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नेपाल में बाघ संरक्षण: खोर में पालन-पोषण पर लाखों रुपये खर्च, संसाधन प्रबंधन में चुनौतियाँ

सूचना विश्व के दुर्लभ माने जाने वाले पाटेबाघ संरक्षण में नेपाल ने ‘उल्लेखनीय’ सफलता तो हासिल की है, लेकिन ‘समस्याग्रस्त’ बाघों के संरक्षण में चुनौतियाँ सामने आई हैं। मुख्य रूप से मानव पर हमला करने वाले बाघों को ‘समस्याग्रस्त बाघ’ कहा जाता है। विभिन्न राष्ट्रीय निकुञ्ज और आसपास के जंगलों में हाल ही में किए गए गणना में नेपाल में पाटेबाघ की संख्या बढ़ी है, जिससे मानव और वन्यजीवों के बीच द्वंद्व की चिंता भी बढ़ी है। नेपाल के विभिन्न क्षेत्रों में रखे गए समस्याग्रस्त बाघों के संरक्षण और पालन-पोषण में समस्याएं आ रही हैं, जिसके बारे में अधिकारियों ने बयान दिया है।

राष्ट्रीय निकुञ्ज एवं वन्यजीव विभाग के अनुसार, मानव बस्तियों में प्रवेश करने, इंसानों या पशुधन पर हमला करने, घायल तथा अशक्त बाघों को जंगल में पुनः छोड़ना संभव नहीं होने के कारण इन्हें नियंत्रण में रखकर होल्डिंग सेंटर या उद्धार केंद्र में रखा जाता है। वर्तमान में देश भर में कुल 16 समस्याग्रस्त बाघ विभिन्न होल्डिंग सेंटर और उद्धार केंद्रों में बने हुए हैं।

कहा-कहा कितने हैं: चितवन राष्ट्रीय निकुञ्ज में सात, बर्दिया राष्ट्रीय निकुञ्ज में पांच, जावलाखेल सदर चिड़ियाघर में तीन और बांके राष्ट्रीय निकुञ्ज में एक बाघ के साथ कुल 16 समस्याग्रस्त बाघ हैं। इनमें आठ नर और सात मादा हैं, यह जानकारी राष्ट्रीय निकुञ्ज एवं वन्यजीव विभाग के वरिष्ठ अनुसंधान अधिकारी डॉ. गणेश पन्त ने दी। उन्होंने बताया कि इन बाघों को होल्डिंग सेंटर और उपचार केंद्रों में रखकर संरक्षण किया जा रहा है।

बजट की कमी: होल्डिंग सेंटर और उपचार केंद्रों में रखे गए बाघों को मांस खिलाने और उपचार करने में खर्च की कमी हो सकती है, यह तथ्य अधिकारियों ने साझा किया है। चितवन राष्ट्रीय निकुञ्ज के सूचना अधिकारी अविनाश थापा के अनुसार, एक बाघ को रोजाना लगभग छह किलो मांस की आवश्यकता होती है। वहां रखे छह बाघों को ही मांस खिलाने पर मासिक एक लाख रुपये से अधिक खर्च आता है। उन्होंने कहा, “बाघों की देखभाल करने वाले कर्मचारी, तकनीकी विशेषज्ञ और उपचार में काफी खर्च होता है, लेकिन सरकार सालाना मात्र 4 से 5 लाख रुपये ही उपलब्ध कराती है।” वन्यजीव उद्धार और उपचार के लिए मध्यवर्ती क्षेत्र प्रबंधन समिति, उपभोक्ता समिति, राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण कोष और चितवन राष्ट्रीय निकुञ्ज के आंतरिक कोष से व्यय किया जाता है।

होल्डिंग सेंटर की कमी: बजट की कमी के चलते समस्याग्रस्त बाघों को रखने के लिए उपयुक्त होल्डिंग सेंटरों की संख्या कम है। पर्याप्त होल्डिंग सेंटर न होने के कारण इन बाघों को रखने में कठिनाइयाँ आती हैं। नेपाल में बाघ रखने योग्य होल्डिंग सेंटर कुल 17 हैं, डॉ. गणेश पन्त ने जानकारी दी। चितवन में सात, बर्दिया में पांच, बांके में एक, शुक्लाफाँटा में दो और पर्सा में दो होल्डिंग सेंटर हैं। चितवन का एक होल्डिंग सेंटर खराब होकर अनुपयोगी हो चुका है। समस्याग्रस्त बाघों की संख्या बढ़ने के साथ ही होल्डिंग सेंटर की कमी एक बड़ी चुनौती बन रही है, यह बात चितवन राष्ट्रीय निकुञ्ज के सूचना अधिकारी अविनाश थापा ने कही।

उद्धार का हाल: पिछले पाँच वर्षों में बर्दिया और बांके राष्ट्रीय निकुञ्ज ने 25 बाघों को उद्धार किया है, वहीं चितवन और पर्सा राष्ट्रीय निकुञ्ज ने छह वर्षों में 31 समस्याग्रस्त बाघों का उद्धार किया है। उद्धारित बाघों ने किसी को भी कोई नुकसान नहीं पहुँचाया है। बस्तियों में पाए गए बाघों को ‘रेडियो कॉलर’ लगाकर निकुञ्ज के मुख्य क्षेत्र में छोड़ा जाता है, जबकि आराम करने योग्य, अशक्त एवं शिकार करने में असमर्थ बाघों को होल्डिंग सेंटर में रखा जाता है, यह जानकारी बाघ विशेषज्ञ बाबुराम लामिछाने ने दी। 2010 से 2024 तक के अध्ययन में पता चला है कि बाघ हमले में 245 व्यक्ति घायल हुए और 141 लोगों की मौत हुई।

‘टाइगर सैंक्चुअरी’ निर्माण योजना: समस्याग्रस्त बाघों की संख्या बढ़ने पर सरकार ने बाघ प्रबंधन के लिए ‘टाइगर सैंक्चुअरी’ के निर्माण हेतु 5 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। चितवन के देवनगर वन क्षेत्र में यह आश्रय स्थल बनाया जाएगा, यह जानकारी राष्ट्रीय निकुञ्ज और वन्यजीव विभाग के पारिस्थितिकी विशेषज्ञ हरिभद्र आचार्य ने दी। देवनगर के जंगल में 50 से 52 हेक्टेयर क्षेत्र में बाघों को खुला घूमने के लिए ‘इन्क्लोजर’ तैयार किया जाएगा। इस सैंक्चुअरी में समस्याग्रस्त बाघों को रखा जाएगा और घायल तथा अशक्त बाघों के उपचार हेतु भी केंद्र स्थापित किया जाएगा। नेपाल में हाल ही में किए गए बाघ गणना एवं अनुगमन ने बाघों की संख्या 429 बताई है।