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नागालैंड में विषाक्त मदिरा सेवन से 19 की मौत

भारत के नागालैंड में विषाक्त मदिरा सेवन के कारण कम से कम 19 लोगों की मृत्यु हो चुकी है। पुलिस के अनुसार ये घटनाएं मोकोकचुंग और तुएनसांग जिलों में हुई हैं। मोकोकचुंग में 8 और तुएनसांग में 11 लोगों की मौत हुई है। मोकोकचुंग के वरिष्ठ पुलिस उपाधीक्षक वेसुप्रा केजो ने बताया कि गुरुवार को मिलावट की गई मदिरा सेवन से चार लोगों की मौत की पहली जानकारी सामने आई थी। इसके बाद पुलिस ने तत्काल प्रभावित क्षेत्र में छापा मारकर जांच शुरू कर दी। अब तक वहां मिलावट की गई मदिरा के साथ सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों पर मृतकों को दी गई मदिरा की बिक्री का संदेह है। पुलिस ने आम जनता को सावधानी बरतने और मदिरा सेवन से बचने का आग्रह किया है।

इसी प्रकार, तुएनसांग जिला पुलिस द्वारा जारी विवरण के अनुसार 11 सितंबर तक विषाक्त मदिरा सेवन के कारण जिले में नौ लोगों की मौत हो चुकी थी। 12 सितंबर को तुएनसांग पुलिस ने सिविल अस्पताल में मदिरा सेवन संबंधित मौत का एक मामला देखा। पुलिस के मुताबिक अधिकांश मृतक मदिरा पी चुके थे। इसके बाद जांच के तहत विभिन्न स्थानों पर छापेमारी कर 470 से अधिक संदिग्ध विषाक्त मदिरा की बोतलें बरामद की गईं। इस बीच तुएनसांग में दो और लोगों की मृत्यु की जानकारी मिली है। पुलिस ने दोनों जिलों में जारी छापे अभियान के दौरान तीन हजार से अधिक मदिरा की बोतलें जब्त की हैं और 15 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बिना लेबल या पहचान के मदिरा न पीने की जनता से अपील की है। मदिरा सेवन के बाद चक्कर आना, दृष्टि धुंधली होना या सांस लेने में दिक्कत जैसे लक्षण नजर आने पर तुरंत अस्पताल जाने को कहा गया है। नागालैंड में 1990 से मदिरा पर प्रतिबंध लागू है। इस घटना की जांच और अवैध मदिरा के स्रोत व आपूर्ति नेटवर्क का पता लगाने के लिए अतिरिक्त पुलिस उपाधीक्षक आई बुंगलांग चांग के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है। दीमापुर स्थित फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला ने तुएनसांग पुलिस द्वारा भेजे गए संदिग्ध मदिरा के नमूने में मेथानोल पाया है। हालांकि नमूने की विस्तृत मात्रात्मक जांच के लिए गुवाहाटी स्थित केन्द्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला को भेजा गया है।