
निवेशकों को निवेश सुरक्षा के लिए तलाश जारी है
समाचार सारांश: नई सरकार के गठन के साथ ही उद्योगी-व्यवसायी नीतिगत स्थिरता और सहज व्यापार वातावरण की अपेक्षा कर रहे हैं। उद्योगी वर्ग की मांग है कि सरकार प्रक्रियागत जटिलताओं को हटाकर एकद्वार प्रणाली लागू करे। नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ के चुनाव के नजदीक आते ही रघुनन्दन मारु ने नए नेतृत्व के लिए उम्मीदवारिता दर्ज की है। नई सरकार के गठन ने व्यावसायिक क्षेत्र में आशा का संचार किया है। राजनीतिक स्थिरता से नीतिगत स्थिरता आएगी और यह आर्थिक प्रगति का मार्ग खोलने में सहायक होगी, ऐसा विश्वास व्यावसायिक समुदाय में है। वहीं, अर्थ मंत्रालय नए बजट के निर्माण में लगा है। इसी संदर्भ में सिमेंट उत्पादक संघ के अध्यक्ष एवं शिवम् सिमेंट के प्रबंध निदेशक रघुनन्दन मारु से संवाद प्रस्तुत है:
नई सरकार के गठन के बाद उद्योगी-व्यवसायी वर्ग की अनुभूति कैसी है?
देश में दो तिहाई बहुमत वाली मजबूत सरकार बनी है और उद्योगी-व्यवसायी वर्ग इसे दिल से स्वागत कर रहा है। न केवल वे, बल्कि सामान्य नागरिक भी उत्साहित हैं क्योंकि अब वह सिद्धांतात्मक ‘बसने योग्य’ वातावरण व्यवहार में आने की उम्मीद है। पिछली समस्याएं जो हमें परेशान करती थीं, उनका समाधान अपेक्षित है।
स्थायी सरकार से उद्योगी-व्यवसायी की ठोस अपेक्षाएं क्या हैं?
नीतिगत स्थिरता प्रमुख मांग है। दीर्घकालिक नीति की आवश्यकता है। निवेशक चाहते हैं कि उनकी पूंजी सुरक्षित रहे। हमारा समूह विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने का प्रयास कर रहा है, जिन्होंने नेपाल में नीति-असंगति, बजट और सरकार के बदलाव के साथ नीतियों में बदलाव का अनुभव किया है। इसलिए स्थिर नीति सबसे बड़ी मांग है। दूसरी बात, प्रक्रियागत जटिलताओं को हटाना होगा। कंपनी पंजीकरण से संचालन के सभी चरणों में समान समस्याएं हैं। लाइसेंसिंग की अनावश्यक झंझट खत्म करनी होगी क्योंकि राष्ट्रनिर्माण के समय ये बाधाएं उद्योग को प्रभावित करती हैं। अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रक्रियाओं का पालन न किए बिना आवेदन स्वीकार नहीं होना चाहिए, लेकिन सभी प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी फाइल घुमाने की संस्कृति को खत्म करना होगा। वन भोगाधिकार की अव्यवस्था से जलविद्युत और खनन क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं। वन संरक्षण के प्रति सभी सहमत हैं, परंतु प्रक्रियागत झंझट खत्म होनी चाहिए। यदि एक पेड़ काटा जाता है तो ५० पेड़ रोपने के नियम को लागू किया जाए। जलविद्युत और खनन उद्योगों में भोगाधिकार के प्रभाव पर विशेष ध्यान आवश्यक है। हदबंदी भी एक चुनौती है। यदि हम १०० अरब डॉलर का अर्थव्यवस्था बनाना चाहते हैं तो बड़े औद्योगिक स्थापन के लिए सहज वातावरण जरूरी है। सरकार को उदारता दिखानी चाहिए और बड़े निवेश के लिए सरल नीति लानी चाहिए। इससे रोजगार बढ़ेगा और अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। एकद्वार प्रणाली से प्रक्रियाओं को सुगम बनाया जाना चाहिए। उदाहरण स्वरूप, किसी खनन उद्योग को १२०० रोपनी जमीन मांगने पर राज्य द्वारा सीमा तय करके दी जाए। उद्योग विफल होने पर जमीन बेचने की अनुमति हो लेकिन अन्य प्रयोजनों के लिए उपयोग पर प्रतिबंध रहे। भूमि सुधार मंत्रालय की जटिल प्रक्रियाओं में सुधार कर फाइल घुमाने की संस्कृति को रोका जाए।
एकद्वार प्रणाली से सभी कार्य सहज होंगे, आपके विचार क्या हैं?
