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बाल बालिकाओं के सुरक्षित वर्तमान के बिना समृद्ध नेपाल की संभावना नहीं

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा की गई।

  • मानसिं वाइबा मकवानपुर के बकैया-६, ज्यामिरे के बालक हैं, जिन्हें बाल श्रम से मुक्त कराया गया और जो अब स्नातक की पढ़ाई कर रहे हैं।

आदरणीय प्रधानमंत्री जी,

मैं मानसिं वाइबा हूँ। मेरा घर मकवानपुर जिले के बकैया-६, ज्यामिरे में है, जिसे अब भी अत्यंत दुर्गम क्षेत्र माना जाता है। मैं एक बालक था जो बालश्रम में फंसा था और वहां से उद्धार पाया हूँ।

मेरे परिवार के पास दो वक्त की रोटी भी मुश्किल से होती थी। मेरे माता-पिता वृद्ध हैं, बहनों की शादी हो चुकी है, और मैं एक अकेला बेटा हूँ इसलिए परिवार की जिम्मेदारी मुझे संभालनी पड़ती है। मेरी हालत देखकर गाँव के ठेकेदार ने मुझे बहकाया, ज्यादा कमाई का लालच दिया। पढ़ाई की इच्छा होने पर भी मैं गलैँचा बुनने काठमाडौँ आ गया।

मेरी उम्र तब मात्र ११ वर्ष थी, जाड़े का मौसम था। मेरे पास पतली शर्ट और पैंट ही थीं। उस समय गलैंचों के धागे पर सोकर काम किया, लेकिन न तो वे पैसे देते, न कोई और सुविधा। इतनी श्रमशोषण देख मैं वहां से भागकर होटल में बर्तन धोने लगा। वहां के मजदूर भड़कीली शराब पीकर रात में मुझे पीटते थे।

साहू- साहूनी से ज़्यादा तो वे लोग जो उनके रिश्तेदार थे, वे बस थोड़ी गाली देते पर कुछ अधिक नहीं करते थे। सताए जाने के बाद मैंने हिम्मत करके पुलिस चौकी जाकर अपनी समस्या बताई।

इसके बाद चाइल्ड रेस्क्यू नेपाल, नेपाल पुलिस और ईस्थर बेन्जामिन स्मृति संस्था की मदद से मेरा बचाव हुआ, जो विक्रम संवत २०७२ की घटना है।

ईस्थर बेन्जामिन स्मृति संस्था ने मुझे संरक्षण दिया, पढ़ाई, लेखन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराईं। मैंने वहां अपने घर की समस्याएं भी बताईं जिससे परिवार को कुछ मदद मिल सकी।

मैंने वहां करीब तीन साल पढ़ाई की। बाद में गांव में रहकर पढ़ाई जारी रखने की इच्छा हुई, और संस्था की मदद से मैंने गांव में ही पढ़ाई जारी रखी। आठवीं कक्षा पूरी करने के बाद कोविड महामारी के बाद मैं फिर काठमाडौँ आया और पढ़ाई जारी रखी। अब उसी संस्था के सहयोग से मैं १२वीं कक्षा पास कर स्नातक की पढ़ाई कर रहा हूं।

आज मैं एक जागरूक नागरिक के रूप में खड़ा हूँ लेकिन मेरे जैसी स्थिति हजारों बच्चे देश में झेल रहे हैं। ऐसी बाल समस्याओं को सरकार क्यों संबोधित नहीं कर पा रही?

नेपाल के संविधान ने बालकों को शिक्षा, स्वास्थ्य, संरक्षण, शोषण से सुरक्षा व सम्मानजनक जीवन के अधिकार सुनिश्चित किए हैं। बालश्रम कानूनों ने बालश्रम को प्रतिबंधित किया है। इसके बावजूद बच्चे विभिन्न रेस्तरां, मोटरसाइकिल वर्कशॉप, कल-कारखानों में काम करने को मजबूर हैं और शोषित हो रहे हैं।

सन् 2021 की नेपाल बालश्रम रिपोर्ट के अनुसार लगभग 11 लाख से अधिक बच्चे अभी भी बालश्रम में हैं। उनमें से कई मेरी ही तरह बड़ी समस्याएँ झेल रहे हैं।

मैंने नियम-कानून के सहारे अपनी जिंदगी बदली, लेकिन मेरे हजारों भाई-बहन शोषण की चपेट में हैं। इन कानूनों का प्रभावी कार्यान्वयन एवं संबंधितों को राहत देना अति आवश्यक है। आने वाले दिनों में बालश्रम और बालशोषण रोकने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने होंगे।

मैं बाल संरक्षण क्षेत्र में स्वयंसेवक और प्रशिक्षार्थी के रूप में बचाए गए बच्चों से बातचीत करता हूँ। श्रम और बेचबिखन में फंसे तथा अभिभावक विहीन बच्चों को जन्म प्रमाण पत्र और नागरिकता न मिलने की समस्या भी जटिल है, जो उनकी उच्च शिक्षा और नागरिक अधिकारों को प्रभावित करती है।

यदि राज्य प्रभावी नीतियां और कार्यक्रम लागू करे तो सुरक्षित भविष्य संभव है, ऐसा मेरा अनुभव है।

संविधान और प्रचलित कानूनों के अनुसार बालश्रम के प्रति शून्य सहिष्णुता और प्रभावी कार्यान्वयन के साथ बालकों का उचित उद्धार, संरक्षण एवं विकास सुनिश्चित करना आवश्यक है।

बालकों के सुरक्षित वर्तमान के बिना समृद्ध नेपाल का भविष्य संभव नहीं है। इस विषय को राष्ट्रीय प्राथमिकता देते हुए ठोस, समयबद्ध और परिणाममुखी पहल करने का पुनः हार्दिक अनुरोध करता हूँ।

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