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घर नहीं भेजा जाता, वेतन भी नहीं मिलता – सऊदी में फंसे नेपाली कामगारों की समस्या

खबर सारांश

समीक्षा के लिए तैयार।

  • सऊदी अरब के रियाद स्थित हुसैन बिन अली अतीफा में काम कर रहे ५० से अधिक नेपाली कामगारों ने पांच से छह महीने तक वेतन न मिलने की शिकायत करते हुए मदद की मांग की है।
  • पीड़ितों ने बताया कि कंपनी ने खाना, रहने और पानी जैसी मूल सुविधाएं नहीं दी हैं, काम में अनियमितता की है और धमकी भी दी है।
  • नेपाल के मैनपावर, स्थानीय एजेंट और दूतावास में शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने पर उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो बनाकर आवाज उठाई है।

२३ चैत, काठमांडू। सऊदी अरब के रियाद में हुसैन बिन अली अतीफा में कार्यरत नेपाली कामगार संकट में हैं। काठमांडू के गौशाला स्थित नेपाल लाइफ रिक्रूटमेंट समेत विभिन्न मैनपावर कंपनियों के माध्यम से लगभग दो साल पहले सऊदी पहुंचे ये कामगार समस्याओं का सामना कर रहे हैं।

लंबे वक्त से कंपनी ने वेतन, खाना, रहने और पानी की सुविधा तक नहीं दी है, इस कारण वे मदद की गुहार लगा रहे हैं। ५० से अधिक नेपाली जिन्होंने दो सालों के श्रम अनुबंध के तहत बिल्डिंग निर्माण का काम किया है, वे इन समस्याओं से जूझ रहे हैं।

५० डिग्री तापमान में काम करते हुए भी ठेकेदार वेतन नहीं देता, काम से रोकता है और खाना-पानी की कमी भी बताई गई है। श्रमिकों ने बताया कि उन्हें पांच से छह महीने से वेतन नहीं मिला है। ऑनलाइन बातचीत में पीड़ितों ने कहा कि नेपाल और सऊदी दोनों जगह मौजूद मैनपावर और ठेकेदार ने समस्या को और बढ़ा दिया है।

एक पीड़ित ने बताया, ‘‘कंपनी ने पांच-छह महीने से वेतन नहीं दिया है, खाना और रहने की सुविधा भी नहीं प्रदान की जा रही। कुछ का तीन महीने, कुछ का चार और कुछ का छह महीने का वेतन बाकी है। कई बार दबाव दिया, लेकिन कंपनी कहती रही ‘देंगे’, पर अभी तक कुछ नहीं मिला। काम पर लगाती है, वेतन नहीं देती।’’

उन्होंने बताया कि कंपनी कभी एक महीने के लिए काम देती है और अगले महीने काम नहीं आती है; छुट्टी का वेतन भी काटा जाता है। ‘‘काम से गैरहाजिर रहने पर छुट्टी दी जाती है, लेकिन वेतन में कटौती की जाती है।’’ वेतन ४०० से ६०० रियाल तक मिलता है, जबकि उनका मासिक वेतन १५०० रियाल तय था। ‘‘६०० रियाल से न खुद का खर्च पूरा होता है न परिवार को भेजा जा सकता है।’’

कंपनी का दावा है कि फ्री वीजा पर भेजा गया है, जबकि वे २ लाख से अधिक खर्च करके गए हैं। ‘‘हमने २ लाख २५ हजार तक कर्ज लेकर गए थे, लेकिन कंपनी फ्री वीजा बताती है,’’ पीड़ित ने कहा।

नेपाल से जाते समय मैनपावर और एजेंट ने बताया था कि दैनिक १० घंटे काम होगा, जिसमें से ९ घंटे काम और १ घंटा आराम। लेकिन कामगारों के अनुसार उन्हें काम के दिनों में पूरे १० घंटे काम करना पड़ता है, और ओवरटाइम का एक पैसा भी नहीं मिलता।

एक पीड़ित ने कहा, ‘‘जितना भी ओवरटाइम किया, कोई पैसा नहीं मिला। आवागमन दूर है और काम की जगह से रहने की जगह तक आना-जाना २ से ३ घंटे लगता है। काम के दिन १० घंटे काम और आने-जाने में १२ से १६ घंटे लग जाते हैं।’’

कंपनी को समस्या बताने पर सुनवाई नहीं हुई। नेपाल में मौजूद मैनपावर, स्थानीय एजेंट और दूतावास में शिकायत करने के बावजूद कोई समाधान नहीं मिला। कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर वीडियो बनाकर अपनी समस्या जगजाहिर की, जिसके बाद कंपनी ने उन पर दबाव और बढ़ा दिया।

‘‘कोई सुनवाई नहीं होने पर मजबूर होकर वीडियो बनाया और सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। एक महीने से तो नाश्ता भी नहीं दिया जाता,’’ उन्होंने कहा।

पिछले १५ दिनों से काम पर नहीं लगाया गया है, और घर भेजने की मांग करने पर धमकी मिलती है कि दो साल पूरे किए बिना घर नहीं भेजा जाएगा। ‘‘मारने-पीटने की धमकी दी जाती है, कहते हैं कि दो साल पूरा होना जरूरी है।’’ उन्होंने बताया कि कम्पनी में काम करने वाले सभी नेपाली इसी समस्या का सामना कर रहे हैं, और आवाज उठाने पर धमकी मिलती है।

‘‘एक महीने से नाश्ता बंद है, काम नहीं होता तो नाश्ता और खाना दोनों बंद कर दिए जाते हैं,’’ वे बताते हैं।

कुछ ने ५ महीने वेतन न मिलने की बात कही, जबकि कुछ ने ४ से ६ महीने तक वेतन न मिलने की शिकायत की। ‘‘टॉयलेट के लिए मस्जिद जाना पड़ता है, यहां टॉयलेट के दरवाज़े पर ताला लगा है,’’ उन्होंने कहा।

इटहरी के मोबिरा ओवरसीज से आये एक अन्य पीड़ित ने मैनपावर और एजेंट से ध्यान न दिए जाने की बात कही। कर्ज लेकर परिवार छोड़कर काम के लिए गए उन्हें काम, वेतन और सेवा मांगने पर धमकी और कार्रवाई का सामना करना पड़ता है।

‘‘यहां आने का मकसद परिवार को पैसे भेजकर बच्चों की पढ़ाई, अच्छा खाना और कपड़े देना था। लेकिन यहां आकर हमें उल्टा दंड मिलता है। दो दिन काम करो तो चार दिन छुट्टी मिलती है,’’ उन्होंने कहा।

बीमारी होने पर इलाज नहीं मिलता, बीमा करवाने की बात कही गई थी लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ, यह भी उन्होंने बताया।

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