
किमची के लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया ने शरीर से नैनोप्लास्टिक हटाने में मदद की पुष्टि
विश्व संस्थान ऑफ किमची के अध्ययन में यह साबित हुआ है कि किमची से निकाला गया लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया आंत में मौजूद नैनोप्लास्टिक को बांधकर शरीर से बाहर निकालने में सहायता करता है। अनुसंधान टीम ने बताया कि ‘ल्युकोनोस्टोक मेसेन्टेरोइड्स CBA3656’ प्रयोगशाला में ८७ प्रतिशत और मानव आंत के समान परिवेश में ५७ प्रतिशत नैनोप्लास्टिक अवशोषित करने की क्षमता रखता है। कीटाणुरहित चूहों पर किए गए परीक्षण में इस बैक्टीरिया वाला समूह की मल में प्रोबायोटिक्स न पाए समूह की तुलना में दोगुना से अधिक नैनोप्लास्टिक मिला है, जो इस शोध का समर्थन करता है।
२ अक्टूबर, काठमाडौं। विज्ञान एवं सूचना तकनीक मंत्रालय के अधीन सरकारी अनुदान प्राप्त अनुसंधान संस्थान ‘विश्व संस्थान ऑफ किमची’ ने एक नया अनुसंधान परिणाम जारी किया है। इस शोध के अनुसार, किमची से प्राप्त लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया आंत में मौजूद नैनोप्लास्टिक को बांधकर शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है। नैनोप्लास्टिक वे प्लास्टिक कण होते हैं जो १ माइक्रोमीटर से भी छोटे होते हैं और बड़े प्लास्टिक वस्तुओं के विघटन से बनते हैं। ये कण भोजन और पीने के पानी के माध्यम से मानव शरीर में प्रवेश कर सकते हैं।
डा. से ही ली और डा. ताए वुङ वोन के नेतृत्व वाली टीम ने किमची से प्राप्त लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया ‘ल्युकोनोस्टोक मेसेन्टेरोइड्स CBA3656’ की क्षमता का परीक्षण किया। प्रयोगशाला में सामान्य परिस्थितियों में इस बैक्टीरिया ने ८७ प्रतिशत नैनोप्लास्टिक अवशोषित करने की क्षमता दिखाई। मानव आंत के समान वातावरण में परीक्षण के दौरान इसने ५७ प्रतिशत तक नैनोप्लास्टिक अवशोषण बनाए रखा।
कीटाणुरहित चूहों पर हुए परीक्षण में भी महत्वपूर्ण परिणाम सामने आए। जिन चूहों को प्रोबायोटिक्स नहीं दिया गया, उनकी तुलना में CBA3656 बैक्टीरिया प्राप्त चूहों के मल में दोगुना से अधिक नैनोप्लास्टिक पाए गए। इससे संकेत मिलता है कि प्रोबायोटिक्स आंत में नैनोप्लास्टिक को सक्रिय रूप से बांध कर शरीर से निकालने में मदद कर सकता है। अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता डा. सेही ली ने बताया, ‘प्लास्टिक प्रदूषण न केवल पर्यावरणीय समस्या है, बल्कि जनस्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा है।’