
भोटेकोशी-त्रिशूली बाढ़ के बाद के दृश्य मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव और इसका उपचार कैसे करें?
बाढ़ के बाद के दृश्य “सेकंडरी ट्रॉमा” के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। चिकित्सकों के अनुसार, फोन पर बार-बार दुखद सामग्री देखने से अप्रत्यक्ष रूप से मानसिक आघात हो सकता है। मनोचिकित्सक ऋचा अमात्य ने कहा कि सामाजिक मीडिया पर बाढ़ से संबंधित विभिन्न दृष्यों को लंबे समय तक देखने से “सेकंडरी ट्रॉमा” का खतरा बढ़ जाता है।
कैसे पहचानें कि आपको “सेकंडरी ट्रॉमा” हुआ है और इसके प्रभाव को कैसे कम किया जाए? इस विषय में अधिक जानकारी के लिए कृपया वीडियो अवश्य देखें।