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चीनी हैकरों ने एआई की मदद से साइबर हमलों को दोगुना किया

ताइवान की साइबर सुरक्षा कंपनी टिम-टी5 ने पाया है कि चीनी सरकार से जुड़े हैकरों ने डिपसिक जैसे एआई टूल्स का उपयोग करके साइबर हमलों की संख्या दोगुनी कर दी है। टिम-टी5 के अनुसार, ग्रिमफेंसी और टेलेबोयी समूहों ने एआई की मदद से कमजोर वेबसाइटों, सर्वरों और आईपी एड्रेस की पहचान कर घुसपैठ के रास्ते खोजे। शोध से पता चला है कि हैकरों ने डिपसिक, चैटजीपीटी और क्लाउड कोड का इस्तेमाल किया, और भविष्य में अधिक उन्नत एआई हैकरों के हाथों में आने पर खतरे बढ़ने की आशंका जताई गई है। ९ भदौ, काठमांडू।

टिम-टी5 के अनुसार, ‘ग्रिमफेंसी’ नामक हैकर समूह ने डिपसिक का उपयोग कर सिस्टम में मौजूद कमजोरियों की पहचान करके घुसपैठ कोड तैयार किया था। एक अन्य समूह ‘टेलेबोयी’ ने इंटरनेट से लगभग एक हजार आईपी एड्रेस एकत्रित कर एक कंपनी की वेबसाइट और डोमेन का विवरण निकाला। इसका मतलब है कि हैकरों ने एआई की मदद से किसी कंपनी की डिजिटल संरचना को समझने का प्रयास किया। किन वेबसाइटों का संबंध एक ही कंपनी से है, कौन से सर्वर कमजोर हैं और कहाँ से हमला किया जा सकता है, ये सब वे एआई से जान पाए।

शोध में पता चला कि हैकरों ने केवल डिपसिक ही नहीं बल्कि चैटजीपीटी और क्लाउड कोड का भी उपयोग किया। एक पश्चिमी थिंक टैंक पर हमले के दौरान हैकरों ने एक कर्मचारी के कंप्यूटर से सिग्नल एप से संबंधित फाइलें प्राप्त कीं। इसके बाद उन्होंने चैटजीपीटी की मदद से उन फाइलों को खोलने के लिए प्रोग्राम बनाने का काम किया। दूसरी घटना में क्लाउड कोड का उपयोग कर ३० संस्थाओं और कंपनियों को स्वचालित रूप से निशाना बनाया गया। एआई ने स्वयं वेबसाइटों और सिस्टमों का परीक्षण, कमजोरियां खोजने और अन्य सिस्टम में घुसपैठ करने का प्रयास किया।

यह घटना साइबर सुरक्षा के लिए नया चुनौती लेकर आई है। पहले हैकर एक-एक सिस्टम को जांचने में बहुत समय लेते थे, लेकिन अब एआई की मदद से एक ही समूह कम समय में कई वेबसाइटों, कंपनियों और संस्थानों पर हमला कर सकता है। हालांकि, एआई खुद अपनी मर्जी से हमला नहीं करता, हैकर उसे निर्देश देते हैं और विशेष प्रोग्राम से जोड़ कर यह कार्य पूरा करते हैं। शोधकर्ताओं को चिंता है कि भविष्य में जब और शक्तिशाली एआई हैकरों के हाथों में होगा, तो साइबर हमलों को रोकना और अपराधियों को पकड़ना और भी कठिन हो जाएगा।