
फिर भी हार नहीं मानते मानव
आसमान में उठ रही है ज्वाला। भट्टियों में चल रहे हैं शराब के गिलास। चारों तरफ मानव और बस्ती जल रहे हैं। खुद लगाई गई आग में मानव जल रहे हैं। मानव मरने को तैयार हैं। पर हार नहीं मानते।
हर कोई देख रहा है अपनी विपत्ति। सभी के सपने बर्बाद हो चुके हैं। देखते ही देखते सब कुछ स्वाहा हो जाता है। किसी ने भी साथ नहीं दिया। मानव मरने को तैयार हैं। पर हार नहीं मानते।
किसी का कोई साथ नहीं है। बम-बारूद ही हाथ में है। चाहे रूस हो या यूक्रेन। इजरायल हो या हमास। मानव लाश बनने को तैयार हैं। मानव मरने को तैयार हैं। पर हार नहीं मानते।
परमाणु हथियार लेकर युद्ध के लिए तैयार हैं। पूरी दुनिया के लोग मर सकते हैं, पर परमाणु बनाने से रुकते नहीं। मानव मरने को तैयार हैं। पर हार नहीं मानते।
धन्य है हमारा जीवन। उजाला कौन देगा? विश्व शांति का संदेश कौन देगा? मानव अशांत होने को तैयार हैं। मानव मरने को तैयार हैं। पर हार नहीं मानते।