
‘आणविक खतरा बढ़ रहा है, वैश्विक मुद्दों पर बहुपक्षीय दृष्टिकोण आवश्यक’
नई दिल्ली में शनिवार को शुरू हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का उद्घाटन भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत मंडप में किया है। ब्रिक्स घोषणा पत्र में अंतरराष्ट्रीय विवादों को संवाद, परामर्श और कूटनीति के माध्यम से हल करने और आणविक खतरे एवं संघर्ष के जोखिम के प्रति चिंता व्यक्त की गई है। घोषणा पत्र में 22 अप्रैल 2025 को जम्मू–कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले में 26 लोगों की मौत तथा कई घायल होने की घटना की निंदा की गई है। ब्रिक्स ने सीमापार भुगतान को सरल बनाने और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार एवं निवेश बढ़ाने की संभावनाओं पर निरंतर चर्चा जारी रखने का आग्रह किया है।
शनिवार को नई दिल्ली में ब्रिक्स देशों का शिखर सम्मेलन प्रारंभ हुआ। भव्य समारोह के बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली स्थित भारत मंडप में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन किया। सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत उच्च स्तरीय नेता उपस्थित हैं। ब्रिक्स के सदस्य 11 देश हैं – ब्राजील, चीन, मिस्र, इथोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई)। ब्रिक्स ने खुद को विश्व तथा क्षेत्रीय महत्व के समसामयिक विषयों और वैश्विक राजनीतिक एवं आर्थिक शासन में परामर्श एवं सहयोग के एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में स्थापित किया है।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के संयुक्त घोषणा पत्र में सदस्य देशों ने अंतरराष्ट्रीय विवादों को संवाद, परामर्श और कूटनीति से सुलझाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है। घोषणा पत्र में विश्व के मुख्य मुद्दों पर सदस्य देशों की विभिन्न अवधारणाओं और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए बहुपक्षीय दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया गया है। नई दिल्ली घोषणा पत्र में आणविक खतरे और संघर्षों की बढ़ती जोखिम के प्रति चिंता व्यक्त करते हुए अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई गई है।
ब्रिक्स ने अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ एकतरफ़ा दबावकारी विकल्पों का विरोध किया है। समूह ने कार्बन सीमा समायोजन तंत्र सहित एकतरफा, दण्डात्मक, भेदभावपूर्ण और संरक्षणवादी उपायों को अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप न बताते हुए इनका विरोध किया है। ब्रिक्स के अनुसार, ऐसे कदम विशेषकर विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों का सामना करने, उनकी अनुकूलन क्षमता और स्थिरता बढ़ाने के प्रयासों को प्रभावित करते हैं।