
ट्रम्प ने इरान के साथ हुए परमाणु समझौते को इतिहास का सबसे खराब समझौता बताया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 2015 में इरान के साथ हुए परमाणु समझौते को इतिहास के सबसे खराब समझौतों में से एक कहा है। यह समझौता इरान के परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे को सुलझाने के लिए किया गया था। टेक्सास में आयोजित रिपब्लिकन मध्यावधि सम्मेलन में बोलते हुए ट्रम्प ने कहा, ‘बेराक ओबामा ने ज्वाइंट कम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (जेसीपीओए) समझौता किया था। यह इतिहास के सबसे खराब समझौतों में से एक था।’ ट्रम्प के अनुसार यह समझौता इरान को परमाणु हथियार विकसित करने का रास्ता खोल रहा था।
2015 में जर्मनी और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य देशों ब्रिटेन, चीन, रूस, अमेरिका और फ्रांस ने इरान के साथ इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते ने इरान के संभावित परमाणु हथियार विकास को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद को खत्म कर दिया था। लेकिन ट्रम्प ने अपनी पहली राष्ट्रपति अवधि में 2018 में इस समझौते से अमेरिका को वापस ले लिया। उसके बाद उन्होंने समझौते के अनुसार हटाए गए सभी इरान विरोधी प्रतिबंधों को पुनः लागू किया।
‘अगर मैंने जेसीपीओए को रद्द न किया होता और हमारे बी2 बॉम्बर्स ने उनपर हमला न किया होता, तो उनके पास अभी परमाणु हथियार होते,’ उन्होंने कहा। ट्रम्प ने इस्फहान, नतान्ज और फोर्डो में स्थित ईरानी परमाणु स्थलों पर बी2 बॉम्बर के इस्तेमाल का भी दावा किया। उन्होंने मध्यावधि चुनावों के बाद इरान के साथ संघर्ष समाप्त होने की उम्मीद जताई। ट्रम्प के अनुसार इरानी लोग समझौते के लिए मेहनत कर रहे हैं। अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को इरान के खिलाफ युद्ध शुरू किया था। उसी महीने वाशिंगटन और तेहरान ने लेबनान सहित सभी मोर्चों पर तत्काल युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। लेकिन अमेरिका ने 8 जुलाई की रात इरान पर फिर से बड़े पैमाने पर हमला शुरू किया था। इससे पहले अमेरिका ने इरान पर हॉर्मुज जलसन्धि से जुड़े मौजूदा समझौतों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया था।