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खाड़ी क्षेत्र को सुरक्षा मामलों में आत्मनिर्भर बनना चाहिए: क़तर

समाचार सारांश

संपादकीय रूपमा समीक्षा गरिएको।

  • कतार के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी ने कहा कि खाड़ी राष्ट्र सुरक्षा के लिए केवल अमेरिका या अंतरराष्ट्रीय गठबंधन पर निर्भर नहीं रह सकते।
  • आबुधाबी में आयोजित ‘हिली फोरम’ में उन्होंने कहा कि सुरक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता ही आगे बढ़ने का मुख्य रास्ता है, हालांकि साझेदार की जरूरत होगी लेकिन सिर्फ निर्भर नहीं रहना चाहिए।
  • कतार अमेरिका-ईरान विवाद में मध्यस्थ के रूप में सक्रिय है, जबकि हर्मुज जलसंधि और क्षेत्रीय ऊर्जा बुनियादी ढांचा को लेकर तनाव जारी है।

२२ भदौ, आबुधाबी (रासस/एएफपी)। खाड़ी राष्ट्रों को अपनी सुरक्षा के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका या अन्य अंतरराष्ट्रीय गठबंधनों पर मात्र निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि सुरक्षा क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनना होगा, ऐसा क़तर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने सोमवार को कहा।

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की राजधानी आबुधाबी में आयोजित ‘हिली फोरम’ में उन्होंने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सैन्य उपस्थिति और अमेरिका के साथ रणनीतिक गठबंधन महत्वपूर्ण हैं, लेकिन केवल इन्हीं से क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो सकती।

“हमें अपने साझेदारों और सहयोगियों की आवश्यकता है। लेकिन अपनी सुरक्षा के लिए हम केवल उन पर निर्भर नहीं रह सकते,” उन्होंने कहा। उनके अनुसार सुरक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता ही आगे बढ़ने का सबसे मुख्य रास्ता है।

कतार अमेरिका-ईरान विवाद में प्रमुख मध्यस्थकर्ता की भूमिका में सक्रिय है। इस दौरान उसे ईरान की तरफ से अपने ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने वाले हमलों का सामना भी करना पड़ा है।

छोटा लेकिन समृद्ध गैस उत्पादक राष्ट्र क़तर मध्य पूर्व में अमेरिका के सबसे बड़े सैन्य ठिकानों में से एक को आश्रय देता आ रहा है। विवाद के दौरान ईरान ने अमेरिकी हमलों के जवाब में अमेरिकी सैन्य ठिकानों तथा क्षेत्रीय ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाया है।

छह महीने के विवाद के बाद अमेरिका और ईरान गतिरोध की स्थिति में हैं। ईरान रणनीतिक महत्व वाली हर्मुज जलसंधि में जहाज आवागमन में बाधा उत्पन्न कर रहा है, जबकि अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी का दबाव बढ़ा रहा है।

पिछले महीने मध्यस्थता प्रयासों के तहत क़तर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी तेहरान गए थे। इसके पहले हर्मुज जलसंधि से जुड़े ईरान और ओमान अस्थायी समुद्री मार्ग (शिपिंग कॉरिडोर) चलाने तथा जलसंधि में रखे गए बारूदी सुरंगों को हटाने को लेकर बातचीत कर रहे थे।