बिल्कुल। आज सूचना प्रौद्योगिकी के युग में भी एक टेबल से दूसरी टेबल पर फाइल पास करने का चलन प्रगति के लिए बाधक है। फाइल की स्थिति कंप्यूटर से ही आसानी से देखी जानी चाहिए। आधुनिक तकनीक का उपयोग कर सरकारी कार्यों को तेजी से, पेपरलेस तरीके से करना चाहिए। ऐसा होने पर वर्तमान सरकार देश की आर्थिक संरचना में परिवर्तन ला सकती है।
रास्वप ने पुराने कानूनों को खारिज करने का वादा किया है, जिसे अर्थमंत्री डा. स्वर्णिम वाग्ले ने भी सेटअप किया है। उद्योग-व्यापार की प्रतिक्रिया क्या है? यह एक बड़ी उपलब्धि है और हम आशावादी हैं। पूर्व अर्थमंत्री रामेश्वर खनाल की अगुवाई वाले आर्थिक सुधार आयोग ने भी छह साल पहले गैरजरूरी कानूनों को खत्म करने की मांग की थी। इसे लागू किया जाना चाहिए जिससे देश में तेजी से सुधार होगा।
सरकार ने पाँच वर्ष में प्रतिव्यक्ति आय १५०० डॉलर से बढ़ाकर ३००० डॉलर करने का लक्ष्य रखा है, आपकी दृष्टि में इसकी संभावना कैसी है?
युवा पलायन रोकना और निराशा समाप्त करना आवश्यक है, सरकार इसे कर सकती है। युवाओं को उद्यमशील बनाने के लिए लचीली नीति और वातावरण प्रदान करना चाहिए। स्टार्टअप और छोटे व्यवसायों को सभी प्रकार की प्रोत्साहन देना चाहिए। जब युवा व्यवसाय शुरू करेंगे तो अर्थव्यवस्था में सकारात्मक प्रभाव दिखाई देगा। इस कारण १५०० से ३००० डॉलर का लक्ष्य संभव है। वर्तमान में युवा विदेश रोजगार के लिए जाते हैं जो सामाजिक संरचना पर नकारात्मक असर डालता है। रेमिटेंस आधारित अर्थव्यवस्था हानिकारक है, उत्पादन आधारित होना चाहिए।
आप कहना चाहते हैं कि युवा उद्यमी बढ़ें?
हां, यदि हम ३००० डॉलर प्रति व्यक्ति आय और १०० अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना चाहते हैं तो युवाओं को उद्यमशील बनाना आवश्यक है। अच्छी सोच और दूरदृष्टि से नेपाल तेजी से विकसित होकर एक दाता राष्ट्र बन सकता है।
आगामी बजट में उद्यमी क्या चाहते हैं?
कर नीति की पुनर्समीक्षा आवश्यक है। मूल्य वर्धित कर (VAT) में अलग-अलग स्लैब होने चाहिए, जैसे भारत में है। आवश्यक वस्तुओं पर न्यूनतम कर और विलासिता वस्तुओं पर उच्च कर होना चाहिए। कर नीति व्यावहारिक और संतुलित होनी चाहिए।
आपके अनुसार उपयुक्त कर दर क्या होनी चाहिए?
खाद्य जैसी अत्यावश्यक वस्तुओं पर न्यूनतम कर होना चाहिए ताकि महंगे उपभोक्ता वस्तुओं का भार कम हो। विलासिता वस्तुओं पर उच्च कर लगाना उचित है।
सिमेंट उद्योग की वर्तमान स्थिति कैसी है?
सिमेंट उद्योग निर्यात उन्मुख होता जा रहा है। उत्पादन क्षमता पर्याप्त होने के बावजूद निर्यात नहीं हो पा रहा। पहले सरकार निर्यात अनुदान देती थी परंतु अब रोक दिया गया है, जिससे उद्योग प्रभावित हुए हैं। अनुदान की निरंतरता आवश्यक है क्योंकि राजस्व में घाटा नहीं होता। नेपाल की लगभग २ करोड़ टन उत्पादन क्षमता है जबकि उपभोग ८० लाख टन से अधिक नहीं है। अतः अतिरिक्त उत्पादन को निर्यात प्रोत्साहन मिलना चाहिए।
सिमेंट की कीमत क्यों बढ़ी?
