
प्रधानमंत्री राहत कोष के माध्यम से बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत संग्रहण हेतु एक-खिड़की प्रणाली लागू
भोतेकोशी में आई बाढ़ के बाद सरकार ने प्रधानमंत्री प्रकोप उद्धार कोष के द्वारा राहत संग्रहण और वितरण के लिए एक-खिड़की प्रणाली अपनाने का आग्रह किया है। १२ भदौ, काठमांडू। विनाशकारी भोतेकोशी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर जन-धन क्षति पहुंचाई है, जिसके बाद राहत और उद्धार कार्यों को तीव्रता से चलाया जा रहा है। सरकार, निजी क्षेत्र, संघ-संस्था और विदेशों में रहने वाले नेपाली सभी राहत जुटाने में लगे हुए हैं। वित्त मंत्रालय ने भी राहत संग्रहण के लिए ‘एक-खिड़की प्रणाली’ अपनाने का सुझाव दिया है, जो संग्रहित सहायता को वास्तविक पीड़ित तक व्यवस्थित, पारदर्शी और समान रूप से पहुंचाने में मदद करती है।
सरकार ने प्रधानमंत्री तथा मंत्रिपरिषद के कार्यालय के अंतर्गत आने वाले प्रधानमंत्री प्रकोप उद्धार कोष को राहत संग्रहण और परिचालन का आधिकारिक माध्यम बनाया है। मंत्रालय के अनुसार इस प्रणाली के माध्यम से एकत्रित आर्थिक सहायता को प्राथमिकता के आधार पर उद्धार, उपचार, राहत, पुनर्स्थापना और क्षतिग्रस्त पूर्वाधार के पुनर्निर्माण में उपयोग किया जाएगा। पूर्व वित्त मंत्री रमेश्वर खनाल के अनुसार राहत संग्रहण और वितरण के लिए सरकार की एक-खिड़की प्रणाली सबसे उपयुक्त व्यवस्था है। यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि राहत वितरण के दौरान किसी एक व्यक्ति या परिवार को बार-बार विभिन्न स्रोतों से राहत न मिले और अन्य पीड़ितों को उचित सहायता प्रदान हो सके।
वित्त मंत्रालय के सहसचिव अमृत लम्साल के अनुसार विदेशों में रहने वाले नेपाली, अंतरराष्ट्रीय दाता निकाय एवं संघटनाएं भी प्रधानमंत्री राहत कोष में आसानी से आर्थिक सहायता कर सकते हैं। लम्साल ने बताया कि विदेशी बैंक से स्विफ्ट कोड का उपयोग करके प्रधानमंत्री राहत कोष के खाते में धनराशि भेजी जा सकती है। राहत संग्रहण के नाम पर धोखाधड़ी का जोखिम बढ़ने के कारण सरकार ने आम जनता को सचेत किया है। कुछ व्यक्तियों द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से ‘प्रधानमंत्री दैवी प्रकोप उद्धार कोष’ या ‘प्रधानमंत्री राहत कोष’ के नाम पर व्यक्तिगत बैंक खाता या ई-वॉलेट में धन भेजने का आग्रह किया जा रहा है।
सरकार ने सहायता देने से पहले संबंधित विवरण आधिकारिक है या नहीं, इसकी पुष्टि करने को आवश्यक माना है। प्रधानमंत्री प्रकोप उद्धार कोष के नाम पर सहायता मांगी जाने की स्थिति में सरकार की आधिकारिक वेबसाइट या प्रमाणित सोशल मीडिया पेज पर प्रकाशित विवरण से तुलना करके ही धनराशि भेजने का आग्रह किया गया है। प्राकृतिक आपदा के समय सहायता का भाव महत्वपूर्ण होता है, लेकिन यह सहायता सही व्यक्ति तक, सही समय पर और समान रूप से पहुंचना और भी अधिक आवश्यक है।