमंद कार्यान्वयन और समयानुकूल संशोधन आवश्यक है, जो इस समय विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो गया है।
एक कलाकार के रूप में बालेन ने विगत में वंचित वर्गों के पक्ष में गीत और कविताएं रची हैं। जेनजी आंदोलन के दौरान भी उन्हें प्रधानमंत्री के रूप में देखा गया था, पर वे उस समय मेयर के पद पर होने के कारण नेतृत्व लेने में अनिच्छुक थे। इसके बाद पूर्व प्रधान न्यायाधीश सुशीला कार्की प्रधानमंत्री बनी थीं।
संविधान के कार्यान्वयन में संदेह और विवाद भी रहे। उस समय विश्लेषण यह था कि शक्तिशाली नागरिक सरकार का गठन और चुनाव ही इसे सुरक्षित कर सकते हैं।
चुनावों के बाद वे आलोचक भी संसद में आए हैं और शपथ ग्रहण के बाद संविधान को प्रभावी बनाने के लिए फिर से मजबूत किया गया है। संविधान की रक्षा और उन्नयन प्रतिनिधि सभा और संघीय संसद का मुख्य दायित्व होगा।
बालेन ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान नेपाल के विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों का भ्रमण कर सम्मान प्रकट किया। मधेशी समुदाय से पहले प्रधानमंत्री बनने के नाते जनकपुर में उन्होंने सुंदर मैथिली भाषण दिया। उन्हें संघीय संविधान की भावना के अनुरूप कार्य करने की उम्मीद है।
जिन समूहों को आवाज़हीन माना जाता था, उन तक संगीत और शब्दों के माध्यम से आवाज़ पहुंचाने वाले ये नेता अब संविधान और कानून के मुख्य कार्यान्वयन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उनके प्रभावी कार्यान्वयन को लेकर सभी की उत्सुकता और आशाएं हैं।
प्रधानमंत्री और मंत्रियों की नियुक्ति व शपथ ग्रहण की तैयारियां आज पूरी हो रही हैं। इसमें योग्य और जिम्मेदार व्यक्तियों को स्थान मिलने की उम्मीद है। युवा देश में नई जेनजी विद्रोह की आकांक्षाओं को पूरा करने वाली चुस्त और सक्षम मंत्रिमंडल बनने की शुभकामनाएं।
बालेन ने औपचारिक और अनौपचारिक दोनों तरीकों से जनता के साथ संवाद कायम किया है। वे सेलिब्रिटी प्रतिभा वाले हैं और सार्वजनिक जीवन में कम बोलने की शैली अपनाते दिखे हैं। लेकिन अब प्रधानमंत्री के रूप में उन्हें जनता के प्रति जवाबदेही और संवाद के लिए नियमित प्रेस ब्रिफिंग एवं संसद में उपस्थित होने जैसे माध्यमों को अपनाना होगा।
रास्वपा अध्यक्ष रवि लामिछाने के साथ सहयोग वर्तमान में महत्वपूर्ण है। जब वे काठमांडू के मेयर थे, तो बालेन का नारा था: “आज तक दलों ने किया, अब बदलने वाले करें।” रवि ने अपनी लोकप्रियता का उपयोग कर रास्वपा को संसद की चौथी शक्ति बनाया था। बालेन भी इस गठबंधन में शामिल हैं।
उम्मीदवार चयन के दौरान रवि लामिछाने ने बालेन समेत अप्रयुक्त नेताओं को वरिष्ठ नेता और भावी प्रधानमंत्री के रूप में परियोजना किया था। अब इन दोनों के बीच सहयोग बनाए रखने की चुनौती है। इससे राजनीतिक व्यवहारिकता और पुरानी गलत आदतों को सुलझाने में जनता को उम्मीद मिली है।
अतीत में शीर्ष नेताओं के स्वार्थ संघर्ष और व्यक्तित्व द्वंद्व ने राजनीति और देश के भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव डाला है। केपी शर्मा ओली और पुष्पकमल दाहाल के टकराव से लेकर गिरिजाप्रसाद कोइराला और शेरबहादुर देउवाओं के विवादों ने राष्ट्रीय राजनीति को ध्रुवीकृत किया। इस बार ऐसा नहीं हो यह उम्मीद है। नए पीढ़ी के नेता रवि और बालेन इस स्वार्थ प्रबंधन में सफलता हासिल करेंगे।
अंत में यह ज़ोर देना आवश्यक है कि संविधान किसी भी नेता का नहीं, बल्कि नागरिकों का है, जिसका प्रतिनिधित्व बालेन प्रतिनिधि सभा में शपथ ग्रहण करके कर रहे हैं। उनके द्वारा जारी “जय महाकाली” गीत के शब्द और वीडियो ने समीक्षकों में बहस को जन्म दिया है, जिसे एक कलाकार की अभिव्यक्ति स्वतंत्रता के रूप में सम्मानित किया जाना चाहिए। किसी भी पार्टी या सरकार के लिए गीत नीति नहीं होता, बयाना और घोषणापत्र प्रमुख होते हैं। संघीय संविधान आधुनिक नेपाल की साझा आधारशिला है, जिसे सभी को स्वीकार करना आवश्यक है।
नए प्रधानमंत्री बालेन शाह और रास्वपा को पांच वर्ष के जनादेश के साथ बधाई। यह जिम्मेदारी उन्हें और अधिक विनम्र और जवाबदेह बनाएगी, ऐसी आशा है। शासक नहीं, सेवक सरकार की आकांक्षा पूरी हो। सरकार को जनता द्वारा मिले बड़े जनमत के फलस्वरूप लगातार सुझावों और जागरूकता की आवश्यकता बनी रहे, यह कामना की जाती है। नेपाली पाठकों के विश्वासपात्र मुख्य समाचार माध्यम के रूप में यह दायित्व निरंतर निभाएगा।