ढुलाई लागत में वृद्धि, डीजल मूल्य में बढ़ोतरी, पैकिंग खर्च समेत कच्चे माल की कीमत बढ़ना मुख्य कारण हैं। इरान-अमेरिका युद्ध का भी प्रभाव पड़ा है। युद्ध का प्रभाव साफ नहीं दिखाई देता लेकिन इसके बहुआयामी असर आ रहे हैं। उम्मीद है कि यह जल्दी समाप्त हो।
नई सरकार से सिमेंट उद्योग के लिए क्या अपेक्षाएं हैं?
हदबंदी और वन भोगाधिकार मुख्य समस्या हैं। भोगाधिकार प्रणाली को समाप्त करना होगा। जब पेड़ काटने की अनुमति दी जाती है तो दोहरी अनुमति क्यों लेनी पड़ती है? ऐसे कानूनों में संशोधन जरूरी है। खनन उद्योग को बढ़ावा देने के लिए पेचीदा नियमों में सुधार करना होगा, चीन की तरह खनन उद्योग GDP में बड़ा योगदान दे सके। सरकार को कोयला आयात पर लगाया गया हरित कर हटाना चाहिए क्योंकि उत्पादन न होने वाली वस्तुओं पर कर लगाना उचित नहीं। प्रक्रियागत जटिलता हटाने में सक्षम हुए तो सिमेंट उद्योग बड़ा लाभ दे सकता है। सरकारी खर्च में वृद्धि और पूंजीगत व्यय पर जोर देना चाहिए जो सिमेंट की खपत बढ़ाएगा। वर्तमान में बड़े बजट का असाधारण हिस्सा प्रदेशों को जाता है, इसका पुनर्मूल्यांकन आवश्यक है।
सिमेंट निर्यात कैसा है?
निर्यात लगभग बंद के बराबर है। केवल सीमावर्ती क्षेत्रों में सिमेंट निर्यात हो रहा है। अनुदान कटौती के बाद भारत के साथ प्रतिस्पर्धा कठिन हो गई है, इसलिए राज्य को सुविधाएं प्रदान करनी होंगी।
देश के त्वरित विकास के अवसर क्या देखते हैं?
अवसंरचना का विकास देश के तेजी से विकास का आधार होगा। नेपाल जैसे छोटे देश में दूरी को आसान बनाना होगा, जैसे तप्लेजुंग से विराटनगर २ घंटे में पहुँचना संभव होना चाहिए। इससे अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
वर्तमान बजट में निवेश-मित्र वातावरण सुनिश्चित करने के लिए क्या आवश्यक है?
सरकारी सेवाओं में एकद्वार प्रणाली का पालन अनिवार्य किया जाना चाहिए। यह मांग पहले भी उठाई गई थी लेकिन लागू नहीं हो सकी। लाइसेंसिंग प्रक्रिया, तेज कार्रवाई और निवेश सुरक्षा की गारंटी आवश्यक है।
नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ के आगामी चुनाव में आपकी भूमिका क्या है?
चुनाव नजदीक है। इस बार मैंने अन्जन श्रेष्ठ के नेतृत्व वाले समर्पित शिव घिमिरे पैनल से कार्यसमिति सदस्य पद के लिए उम्मीदवारिता दी है। उद्देश्य महासंघ का जिम्मेदार और व्यवस्थित संचालन करना है जिससे आर्थिक समृद्धि में प्रभावी योगदान हो।
आपके एजेंडे में क्या शामिल है?
सरकार और महासंघ के बीच दूरी को कम करना मेरी प्रमुख प्राथमिकता होगी। महासंघ को सरकार को डिजिटलाइजेशन की ओर प्रेरित करना होगा, जिसमें हम पिछड़े हुए हैं। उद्योगों की निराशा दूर करने में मेरी भूमिका रहेगी। मैं महासंघ को नए ढंग से आगे बढ़ाना चाहता हूं, निजी क्षेत्र और सरकार के बीच अविश्वास को दूर करना होगा। यदि जीत हासिल हुई तो निवेश के लिए प्रेरक वातावरण बनेगा।
अंत में कुछ कहना चाहेंगे?
रास्वप के घोषणापत्र के अनुसार कानूनी और प्रशासनिक बदलाव से देश का स्वरूप बदलेगा। नेपाली जनता को सरकार पर पूरा विश्वास करना चाहिए और उद्योगी व्यवसायी को भरोसा लेकर देश में ही विकास करने का संकल्प लेना चाहिए। यह संकल्प देश को समृद्ध बनाने में सक्षम होगा।