
बोधगया विवाद: ‘बुद्ध ने जहाँ आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त किया, वहां हिन्दू क्या कर रहे हैं?’
भारत के बिहार राज्य में स्थित महाबोधि मंदिर विश्वभर के बौद्ध धर्मावलम्बियों के लिए एक पवित्र तीर्थस्थल माना जाता है। बौद्ध शिक्षाओं के अनुसार बुद्ध ने यहीं से आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त किया था और इसी स्थान से बौद्ध धर्म की शुरुआत हुई थी। लेकिन आज बौद्धमार्गी लोगों के इस पवित्र स्थल को विवाद का कारण बना दिया गया है। मंदिर का प्रबंधन हिन्दू बहुलता वाली समिति द्वारा किया जाता है। भारत के बौद्ध धर्मावलम्बी चाहते हैं कि मंदिर का प्रशासन पूरी तरह से उनके हाथ में हो। वहीं दूसरी ओर हिन्दू लोग भी बुद्ध के महाबोधि मंदिर में अपना अधिकार होने का दावा कर रहे हैं। पूरे देश के हजारों बौद्धमार्गी इस विषय पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। महाबोधि मंदिर के निकट कई लोग पिछले डेढ़ साल से धरने पर बैठे हैं। वे बोधगया अधिनियम (BTA) को रद्द करने और मंदिर को पूर्ण प्रशासनिक अधिकार देने की मांग कर रहे हैं।
सन् 1949 में बनाए गए अधिनियम के अनुसार महाबोधि मंदिर के प्रबंधन के लिए एक समिति गठित की गई थी। इस समिति में चार बौद्ध और चार हिन्दू धर्मावलम्बी सदस्य होते हैं। समिति का नेतृत्व जिला मजिस्ट्रेट करते हैं, जो आम तौर पर हिन्दू धर्मावलम्बी होते हैं। ये सदस्य सरकार द्वारा मनोनीत किए जाते हैं और इनका कार्यकाल तीन वर्ष का होता है। इसी कारण समिति हिन्दू नियंत्रण में है, ऐसा बौद्ध धर्मावलम्बी मानते हैं। समिति के सचिव भंटे प्रज्ञाशील आठ वर्षों से मंदिर के मुख्य भिक्षु हैं। उनके अनुसार बोधि विहार बौद्धमार्गियों की संपदा है। “पूरे विश्व को यह जगह बौद्धमार्गियों की है यह पता है। अब तक किसी ने भी इसे बौद्ध मंदिर नहीं कहा है। हम इसे बौद्धमार्गी समुदाय द्वारा प्रबंधित करना चाहते हैं,” उन्होंने कहा। “जो भी ईमानदार मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री होगा, उसे संविधान के अनुसार न्याय करना ही होगा। जो चीज किसी की है, वही उसे दी जानी चाहिए। आज, कल या परसों, किसी भी समय दी जाएंगी तो देना ही होगा। यह अनियमितता लगातार नहीं रह सकती।”